बारिश में जलभराव से जूझ रहे शहर, विभाग में पड़े डेढ़ हजार करोड़ का नहीं हुआ इस्तेमाल
शहरों को जलभराव से बचाने, कचरा उठाने, सीवेज व्यवस्था सुधारने और सड़क-नाली बनाने के लिए केंद्र से बड़ी राशि मिली, लेकिन उसका पूरा उपयोग नहीं हो पाया। खबर के मुताबिक 2025-26 में केंद्र की योजनाओं और 15वें वित्त आयोग के तहत नगरीय निकायों के लिए करीब 4 हजार 977 करोड़ 7 लाख रूपए का प्रावधान था। इसमें से 3 हजार 543 करोड़ 66 लाख रूपए ही खर्च हो सके, जबकि 1 हजार 433 करोड़ 41 लाख रूपए खर्च नहीं हुए हैं। यानी करीब 29% राशि का उपयोग नहीं हो सका है।
पैसा होने के बावजूद काम क्यों नहीं हुए?
कई योजनाओं में पैसा मिलने के बाद भी उसे सीधे खर्च नहीं किया जा सकता। पहले डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट), तकनीकी स्वीकृति, टेंडर और वर्क ऑर्डर जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं। जमीन उपलब्ध होना और काम पूरा होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया भी जरूरी होती है।
यही वजह बताई गई है कि कई योजनाओं की राशि खाते में रहने के बावजूद जमीन पर काम शुरू नहीं हो पाए।
सबसे बड़ी परेशानी सॉलिड और यूज्ड वाटर मैनेजमेंट में
आंकड़ों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली स्थिति सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और यूज्ड वाटर मैनेजमेंट की है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए ₹190.60 करोड़ स्वीकृत हुए, लेकिन सिर्फ ₹1 करोड़ 22 लाख खर्च हुए। इसी तरह यूज्ड वाटर मैनेजमेंट में 145 करोड़ 9 लाख में से केवल ₹3 करोड़ 77 लाख खर्च किए जा सके।
इसका सीधा असर शहरों की सफाई, कचरा प्रबंधन, नाली और जल निकासी व्यवस्था पर पड़ सकता है।
रायपुर जैसे शहरों में क्या असर?
पैसा खर्च नहीं होने से नाली और जल निकासी के काम अटकने पर बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। कई जगहों पर नाली और जल निकासी के काम समय पर नहीं हो पाए। इससे लोगों को बारिश में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रायपुर में भी जल निकासी और सीवेज व्यवस्था को लेकर पहले से चुनौतियां दर्ज की गई हैं।
अब क्या करने की जरूरत?
विशेषज्ञों के मुताबिक नगरीय निकायों को ऐसे कामों में डीपीआर, जमीन, टेंडर और तकनीकी स्वीकृति पहले से पूरी रखनी चाहिए। इससे केंद्र से राशि मिलने के बाद काम शुरू करने में देरी नहीं होगी।
साल खत्म होने से पहले योजनाओं की तैयारी पूरी कर ली जाए तो सड़क, नाली, कचरा प्रबंधन और जल निकासी जैसे जरूरी काम समय पर कराए जा सकते हैं।
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