छत्तीसगढ़ में बढ़ा डिप्रेशन, युवाओं ने मांगी हेल्पलाइन से मदद
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में मानसिक तनाव, अवसाद और अकेलापन तेजी से बढ़ रहा है। हर दिन औसतन 64 लोग मदद के लिए मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन 14416 पर कॉल कर रहे हैं। बीते एक साल में इस हेल्पलाइन पर 23,329 कॉल आए। इनमें से 5.27 प्रतिशत यानी 1,229 लोग ऐसे थे, जिनके मन में गंभीर विचार आ रहे थे। हेल्पलाइन पर सबसे ज्यादा 78.42 प्रतिशत कॉल 18 से 45 साल के युवाओं और कामकाजी लोगों के रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब लोग मानसिक परेशानी छिपाने के बजाय खुद आगे आकर मदद मांग रहे हैं। यह बदलाव सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
किन उम्र के लोग कर रहे हैं सबसे ज्यादा कॉल
आंकड़ों के अनुसार 18 से 45 साल के लोगों की कॉल सबसे ज्यादा हैं। यह वर्ग करियर, रोजगार और पारिवारिक दबाव से जूझ रहा है। 46 से 64 साल के लोगों की कॉल 11.07 प्रतिशत रही। वहीं 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों ने भी हेल्पलाइन पर संपर्क किया। 13 से 17 साल के किशोरों की कॉल भी 6.40 प्रतिशत दर्ज हुई।
काउंसलिंग से बची दो जिंदगियां
ओडिशा से काम की तलाश में छत्तीसगढ़ आया एक युवक आर्थिक तंगी और अकेलेपन से टूट गया था। उसने कठिन कदम उठाने का मन बना लिया था। लेकिन गूगल पर नंबर खोजकर उसने टेली-मानस हेल्पलाइन पर कॉल किया। काउंसलर ने उससे बात कर उसे संभाला और तुरंत रायपुर के अस्पताल की इमरजेंसी भेजा। वहां समय रहते उसकी जान बचाई गई।
दूसरे मामले में एक 16 साल के किशोर ने कॉल कर कहा कि माता-पिता उसे समझते नहीं हैं और वह जीना नहीं चाहता। धैर्य से काउंसलिंग के बाद उसे मां के साथ अस्पताल बुलाया गया। पता चला कि वह अपनी बात मनवाने के लिए ऐसी धमकी देता था। संयुक्त काउंसलिंग के बाद अब मां-बेटे के रिश्ते और बच्चे की मानसिक स्थिति में सुधार आया है।
सबसे बड़ा खतरा क्या है
आंकड़ों के मुताबिक करीब 31.9 प्रतिशत यानी हर तीसरा व्यक्ति गंभीर उदासी और डिप्रेशन जैसी स्थिति से जूझ रहा है। सोशल प्रेशर भी एक बड़ी वजह है। परीक्षा का डर, वर्कप्लेस स्ट्रेस और टूटते रिश्ते युवाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं, जिसकी दर 21.2 प्रतिशत है। नींद न आना और बेवजह घबराहट जैसी समस्याएं भी लोगों को अंदर से कमजोर कर रही हैं। ये आंकड़े क्रमशः 2.27 और 1.95 प्रतिशत दर्ज हुए हैं।
हेल्पलाइन के बारे में विशेषज्ञ की राय
टेली-मानस छत्तीसगढ़ के प्रभारी का कहना है कि मानसिक रोग या नशे की लत से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हेल्पलाइन पर 24 घंटे कभी भी कॉल किया जा सकता है। काउंसलर्स तुरंत जवाब देकर वैज्ञानिक तरीके से समाधान का प्रयास करते हैं।
स्क्रीनिंग में मिले लाखों मरीज
साल 2025-26 के दौरान प्रदेश में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स और ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों ने 19.37 लाख लोगों की मानसिक स्क्रीनिंग की। इनमें से 2.32 लाख यानी 12.01 प्रतिशत लोग मानसिक रूप से बीमार पाए गए। इनका इलाज फिलहाल जारी है।
इससे पिछले साल यानी 2024-25 में भी 20.8 लाख लोगों की जांच में 2.42 लाख मरीज मिले थे। यह आंकड़ा बताता है कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्या लगातार बड़ी चुनौती बनी हुई है।
क्यों बढ़ रही है यह समस्या
मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के एक नोडल अधिकारी के अनुसार पहले लोग मानसिक दिक्कतें छिपाते थे। लेकिन अब वे खुद आगे आकर अपनी बात बता रहे हैं। उनके मुताबिक खराब दिनचर्या, गलत रहन-सहन, ज्यादा स्क्रीन टाइम, अकेलापन और जरूरत से ज्यादा तनाव इसकी मुख्य वजहें हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार स्क्रीनिंग कर इलाज उपलब्ध करा रही हैं।
FAQ
- मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन का नंबर क्या है?
छत्तीसगढ़ में मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन (टेली-मानस) का नंबर 14416 है। इस पर 24 घंटे कभी भी कॉल किया जा सकता है। काउंसलर्स तुरंत मदद उपलब्ध कराते हैं। - हेल्पलाइन पर सबसे ज्यादा कॉल किस उम्र के लोगों की हैं?
सबसे ज्यादा 78.42 प्रतिशत कॉल 18 से 45 साल के युवाओं और कामकाजी लोगों की हैं। यह वर्ग करियर, रोजगार और पारिवारिक दबाव से जूझ रहा है। बुजुर्गों ने भी हेल्पलाइन पर कॉल किया है। - मानसिक स्क्रीनिंग में कितने मरीज मिले?
साल 2025-26 में 19.37 लाख लोगों की स्क्रीनिंग में 2.32 लाख मानसिक बीमार मिले। इनका इलाज जारी है। पिछले साल भी लाखों की जांच में बड़ी संख्या में मरीज मिले थे।
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