भगवान राम भी BJP-RSS की राजनीतिक लूट का शिकार, कांग्रेस का आरोप आस्था पर राजनीति

Arun Tiwari | Jul 11, 2026, 17:26 IST
राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद 2026
राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर कांग्रेस नेता कमलेश्वर पटेल ने बीजेपी, आरएसएस और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच, स्वतंत्र ऑडिट और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।

देश में राम मंदिर की चढ़ावा चोरी पर सियासत और बढ़ती जा रही है। कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य और मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम करोड़ों लोगों लोगों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं।



देश के कोने-कोने से गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई, अपने गहने, अपनी बचत और अपनी श्रद्धा लेकर राम मंदिर निर्माण के लिए आगे आए।



बीजेपी, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के संगठनों ने लगभग तीन दशकों तक भगवान राम के नाम पर राजनीति की। देश के गरीब व मध्यम वर्ग से राम के नाम पर चंदा एकत्र किया और इसी आंदोलन के आधार पर सत्ता प्राप्त की।



आज वही करोड़ों रामभक्त यह पूछने को मजबूर हैं कि भगवान राम के नाम पर जुटाया गया चंदा और चढ़ावा आखिर किसके संरक्षण में लूटा गया।



कांग्रेस के तीन बड़े सवाल :

जब ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ, तो इस घोटाले की जवाबदेही कौन लेगा?



अगर सब कुछ ठीक था, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए?



अगर कुछ गलत नहीं हुआ, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है?



कांग्रेस की मांग :

कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री स्पष्ट करें कि ट्रस्ट के गठन, शीर्ष नियुक्तियों और प्रशासनिक निगरानी में उनकी सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय की क्या भूमिका रही है और इतने गंभीर आरोपों के बाद वे अब तक मौन क्यों हैं।



चंपत राय, अनिल मिश्रा और इस पूरे घोटाले में शामिल सभी प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की जाए। पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस कथित लूट के पीछे कौन लोग हैं और किसके संरक्षण में यह सब वर्षों तक चलता रहा।



वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर धर्माचार्यों, प्रतिष्ठित नागरिकों, प्रशासनिक विशेषज्ञों और स्वतंत्र सदस्यों के साथ एक नया, पारदर्शी और जवाबदेह ट्रस्ट गठित किया जाए। राम मंदिर के चंदे, चढ़ावे, भूमि खरीद, आयोजनों और व्ययों का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।



कांग्रेस का कहना है कि भगवान राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं। वे करोड़ों भारतीयों की आस्था हैं। भगवान राम के नाम पर जुटाए गए धन की कथित लूट और उस पर पर्दा डालने की हर कोशिश देश की धार्मिक चेतना का अपमान है।



इस मामले में अब तक सामने आए तथ्य :

कांग्रेस का कहना है कि इस मामले की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं वे बेहद गंभीर हैं। कांग्रेस का कहना है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं।



यह स्वयं इस बात का संकेत है कि मामला सामान्य प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले का है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने स्वयं सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं जबकि ट्रस्ट की वित्तीय निगरानी, पारदर्शिता और संपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उन्हीं की थी।



मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ट्रस्ट के विशिष्ट आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को हटाए जाने और उनकी स्थिति को लेकर भी गंभीर भ्रम और विरोधाभास सामने आए हैं। आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को ट्रस्ट का नया महासचिव बनाया गया है जबकि उन पर पूरे प्रकरण को दबाने और लीपापोती करने के आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए जा चुके हैं।



यह जग जाहिर है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और शीर्ष नियुक्तियों में प्रधानमंत्री कार्यालय की सक्रिय भूमिका रही है। ऐसे में केंद्र सरकार अपनी जवाबदेही से स्वयं को अलग नहीं कर सकती।



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