रायपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर प्रसव, नवजात की हुई मौत
समझें क्या है पूरा मामला
- रायपुर रेलवे स्टेशन पर एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा हुई।
- स्टेशन पर कोई भी स्थायी डॉक्टर तैनात नहीं था।
- यात्रियों और सफाई कर्मियों ने चादर का घेरा बनाकर प्रसव कराया।
- समय पर सही इलाज न मिलने से नवजात शिशु की मौत हो गई।
- रेलवे प्रशासन एक साल में भी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं कर पाया।
रायपुर स्टेशन पर प्रसव
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद दुखद और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के मुख्य रेलवे स्टेशन पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है। एक गर्भवती महिला को प्लेटफॉर्म पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। रेलवे स्टेशन पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
इस आपात स्थिति में वहां मौजूद लोग ही मदद के लिए आगे आए। महिला यात्रियों और सफाई कर्मचारियों ने मिलकर साड़ियों और चादरों का एक घेरा बनाया। इसी घेरे के बीच महिला का प्रसव कराया गया। हालांकि इस पूरी जद्दोजहद के बाद भी मासूम नवजात की जान नहीं बचाई जा सकी।
चलती ट्रेन में शुरू हुआ दर्द
बिहार के दरभंगा की रहने वाली लक्ष्मी देवी ट्रेन से सफर कर रही थीं। वह सिकंदराबाद से रक्सौल जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन के जनरल कोच में बैठी थीं। दुर्ग स्टेशन से ट्रेन आगे बढ़ी ही थी कि उन्हें तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
ट्रेन के भीतर महिला की हालत बिगड़ने लगी। यह देख कोच में मौजूद साथी यात्री परेशान हो गए। यात्रियों ने तुरंत इसकी जानकारी ट्रेन में मौजूद टीटीई (TTE) को दी। इसके बाद कमर्शियल कंट्रोल रूम के जरिए रायपुर स्टेशन को अलर्ट भेजा गया।
स्टेशन पर नहीं मिला कोई डॉक्टर
जब ट्रेन रायपुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर पहुंची, तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी थी। महिला को तुरंत ट्रेन से नीचे उतारा गया। स्टेशन पर कोई भी परमानेंट मेडिकल यूनिट चालू हालत में नहीं थी।
आपात स्थिति को देखते हुए वहां मौजूद लोग खुद ही डॉक्टर बन गए। महिलाओं ने चादरें तान दीं। इसके बाद रेलवे के डॉक्टर को बुलाया गया। डॉक्टर ने प्लेटफॉर्म पर ही प्रसव कराया। समय से पहले जन्म होने के कारण बच्चे की मौत हो गई।
तीन बार निकाला गया विज्ञापन
इस घटना ने रेलवे के दावों की पूरी सच्चाई सामने रख दी है। रायपुर जैसे बड़े स्टेशन पर पिछले एक साल से कोई स्थायी डॉक्टर नहीं है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने डॉक्टरों की भर्ती के लिए तीन बार विज्ञापन जारी किया।
इस पद के लिए एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री अनिवार्य रखी गई थी। कड़े नियमों और शर्तों के कारण किसी भी डॉक्टर ने आवेदन नहीं किया। इस वजह से स्टेशन पर डॉक्टरों का पद खाली पड़ा हुआ है।
आपात स्थिति के भरोसे सिस्टम
रायपुर रेल मंडल के डीआरएम (DRM) दयानंद ने इस मामले पर अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर बड़े स्टेशनों पर भी डॉक्टरों की परमानेंट ड्यूटी नहीं होती है। वहां केवल प्राथमिक चिकित्सा की ही व्यवस्था रहती है।
उन्होंने बताया कि जब भी कोई इमरजेंसी आती है, तो रेलवे अस्पताल से डॉक्टरों की टीम बुलाई जाती है। रायपुर में भी ऐसा ही किया गया था। लेकिन इस सिस्टम की सुस्ती ने एक मां की गोद सूनी कर दी।
FAQ
- भारतीय रेलवे के किस जोन और मंडल (Division) के अंतर्गत रायपुर रेलवे स्टेशन आता है, जहाँ यह घटना घटी?
उत्तर: रायपुर रेलवे स्टेशन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR - South East Central Railway) जोन के अंतर्गत आता है। इस जोन का मुख्यालय बिलासपुर में है। रायपुर स्वयं में एक महत्वपूर्ण रेलवे मंडल (Raipur Division) है, जो छत्तीसगढ़ के सबसे व्यस्त और कमाऊ रेल नेटवर्क में से एक माना जाता है। - रेल यात्रा के दौरान या रेलवे स्टेशन पर किसी आपातकालीन चिकित्सा स्थिति (Medical Emergency) में यात्री किस नंबर पर मदद मांग सकते हैं?
उत्तर: भारतीय रेलवे ने सभी सेवाओं के लिए एक एकीकृत हेल्पलाइन नंबर 139 जारी किया है। इस नंबर पर कॉल करके यात्री सुरक्षा, दुर्घटना, खान-पान के साथ-साथ तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता (Medical Assistance) भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (ट्विटर) पर @RailMinIndia को टैग करके भी मदद ली जा सकती है। - रेलवे नियमों के अनुसार, स्टेशन पर किसी यात्री की तबीयत बिगड़ने या प्रसव जैसी आपात स्थिति में प्राथमिक जिम्मेदारी किसकी होती है?
उत्तर: रेलवे नियमावली के अनुसार, स्टेशन पर मौजूद स्टेशन मास्टर (Station Master) या स्टेशन प्रबंधक की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह तुरंत रेलवे के डॉक्टर को सूचित करे। यदि रेलवे का डॉक्टर उपलब्ध न हो, तो उसे तुरंत नजदीकी जिला अस्पताल, सरकारी या निजी एम्बुलेंस (जैसे 108 सेवा) को बुलाकर मरीज को अस्पताल पहुँचाने की व्यवस्था करनी होती है। इसके लिए स्टेशन मास्टर के पास आपातकालीन फंड भी होता है।
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