छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में उछाल, 5 वर्षों में दोगुना हुआ राज्य का राजस्व संग्रह
NEWS IN SHORT
- पिछले पांच साल में भू-राजस्व में गिरावट आई।
- राज्य के कुल कर संग्रह में दोगुना वृद्धि हुई।
- GST में 105% और उत्पाद शुल्क में 118% वृद्धि।
- वाहनों पर कर और विद्युत कर में लगातार वृद्धि।
- कृषि भूमि औद्योगिक और आवासीय भूमि में बदल रही है।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में पिछले पांच वर्षों के दौरान काफी सकारात्मक बदलाव आया है। जहां एक ओर किसानों से वसूली जाने वाले भू-राजस्व में कमी आई है, वहीं राज्य के राजस्व संग्रह में दोगुना वृद्धि देखी गई है। पांच साल पहले जहां राज्य को लगभग 22 हजार करोड़ रुपए का राजस्व संग्रहण हुआ, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 44 हजार करोड़ रुपए तक पहुँच गया है। यह बढ़ोतरी राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा संकेत है।
राजस्व संग्रह में हुई बढ़ोतरी के प्रमुख कारण
मुख्य रूप से राज्य वस्तु एवं सेवा कर (GST), राज्य उत्पाद शुल्क, विद्युत कर, और वाहनों पर कर में वृद्धि हुई है। इन मदों से राज्य को अत्यधिक राजस्व प्राप्त हुआ है। उदाहरण के तौर पर, राज्य GST में 105.61% की वृद्धि हुई है, जो अब 8,373.58 करोड़ रुपए तक पहुँच चुका है। इसी तरह, राज्य उत्पाद शुल्क में 118.80% और विद्युत कर में 116.24% की वृद्धि हुई है। इन आंकड़ों से यह साफ है कि राज्य में उपभोग और व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं।
भू-राजस्व में कमी
हालांकि, दूसरी ओर भू-राजस्व (लैंड रेवेन्यू) में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट आई है। 2021-22 में यह 949.94 करोड़ रुपए था, जो अब घटकर 819.04 करोड़ रुपए हो गया है। यह गिरावट राज्य की कृषि हितैषी नीतियों का परिणाम हो सकती है, क्योंकि सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों को राहत देने के उद्देश्य से भू-राजस्व की वसूली में रियायत दी है।
इसके अलावा, राज्य में तेजी से शहरीकरण और औद्योगिकीकरण हो रहा है, जिससे कृषि भूमि औद्योगिक या आवासीय भूमि में बदल रही है, और इसके कारण भू-राजस्व का दायरा सीमित हो गया है।
राजस्व के दो मजबूत स्तंभ
राज्य की आय में सबसे बड़ी हिस्सेदारी छत्तीसगढ़ वस्तु एवं सेवा कर (CGST) की रही है। इसमें पांच वर्षों में 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, जो अब 16,298.59 करोड़ रुपए तक पहुँच गई है। इसके साथ ही राज्य उत्पाद शुल्क में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जो 4,635.80 करोड़ रुपए से बढ़कर 10,141.84 करोड़ रुपए हो गया है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि राज्य में व्यापार और उद्योग की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।
आर्थिक वृद्धि के संकेत
इसके अलावा, राज्य में बुनियादी ढांचे और परिवहन क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव आए हैं। वाहनों पर कर में 101.94% की वृद्धि हुई है, जो अब 1,169.92 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,027.5 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।
यह वृद्धि नागरिकों की बढ़ती क्रय शक्ति को दर्शाती है। इसके साथ ही, स्टाम्प और पंजीकरण शुल्क में भी वृद्धि हुई है, जो 1,514 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,968.94 करोड़ रुपये हो गया है, यह जमीन और संपत्तियों की बढ़ती खरीद-फरोख्त का संकेत है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियों और सुधारों ने राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त किया है। जहां किसानों से वसूला जाने वाला भू-राजस्व कम हुआ है, वहीं व्यापार, उद्योग, और उपभोग क्षेत्र में हुई वृद्धि ने राज्य के खजाने को मजबूत किया है। यह आर्थिक विकास का एक सकारात्मक संकेत है और भविष्य में राज्य की अर्थव्यवस्था को और अधिक प्रगति की दिशा में बढ़ने का अवसर देगा।
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