अंडे देने पानी से बाहर निकले दुर्लभ कछुए, शिकारियों ने 700 रुपए किलो में बेचा
समझें क्या है पूरा मामला
कांकेर के परलकोट बाजार में दुर्लभ कछुआ बेचा जा रहा था। वन विभाग ने मुखबिर की सूचना पर रेड मारी। मौके से 11 जिंदा कछुए और तराजू बरामद किया गया। आरोपी दीपांकर राय बारदा नदी से कछुए पकड़ता था। कछुओं को सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
कांकेर में कछुआ तस्करी
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में वन्यजीवों की तस्करी रुक नहीं रही है। यहां संरक्षित श्रेणी का कछुआ सरेआम बेचा जा रहा था। तस्कर अधिक मुनाफे के लिए इसे बाजार में ला रहे थे। मांस के शौकीनों के कारण इसकी भारी मांग है। तस्कर अंदरूनी बाजारों से लेकर जिला मुख्यालय तक सक्रिय हैं। कछुए का मांस 700 रुपए प्रति किलो बेचा जा रहा था। मामला परलकोट इलाके के ग्राम पीवी 124 का है। यहां के साप्ताहिक बाजार में कछुआ बेचने की सूचना मिली थी।
11 जिंदा कछुए बरामद
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम हरकत में आई। टीम ने 23 जुलाई को बाजार में दबिश दी। मौके से आरोपी दीपांकर राय को गिरफ्तार किया गया। आरोपी पीवी 117 का निवासी है। उसके पास से 11 जिंदा कछुए बरामद हुए।
आरोपी के पास से तराजू और बाट भी मिला है। आरोपी ने बताया कि उसने बारदा नदी से कछुए पकड़े थे। वह इन्हें बेचने के लिए बाजार लाया था। वन विभाग ने कछुओं को अपने कब्जे में सुरक्षित रखा है।
आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA – Wildlife Protection Act) के तहत मामला दर्ज हुआ है। आरोपी को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। कछुओं को जल्द नदी में वापस छोड़ा जाएगा।
कछुओं का बढ़ता शिकार
जांच में पता चला कि नदी से अन्य लोग भी कछुए पकड़ रहे हैं। वन विभाग इनकी जानकारी जुटा रहा है। इससे पहले मई 2026 में पंढरीपानी से 7 कछुए पकड़े गए थे। क्षेत्र में कछुओं का शिकार लगातार बढ़ रहा है। कछुओं का यह प्रजनन काल चल रहा है। इस दौरान वे अंडे देने पानी से बाहर निकलते हैं। शिकारी इस मौके का फायदा उठाते हैं। वे आसानी से कछुओं को पकड़ लेते हैं।
कछुओं का व्यापार प्रतिबंधित
कछुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल हैं। यह अति दुर्लभ और संकटग्रस्त जीवों की श्रेणी है। अनुसूची-1 में कुल 43 वन्यजीव शामिल हैं। इनमें टाइगर, भालू और हिरण भी शामिल हैं। इन जीवों का शिकार और व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है। कानून का उल्लंघन करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। वन विभाग क्षेत्र में गश्त बढ़ा रहा है।
FAQ
- कछुआ (Turtle) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) की किस अनुसूची में आता है?
उत्तर: कछुए (विशेषकर दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियां) अनुसूची-1 (Schedule-1) में शामिल हैं, जिसमें बाघ, भालू और हिरण जैसे अति-संरक्षित जीव भी आते हैं। - वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) भारत में कब लागू किया गया था?
उत्तर: यह कानून वर्ष 1972 में पारित और लागू किया गया था। - कांकेर जिला और परलकोट क्षेत्र भारत के किस राज्य में स्थित हैं?
उत्तर: कांकेर (उत्तर बस्तर) और परलकोट क्षेत्र छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित हैं।
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