कामधेनु विश्वविद्यालय की भर्ती पर राजभवन ने लगाई रोक, कृषि मंत्री रामविचार नेताम बोले- सच्चाई आएगी सामने
राज्यपाल सचिवालय ने 1 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के सदस्यों और अन्य लोगों की शिकायतों के बाद की गई है।
राजभवन ने क्यों लगाई भर्ती पर रोक?
राज्यपाल सचिवालय के आदेश के अनुसार, विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पदों पर भर्ती के साथ-साथ भवन निर्माण और रखरखाव कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई थीं। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जांच की प्रगति का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
शिकायतों में मुख्य रूप से:
- आरक्षण और रोस्टर में गड़बड़ी
- बैकलॉग पदों पर भर्ती
- स्वीकृत पदों से ज्यादा पदों का विज्ञापन
- स्थानीय शिक्षकों की पदोन्नति
- शिक्षकों को वेतन संरक्षण देने
- विभागों में पद तय करने
- पहले से तय रोस्टर में बदलाव
- कार्य परिषद की मंजूरी के बिना भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने
जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इन शिकायतों की जांच के बाद ही यह साफ होगा कि लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं।
भवन निर्माण को लेकर भी जांच
विश्वविद्यालय में भवन निर्माण और रखरखाव के काम को लेकर भी शिकायतें मिली हैं। इन कामों में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर चल रही जांच की प्रगति देखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मंत्री ने भी भर्ती रोकने के दिए थे निर्देश
इससे पहले कृषि विकास, किसान कल्याण एवं पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम ने भी विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे।
मंत्री ने जांच पूरी होने तक भर्ती प्रक्रिया रोकने की बात कही थी। इसके बाद अब राजभवन ने भी भर्ती पर रोक लगा दी है। इसके अलावा कार्यकारिणी परिषद की मंजूरी के बिना भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने और स्वीकृत सेटअप से अधिक पदों के लिए विज्ञापन जारी करने के आरोप भी लगाए गए थे।
विधायक ने राज्यपाल को लिखा था पत्र
इस मामले में स्थानीय विधायक ने 19 अगस्त 2026 को राज्यपाल को पत्र लिखा था। पत्र में भर्ती प्रक्रिया को लेकर युवाओं और अन्य लोगों की शिकायतों का हवाला दिया गया था।
विधायक ने भर्ती प्रक्रिया किसी राज्य स्तरीय एजेंसी या राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से कराने का सुझाव दिया था।
रामविचार नेताम ने फैसले का स्वागत किया
राजभवन के फैसले का मंत्री रामविचार नेताम ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की भर्ती और निर्माण कार्यों को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं।
मंत्री ने कहा कि इन मामलों को विधानसभा में भी उठाया गया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।
भर्ती विवाद की मुख्य वजह क्या है?
कामधेनु विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद मुख्य रूप से आरक्षण, रोस्टर, बैकलॉग पदों, स्थानीय शिक्षकों की पदोन्नति, वेतन संरक्षण और स्वीकृत पदों की संख्या को लेकर सामने आया।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्वीकृत सेटअप से अधिक पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया और कार्यकारिणी परिषद की आवश्यक मंजूरी के बिना प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
इन शिकायतों के बाद शासन स्तर पर उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए गए और अब राजभवन ने भी भर्ती प्रक्रिया को अगले आदेश तक रोक दिया है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल कामधेनु विश्वविद्यालय में 130 शैक्षणिक पदों की भर्ती, नियुक्ति और इंटरव्यू पर रोक रहेगी। शिकायतों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
शिकायतों में लगाए गए अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही हो सकेगा।
- राज्यपाल सचिवालय ने भर्ती पर रोक क्यों लगाई है?
राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पदों पर भर्ती और भवन निर्माण कार्यों में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों के आधार पर भर्ती पर रोक लगाई है। - कामधेनु विश्वविद्यालय में भर्ती विवाद क्या हैं?
कामधेनु विश्वविद्यालय में भर्ती विवाद में मुख्य रूप से आरक्षण, रोस्टर, बैकलॉग पदों पर भर्ती, स्वीकृत पदों से अधिक पदों का विज्ञापन, और कार्यकारिणी परिषद की मंजूरी के बिना भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की शिकायतें शामिल हैं। - अब इस मामले में आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
इस मामले में शिकायतों की जांच पूरी होने तक कामधेनु विश्वविद्यालय में 130 शैक्षणिक पदों की भर्ती पर रोक रहेगी, और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के बाद तय की जाएगी।