राजिम कुंभ...आस्था की त्रिवेणी में भक्ति, परंपरा और संस्कृति का विराट संगम

The Sootr | Feb 28, 2026, 13:50 IST
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छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम में 'राजिम कुंभ कल्प 2026' का भव्य आयोजन हुआ। माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चले इस उत्सव में त्रिवेणी संगम पर लाखों श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान किया।

Raipur. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित पवित्र नगरी राजिम में आयोजित 'राजिम कुंभ (कल्प) 2026' ने एक बार फिर आस्था, संस्कृति और अध्यात्म का भव्य दृश्य प्रस्तुत किया। 1 फरवरी से 15 फरवरी तक चले इस मेले में लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम की पावन धरा पर पहुंचे और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुए। माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चले इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार के प्रयासों से पूरा आयोजन बेहद व्यवस्थित और शांतिपूर्ण रहा।



गौरतलब है कि राजिम को छत्तीसगढ़ का 'प्रयाग' भी कहा जाता है। यहां महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का पवित्र संगम होता है, जिसे अत्यंत पुण्य स्थल माना जाता है। सदियों से इस संगम पर माघ महीने में स्नान और धार्मिक आयोजन की परंपरा रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हर वर्ष 'राजिम कुंभ कल्प' का आयोजन किया जाता है, जिसमें प्रदेश के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार साय सरकार ने इस आयोजन को और भी भव्य तरीके से संपन्न कराया।



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त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान

इस वर्ष राजिम कुंभ कल्प का भव्य शुभारंभ 1 फरवरी को माघ पूर्णिमा के दिन हुआ। साधु-संतों का स्वागत किया गया और श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान किया। इसके बाद पूरे मेले के दौरान प्रतिदिन धर्म-प्रवचन, भजन-कीर्तन, यज्ञ, आध्यात्मिक चर्चा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा। विभिन्न विभागों और संस्थाओं द्वारा प्रदर्शनी और जन-जागरूकता स्टॉल भी लगाए गए, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मेले का समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर हुआ। इस दिन शाही स्नान, भव्य शोभायात्रा और नागा साधुओं की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।



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समापन पर पहुंचे सीएम साय

समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी शामिल हुए और उन्होंने श्रद्धालुओं तथा संत-समाज को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, "राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उत्सव है।" उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रदेश की अस्मिता का प्रतीक है और आने वाले समय में इसे राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देशभर में मजबूत बनाने का माध्यम बनते हैं।



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धार्मिक महत्ता बेहद प्राचीन

राजिम की धार्मिक महत्ता बेहद प्राचीन मानी जाती है। यहां स्थित राजीवलोचन मंदिर भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में विराजमान हैं। वहीं कुलेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित प्रमुख तीर्थ स्थल है। इसके अलावा पटेश्वरनाथ महादेव, चंपेश्वरनाथ महादेव, ब्रह्मकेश्वरनाथ, फणीकेश्वरनाथ और कर्पूरेश्वर महादेव जैसे प्राचीन मंदिर भी यहां स्थित हैं। इन मंदिरों की 'पंचकोशी यात्रा' विश्व प्रसिद्ध मानी जाती है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में इसमें शामिल होते हैं।



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समूहों को मिला बाजार

राजिम कुंभ कल्प में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला। मेले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के तहत 'संभागीय सरस मेला 2026' का आयोजन किया गया। इसमें महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की व्यवस्था की गई। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने हस्तशिल्प, हैंडलूम, पारंपरिक खाद्य सामग्री, मसाले, ऑर्गेनिक उत्पाद, बांस शिल्प, सजावटी वस्तुएं और घरेलू उपयोग की कई वस्तुएं प्रदर्शित कीं। इससे महिला समूहों को अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिला।



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समापन पर भव्य प्रस्तुति

कुंभ के समापन अवसर पर त्रिवेणी संगम के तट पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में सुप्रसिद्ध कलाकार एवं भगवान श्रीराम की भूमिका से जनमानस में विशेष पहचान रखने वाले अरुण गोविल ने “सुनो श्री राम कहानी” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिससे संपूर्ण परिसर भक्ति और श्रद्धा के दिव्य वातावरण से ओतप्रोत हो उठा। इस अवसर पर अरुण गोविल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से भेंट की और राजिम कुंभ कल्प के भव्य आयोजन एवं उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की सराहना की।



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संगम क्षेत्र में बनेगा बैराज

समापन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने त्रिवेणी संगम क्षेत्र के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि संगम क्षेत्र में बैराज का निर्माण किया जाएगा। इससे नौका विहार को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन के नए अवसर तैयार होंगे। इस परियोजना से आसपास के 136 गांवों को पेयजल उपलब्ध होगा और किसानों को सिंचाई में भी सुविधा मिलेगी। यह घोषणा स्थानीय विधायक रोहित साहू की मांग पर की गई।



मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राजिम में साधु-संतों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 50 लाख रुपए से आधुनिक धर्मशाला का निर्माण कराया जाएगा। इससे यहां आने वाले संत-समाज और श्रद्धालुओं को ठहरने की बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी।



राजिम कुंभ कल्प 2026 ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की धार्मिक परंपराएं आज भी लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आस्था, संस्कृति और सामुदायिक एकता का यह भव्य आयोजन प्रदेश की पहचान को और मजबूत बना रहा है।



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