13 हजार दुकान हो जाएंगी बंद, राशन दुकान संचालकों का अल्टीमेटम

VINAY VERMA | Jun 29, 2026, 13:52 IST
राशन दुकान संचालकों का अल्टीमेटम 2026
छत्तीसगढ़ में राशन दुकान संचालकों ने सरकार के खिलाफ 9 सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ा अल्टीमेटम दिया है। संचालकों ने 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है, जिससे प्रदेश में लाखों हितग्राहियों को राशन वितरण प्रभावित हो सकता है।

छत्तीसगढ़ में लाखों हितग्राहियों तक राशन पहुंचाने वाली व्यवस्था पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। प्रदेश के राशन दुकान संचालकों ने सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है। दुकानदार 9 सूत्रीय मांगों को लेकर अडिग है। कहना है कि सही मेहनताना नहीं मिला, तो 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी। यानी लाखों परिवारों को राशन मिलने में परेशानी खड़ी हो सकती है।



90 रुपए में पूरा सिस्टम चलाओ!

राशन दुकान संचालकों का सबसे बड़ा आरोप मार्जिन मनी को लेकर है। उनका कहना है कि छग खाद्य सुरक्षा अधिनियम (CGFSA) के तहत सिर्फ 30 रुपए प्रति क्विंटल और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत 90 रुपए प्रति क्विंटल का मार्जिन दिया जा रहा है, जबकि दोनों योजनाओं में मेहनत एक जैसी करनी पड़ती है।



महंगाई बढ़ती जा रही है, लेकिन कमीशन वर्षों से नहीं बढ़ा। संचालकों ने सरकार से मांग की है कि न्यूनतम 150 रुपए प्रति क्विंटल मार्जिन तय किया जाए। उनका कहना है कि इतने कम भुगतान में दुकान का संचालन, कर्मचारी का वेतन और अन्य खर्च निकालना मुश्किल हो गया है।



7 महीने से भुगतान अटका, अब धैर्य भी खत्म

संचालकों ने सरकार पर भुगतान रोकने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नवंबर 2025 से पिछले सात महीनों की MFSA मार्जिन मनी अब तक जारी नहीं हुई है। इसके अलावा बारदाना राशि और आधार आधारित वितरण का भुगतान भी समय पर नहीं मिल रहा।



आर्थिक संकट से जूझ रहे संचालकों ने दुकान संचालकों और विक्रेताओं के लिए अनिवार्य बीमा की मांग भी उठाई है।



नई व्यवस्था बनी नई मुसीबत

ज्ञापन में राशन आवंटन के M2 सिस्टम को पूरी तरह खत्म करने की मांग की गई है। संचालकों का कहना है कि पूरा आवंटन नहीं मिलने से वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है। राशन कम पड़ने पर उपभोक्ताओं और दुकानदारों के बीच रोज विवाद की स्थिति बनती है।



साथ ही धर्मकांटा से तौलकर आने वाले अनाज को उपभोक्ताओं में अलग-अलग तौलकर बांटने से स्टॉक में कमी आ जाती है। इसलिए 1 प्रतिशत क्षतिपूर्ति देने की मांग की गई है।



मेहनत तिगुनी, परेशानी चौगुनी

संचालकों ने तीन महीने का राशन एकमुश्त वितरण करने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती है, दुकानों में भीड़ बढ़ जाती है, श्रम कई गुना बढ़ जाता है और गरीब परिवारों के कच्चे घरों में अनाज खराब होने का खतरा रहता है। उनका कहना है कि सरकार की यह व्यवस्था न हितग्राहियों के हित में है और न ही वितरण व्यवस्था के।



4 पैसे का कमीशन और FIR का डर

शक्कर वितरण पर मिलने वाले सिर्फ 4 पैसे प्रति किलो कमीशन को संचालकों ने मजाक बताया है। उन्होंने इसे बढ़ाकर 100 रुपए प्रति क्विंटल करने और बिक्री मूल्य 17 रुपए के बजाय 20 रुपए तय करने की मांग की है ताकि खुले पैसों का विवाद खत्म हो। साथ ही अगस्त से नवंबर 2016 तक के बकाया कमीशन का भुगतान, स्टॉक गणना की सरल व्यवस्था,POS मशीनों की तकनीकी खराबियों की जांच और राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में दर्ज होने वाली कथित झूठी FIR पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।



राशन व्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर

राशन दुकान संचालकों ने साफ कर दिया है कि यदि 9 सूत्रीय मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर प्रदेशभर की राशन दुकानें बंद हुईं तो करोड़ों हितग्राहियों तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली का अनाज कैसे पहुंचेगा। अब निगाहें सरकार पर हैं कि वह बातचीत का रास्ता चुनती है या फिर राशन व्यवस्था को संकट में जाने देती है।



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