छत्तीसगढ़ RTE : निजी स्कूलों का बड़ा फैसला,फिर मिलेंगे गरीब बच्चों को एडमिशन

Aishwarya Dwivedi | May 17, 2026, 17:37 IST
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छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों ने आंदोलन के रुख को बदलते हुए 18 मई से RTE के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश पुनः शुरू करने का संवेदनशील फैसला लिया है, हालांकि उनकी मांगें यथावत हैं।

NEWS IN SHORT

  • निजी स्कूलों ने बदला फैसला, फिर शुरू होंगे RTE प्रवेश।
  • गरीब और वंचित बच्चों के हित में लिया संवेदनशील निर्णय।
  • 18 मई से छत्तीसगढ़ के सभी निजी स्कूलों में दाखिले।
  • प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर है।
  • एंट्री क्लास बदलने से हजारों बच्चे प्रभावित हो रहे हैं।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत गरीब बच्चों के दाखिले को लेकर चल रहा गतिरोध अब खत्म हो गया है। निजी स्कूल संचालकों ने एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लेते हुए अपने असहयोग आंदोलन के रुख में बदलाव किया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने घोषणा की है कि 18 मई से प्रदेश के सभी निजी स्कूलों में RTE के तहत दोबारा प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी, ताकि गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।



आंदोलन की पृष्ठभूमि और मांगें

बता दें कि निजी स्कूल संचालकों ने सरकार पर अपनी मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए 1 मार्च से असहयोग आंदोलन शुरू किया था। इसके बाद 4 अप्रैल को एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने RTE के तहत नए प्रवेश पूरी तरह से रोकने का निर्णय लिया था। स्कूल संगठन की मुख्य मांगें प्रतिपूर्ति राशि (Reimbursement Amount) बढ़ाने और शिक्षा विभाग द्वारा एंट्री क्लास के नियमों में किए गए बदलावों को वापस लेने से जुड़ी हैं।



सीटों का गणित और आंदोलन का असर

स्कूल शिक्षा विभाग के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 33 जिलों में से 29 जिलों में RTE की 50 प्रतिशत से अधिक सीटें खाली रह गई हैं। एसोसिएशन ने इसे अपने आंदोलन का बड़ा असर बताया है। उनका कहना है कि इस गतिरोध के कारण बड़ी संख्या में दाखिले प्रभावित हुए, जिससे सरकार पर दबाव बना। इसके अलावा, संगठन ने एंट्री क्लास को बदलकर पहली कक्षा करने का भी कड़ा विरोध किया है। उनका दावा है कि इस नए नियम के कारण जहां पहले हर साल लगभग 65 हजार बच्चों को प्रवेश मिलता था, वहीं अब यह संख्या घटकर सिर्फ 22 हजार रह गई है, जिससे हजारों गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।



मामला पहुंचा हाईकोर्ट और अवमानना नोटिस

प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने का यह विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। संगठन द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को छह महीने के भीतर फैसला लेने का आदेश दिया था। एसोसिएशन का आरोप है कि कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर उन्होंने अवमानना याचिका दाखिल की, जिसके बाद हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेसी को नोटिस जारी किया है।



आगे की रणनीति: छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की प्रांतीय कार्यकारिणी ने यह साफ कर दिया है कि उनका असहयोग आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी और एंट्री क्लास के पुराने नियम को बहाल करने जैसी मांगों को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा। हालांकि, बच्चों के भविष्य और मानवीय आधार को ध्यान में रखते हुए फिलहाल प्रवेश प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जा रहा है।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा मानवीय आधार पर RTE प्रवेश दोबारा शुरू करने का निर्णय सराहनीय है। इससे हजारों गरीब बच्चों का भविष्य अंधकार में होने से बच गया। हालांकि, प्रतिपूर्ति राशि और एंट्री क्लास नियमों को लेकर स्कूलों का आंदोलन जारी है, जिसके स्थायी समाधान के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।



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