RTI से खुला कागजी कर्मचारियों का कच्चा चिट्ठा, सफाई व्यवस्था के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध
NEWS IN SHORT
- रायपुर में सफाई व्यवस्था में भ्रष्टाचार का खुलासा
- RTI से सामने आई सरकारी धन का दुरुपयोग
- फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन का गबन
- पार्षद प्रतिनिधि का नाम भी भुगतान सूची में
- प्रशासन ने जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के रायपुर नगर निगम जोन-1 में सफाई व्यवस्था को लेकर एक बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। जिसे एक RTI कार्यकर्ता ने उजागर किया। कन्हैयालाल बाजारी वार्ड-15 में यह घोटाला सामने आया, जहां सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं।
RTI के जरिए प्राप्त दस्तावेजों ने पूरी सफाई व्यवस्था के काले पक्ष को उजागर किया है। इन दस्तावेजों में साफ संकेत हैं कि सफाई ठेकेदार और नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी पैसे का गबन किया जा रहा है।
फर्जी कर्मचारियों की मौजूदगी और ‘कागजी स्टाफ’ का खेल
जांच के दौरान यह पता चला कि सफाई कर्मचारियों के आधार कार्ड और उपस्थिति रजिस्टर में भारी अंतर है। सफाई कर्मियों के आधार कार्ड में दर्ज फोटो और विवरण, उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज नामों से मेल नहीं खाते। इसके अलावा, कई कर्मचारी ऐसे हैं जिनके नाम भुगतान सूची में शामिल हैं, लेकिन वे कभी वार्ड में दिखाई नहीं दिए।
यह पूरी तरह से दर्शाता है कि इन कर्मचारियों के नाम पर वेतन निकाला जा रहा है, जबकि वे काम पर नहीं थे। यह एक सुसंगठित फर्जीवाड़ा है, जिसे ठेकेदार और निगम अधिकारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया जा रहा है।
पार्षद प्रतिनिधि का नाम भी भुगतान सूची में
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि पार्षद प्रतिनिधि हेमंत कुमार साहू का नाम भी सफाई कर्मचारियों की सूची में शामिल किया गया है। उनके नाम पर भी भुगतान उठाया गया है, जो कि न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि जनप्रतिनिधि की भूमिका पर भी सवाल उठाता है। यह घटना यह सिद्ध करती है कि सफाई व्यवस्था में भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार लोग उच्च स्तर तक पहुंच चुके हैं।
कागजों में 38 कर्मचारी, लेकिन धरातल पर केवल आधे
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कागजों पर 38 सफाई कर्मचारियों की तैनाती दिखाई गई है, जबकि वास्तविकता में वार्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या आधी से भी कम है।
बावजूद इसके, इन सभी कर्मचारियों के नाम पर वेतन निकाला जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह घोटाला योजनाबद्ध तरीके से किया गया है और इसके पीछे बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की संलिप्तता है।
निगम और ठेकेदार की मिलीभगत
वार्ड के नागरिकों का कहना है कि सफाई ठेकेदार ने नगर निगम अधिकारियों के साथ मिलकर एक फर्जी लेबर सिस्टम तैयार किया है। RTI से प्राप्त दस्तावेजों में आधार और कर्मचारी सूची का मिलान न होना यह साबित करता है कि यह घोटाला सुनियोजित तरीके से किया गया है।
जांच और प्रशासन की कार्रवाई
इस भ्रष्टाचार के मामले के सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। अधिकारियों ने घोषणा की है कि आधार कार्ड और कर्मचारी सूची का पुनः सत्यापन किया जाएगा। यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जनता का आक्रोश और पारदर्शिता की मांग
इस खुलासे के बाद वार्ड के नागरिकों में गहरा आक्रोश है। उन्होंने प्रशासन से पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि अगर इस घोटाले में दोषियों को सजा नहीं मिली, तो भविष्य में ऐसे भ्रष्टाचार के मामलों को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा।
निष्कर्ष
इस मामले में बड़े स्तर पर सफाई व्यवस्था में भ्रष्टाचार सामने आया है। RTI के जरिए फर्जी कर्मचारियों और सरकारी धन के दुरुपयोग का खुलासा हुआ। प्रशासन ने कार्रवाई की बात कही है, और जनता ने पारदर्शिता की मांग की है। दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
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