सक्ती आवास घोटाला : भाजपा नेताओं पर आरोप, पटवारी निलंबित
NEWS IN SHORT
- सक्ती में पीएम आवास योजना के नाम पर बड़ा घोटाला।
- भाजपा नेताओं और पटवारी पर फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप।
- करीब 700 गरीब परिवारों से वसूली गई मोटी रकम।
- नियमों को ताक पर रखकर सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण।
- कलेक्टर ने आरोपी पटवारी को सस्पेंड कर जांच बैठाई।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के बाराद्वार नगर पंचायत से प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) में बड़े फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां सत्ताधारी दल बीजेपी के कुछ नेताओं और हल्का पटवारी पर मिलीभगत कर सरकारी जमीन के नक्शे में छेड़छाड़ करने और पीएम आवास का लाभ दिलाने के नाम पर करीब 700 गरीब परिवारों से मोटी रकम वसूलने का गंभीर आरोप लगा है।
मामला उजागर होने के बाद सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने त्वरित एक्शन लेते हुए आरोपी पटवारी को सस्पेंड कर दिया है और पूरे मामले की जांच के लिए डिप्टी कलेक्टर की अगुवाई में एक टीम गठित कर दी है।
दफ्तर में बैठकर बनाए फर्जी दस्तावेज
बाराद्वार नगर पंचायत के नेता प्रतिपक्ष अभिषेक राय ने कलेक्टर से मामले की लिखित शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार, नगर पंचायत के कुछ पार्षदों ने हल्का पटवारी रमेंद्र राठौर के साथ मिलकर भ्रष्टाचार का यह पूरा ताना-बाना बुना।
घास भूमि पर कब्जा : नियम के मुताबिक केवल आबादी भूमि पर रहने वाले पात्र लोगों को ही अधिकार पत्र देकर पीएम आवास का लाभ दिया जा सकता है। लेकिन इस खेल में 'घास भूमि' (सरकारी जमीन) पर रहने वाले लोगों से पैसे लेकर उन्हें फर्जी तरीके से आवास देने की तैयारी की जा रही थी।
बिना वेरिफिकेशन कागजी खानापूर्ति : पटवारी रमेंद्र राठौर पर आरोप है कि उन्होंने मौके पर जाकर कोई जमीनी जांच (फिजिकल वेरिफिकेशन) नहीं की। दफ्तर में बैठकर ही फर्जी दस्तावेज तैयार कर दिए गए, जबकि नियमतः संबंधित घरों का जियो टैग होना अनिवार्य है।
करोड़ों के नुकसान की आशंका : अगर इस फर्जीवाड़े को समय रहते नहीं रोका जाता, तो शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण के साथ-साथ शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगना तय था।
गरीबों के सपनों से खिलवाड़
नेताओं और अधिकारियों के इस गठजोड़ ने सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना को कमाई का जरिया बना लिया। जिन 700 गरीब परिवारों से मोटी रकम वसूली गई है, वे इस धोखे से पूरी तरह अनजान हैं। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मकान बनने के बाद इन गरीब परिवारों को भविष्य में बेदखली और कानूनी कार्रवाई जैसी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने न सिर्फ आरोपी पटवारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया, बल्कि यह भी साफ किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद इस घोटाले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल डिप्टी कलेक्टर मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं और जल्द ही इसमें शामिल अन्य रसूखदारों पर भी गाज गिर सकती है।
निष्कर्ष
सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार गरीबों के हक पर डाका है। सक्ती जिले का यह मामला दर्शाता है कि कैसे रसूखदार और कर्मचारी मिलकर नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं। हालांकि, प्रशासन द्वारा पटवारी को सस्पेंड करना और जांच बैठाना एक सराहनीय कदम है, जिससे दोषियों पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद बंधी है।
FAQ
- पीएम आवास योजना के क्या नियम है।
पीएम आवास का लाभ केवल 'आबादी भूमि' (Basti Land) पर रहने वालों को मिलता है। इसमें जियो-टैगिंग (GPS लोकेशन फोटो) अनिवार्य है। - घास भूमि क्या है।
यह मवेशियों के चरने के लिए आरक्षित सरकारी जमीन होती है। इस पर पट्टा या निर्माण पूरी तरह गैर-कानूनी है। - आवास योजना में पटवारी की क्या भूमिका हैं।
राजस्व विभाग का सबसे जमीनी कर्मचारी, जिसका काम जमीन का जमीनी सत्यापन (Physical Verification) और नक्शा/खसरा रिकॉर्ड बनाए रखना है। - इसमें कलेक्टर का प्रशासनिक अधिकार क्या होता हैं।
जिला स्तर पर कलेक्टर सर्वोच्च राजस्व अधिकारी होता है, जिसे लापरवाही या भ्रष्टाचार पर पटवारी को सस्पेंड करने का अधिकार है।
यह खबरें भी पढ़ें...
PM Awas Yojana 2.0 से बनेगा आपके सपनों का घर, ऐसे करें आवेदन
PM Awas Yojana | आपके सपनों का आशियाना दिलाने में बहुत काम आएंगे ये दो बड़े बदलाव
PM Awas Yojana | आपको सपनों का आशियाना दिलाने में बहुत काम आएंगे ये दो बड़े बदलाव
Don't Miss This Video | केंद्र सरकार ने PM Awas Yojana में किए तीन बड़े बदलाव, जानिए क्या ?