सर्पदंश घोटाला मामला : अब EOW खोलेगी फर्जी मुआवजे की पोल
समझें क्या है पूरा मामला
- सर्पदंश मुआवजे में 17 करोड़ का फर्जीवाड़ा, EOW करेगी जांच
- बिलासपुर में सांप के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी का खुलासा
- फर्जी सर्पदंश केस बनाकर हड़पे 17 करोड़, गैंग पर शिकंजा
- एडवोकेट डायमंड गैंग का खुलासा, अब होगी आर्थिक जांच
- मुआवजे के खेल में बड़ा घोटाला, EOW खोलेगी राज
Bilaspur : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सामने आए फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को सौंपी जा सकती है। पुलिस ने इस मामले में बड़े नेटवर्क की आशंका जताई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये का सरकारी मुआवजा बांट दिया गया।
डीजीपी अरुण देव गौतम ने इस मामले को गंभीर आर्थिक अनियमितता बताया है। उनका कहना है कि स्थानीय पुलिस ने अब तक प्रभावी कार्रवाई की है, लेकिन मामले में आर्थिक लेन-देन और पूरे नेटवर्क की जांच के लिए विशेषज्ञ एजेंसी की जरूरत है। इसी को देखते हुए शासन को EOW जांच का प्रस्ताव भेजा गया है।
फर्जी सर्पदंश मामलों से निकला करोड़ों का घोटाला
सरकार की योजना के तहत सर्पदंश से मौत होने पर मृतक के परिवार को चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसी योजना का फायदा उठाने के लिए आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
जांच में पता चला कि बिलासपुर जिले में 431 लोगों की मौत सर्पदंश से बताकर मुआवजे के रूप में करीब 17 करोड़ 24 लाख रुपए जारी कर दिए गए। जबकि कई मामलों में सर्पदंश की पुष्टि ही नहीं हुई थी।
मामला तब सामने आया जब विधानसभा में इस फर्जीवाड़े का मुद्दा उठा। इसके बाद सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे।
‘एडवोकेट डायमंड गैंग ने बनाया था नेटवर्क
पुलिस जांच में एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ, जिसे एडवोकेट डायमंड गैंग नाम दिया गया है। आरोप है कि यह गिरोह अस्पतालों, पुलिस और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मदद से फर्जी सर्पदंश केस तैयार करता था।
गिरोह के सदस्य अस्पतालों में होने वाली सामान्य मौतों को सर्पदंश से जोड़कर दस्तावेज तैयार करवाते थे। इसके बाद मुआवजे की राशि निकालने की प्रक्रिया पूरी की जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में डेढ़ लाख रुपये तक लेकर पूरा फर्जी केस तैयार किया जाता था।
डॉक्टर, पुलिस और राजस्व कर्मचारियों पर भी आरोप
इस मामले में जांच का दायरा बढ़ने के बाद कई विभागों के कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है। आरोपियों में डॉक्टर, पुलिसकर्मी और तहसील स्तर के कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाण पत्र कैसे बनाए गए, किन अधिकारियों की मदद मिली और मुआवजे की रकम किस-किस तक पहुंची।
अब तक 17 आरोपी गिरफ्तार
मामले में पुलिस अब तक 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें अलग-अलग विभागों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल फर्जी दस्तावेज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ा आर्थिक नेटवर्क काम कर रहा था।
EOW जांच से खुल सकते हैं बड़े राज
अब EOW को जांच सौंपे जाने की तैयारी के बाद मामले में आर्थिक लेन-देन, बैंक खातों और संपत्तियों की जांच भी हो सकती है।
जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि सरकारी राशि का कितना दुरुपयोग हुआ, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और फर्जीवाड़े से जुड़े तार कहां तक फैले हैं।
बिलासपुर का यह मामला अब सिर्फ मुआवजा घोटाला नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं में सेंध लगाने वाले बड़े नेटवर्क की जांच बन गया है।
FAQ
- बिलासपुर सर्पदंश मुआवजा घोटाला क्या है?
बिलासपुर में फर्जी सर्पदंश मामलों के जरिए सरकारी मुआवजे की राशि लेने का मामला सामने आया है। इसमें करीब 17 करोड़ 24 लाख रुपए के फर्जी भुगतान की जांच चल रही है। - सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच कौन करेगा?
इस मामले की जांच अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को सौंपने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य पूरे आर्थिक नेटवर्क का पता लगाना है। - एडवोकेट डायमंड गैंग क्या है?
एडवोकेट डायमंड गैंग उस गिरोह को कहा जा रहा है, जिस पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर सर्पदंश मुआवजे के मामलों में हेराफेरी करने का आरोप है। इस मामले में अब तक 17 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
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