आरटीआई छत्तीसगढ़: सरकारी कर्मचारियों के निजी दस्तावेज नहीं होंगे सार्वजनिक
समझें क्या है पूरा मामला
बिलासपुर हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार पर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के निजी दस्तावेजों को सुरक्षित माना है। अब कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किए जा सकेंगे। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए बड़ा जनहित होना जरूरी है। यह मामला रायगढ़ जिले के एक पटवारी से जुड़ा है।
निजी दस्तावेज नहीं होंगे सार्वजनिक
सूचना के अधिकार कानून को लेकर एक बड़ा सुरक्षात्मक फैसला सामने आया है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने साफ किया है कि लोक सेवकों की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब किसी भी सरकारी कर्मचारी के व्यक्तिगत दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे। जन सूचना अधिकारी बिना किसी ठोस कारण के ये जानकारियां किसी को नहीं सौंप सकते।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को व्यक्तिगत श्रेणी में रखा है। इसमें सरकारी कर्मचारी का जाति प्रमाण पत्र शामिल है। इसके साथ ही निवास प्रमाण पत्र और शैक्षणिक योग्यता के कागजात भी इसमें आएंगे। नियुक्ति के समय दिया गया हलफनामा और सर्विस रिकॉर्ड भी अब पूरी तरह गोपनीय रहेगा। कोर्ट ने कहा कि यह सब कर्मचारी की निजी जिंदगी का हिस्सा है।
पटवारी की याचिका पर आया फैसला
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का है। वहां के लैलूंगा तहसील में रामनाथ सिंह पटवारी के पद पर पदस्थ हैं। उनकी नियुक्ति 7 मार्च 2024 को हुई थी। वर्तमान में वे पटवारी हल्का नंबर 30, कामरगा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी नियुक्ति के बाद एक निजी संगठन ने उनकी पूरी जानकारी मांग ली थी।
क्राइम फ्री इंडिया फोर्स (Crime Free India Force) नाम के संगठन ने आरटीआई के तहत आवेदन लगाया था। यह आवेदन अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) सह जन सूचना अधिकारी के सामने पेश किया गया था। इस आवेदन में पटवारी रामनाथ सिंह के सभी निजी दस्तावेज मांगे गए थे। संगठन ने उनके निवास, जाति प्रमाण पत्र और सर्विस रिकॉर्ड की कॉपियां मांगी थीं।
कर्मचारी ने जताई थी आपत्ति
अपने निजी दस्तावेज इस तरह मांगे जाने पर पटवारी ने चिंता जताई थी। उन्हें अंदेशा था कि उनकी निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल हो सकता है। इसी आशंका को देखते हुए पटवारी रामनाथ सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर अपनी बात मजबूती से रखी।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि मांगे गए दस्तावेज पूरी तरह से व्यक्तिगत हैं। इन दस्तावेजों का किसी भी सार्वजनिक गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है। इससे कोई व्यापक जनहित भी नहीं जुड़ा है। पटवारी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पुराने फैसलों का भी हवाला दिया था।
कोर्ट ने जन सूचना अधिकारियों को दिए निर्देश
जस्टिस की सिंगल बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को सही पाया। हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक कोई बड़ा जनहित प्रमाणित न हो, तब तक आरटीआई में ऐसी जानकारियां नहीं दी जा सकतीं। कोर्ट ने सभी जन सूचना अधिकारियों को इस नियम का कड़ाई से पालन करने को कहा है।
अदालत ने माना कि सरकारी नौकरी में आने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति की निजता खत्म हो जाए। किसी भी नागरिक की तरह सरकारी कर्मचारी को भी गोपनीयता का अधिकार है। सूचना के अधिकार कानून का इस्तेमाल किसी की निजी जिंदगी में तांक-झांक के लिए नहीं किया जा सकता। इस फैसले से राज्य के लाखों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।
FAQ
- हाईकोर्ट ने आरटीआई को लेकर क्या बड़ा फैसला दिया है?
उत्तर: हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकारी कर्मचारियों के जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज और सर्विस रिकॉर्ड जैसी निजी जानकारियां आरटीआई के तहत सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। - आरटीआई (RTI) के तहत कर्मचारियों की निजता की सुरक्षा के मामले में छत्तीसगढ़ के किस जिले की तहसील का मामला देश भर में चर्चा में आया?
उत्तर: यह मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की लैलूंगा तहसील का है। यहाँ पदस्थ पटवारी रामनाथ सिंह ने अपने व्यक्तिगत दस्तावेजों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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