सौरभ को जान का खतरा? दिल्ली में पूछताछ पर बचाव पक्ष भी सहमत, ओमान से प्रत्यर्पण के बाद सौरभ पर कानूनी पेच
सीबीआई ने 10 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 8 दिन की अनुमति दी। अब सौरभ से दिल्ली में पूछताछ होगी। खास बात यह है कि पूछताछ की जगह को लेकर सीबीआई और बचाव पक्ष दोनों की सहमति थी।
प्रत्यर्पण की शर्तों पर बचाव पक्ष का सवाल
सौरभ के वकील ने सुनवाई के बाद बताया कि बचाव पक्ष की मुख्य दलील अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों पर आधारित है। उनका कहना है कि किसी आरोपी को जिस विशेष मामले के तहत दूसरे देश से प्रत्यर्पित किया जाता है, उस पर उसी मामले के दायरे में मुकदमा चलाया जाना चाहिए। वकील के मुताबिक सौरभ का प्रत्यर्पण मुख्य रूप से धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हुआ है। ऐसे में दूसरे मामले में कार्रवाई को लेकर कानूनी सवाल उठते हैं। हालांकि बचाव पक्ष ने इस आपत्ति को फिलहाल ज्यादा आगे नहीं बढ़ाया है।
जांच में सहयोग नहीं करने का संदेश नहीं देना चाहते
वकील के मुताबिक बचाव पक्ष चाहता है कि सौरभ कानून के दायरे में रहकर जांच में पूरा सहयोग करें। प्रत्यर्पण की शर्तों को लेकर तत्काल आक्रामक कानूनी रुख अपनाने से यह संदेश जा सकता था कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं करना चाहता। इसलिए फिलहाल पूछताछ और जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ने देने का फैसला किया गया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि प्रत्यर्पण से जुड़े कानूनी सवाल खत्म हो गए हैं। जरूरत पड़ने पर इन मुद्दों को अदालत में उठाया जा सकता है।
दिल्ली में पूछताछ पर दोनों पक्ष राजी
सुनवाई के दौरान एक अहम बात यह भी सामने आई कि सीबीआई और बचाव पक्ष दोनों चाहते थे कि सौरभ से पूछताछ दिल्ली में ही हो। इसी आधार पर अब सीबीआई उसे दिल्ली ले जाकर पूछताछ करेगी। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ में महादेव ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के संचालन, आर्थिक लेन-देन और दूसरे सहयोगियों की भूमिका से जुड़े सवालों के जवाब मिल सकते हैं। करीब 6 हजार करोड़ रुपए के कथित सट्टा घोटाले में सौरभ को प्रमुख आरोपियों में शामिल बताया गया है।
दूसरी एजेंसी का वारंट, कोर्ट का फैसला बाकी
सुनवाई के दौरान एक दूसरी जांच एजेंसी की ओर से भी वारंट निष्पादित कराने के लिए आवेदन दिया गया था। हालांकि अदालत ने इस आवेदन पर अभी कोई आदेश जारी नहीं किया है। यानी फिलहाल सौरभ सीबीआई की कस्टडी में रहेगा। दूसरी एजेंसी को पूछताछ या आगे की कार्रवाई के लिए अदालत के आदेश का इंतजार करना होगा। इस घटनाक्रम से साफ है कि सौरभ से पूछताछ में अब एक से ज्यादा जांच एजेंसियों की दिलचस्पी है।
सुरक्षा को लेकर वकील ने क्या कहा?
सौरभ की सुरक्षा को लेकर भी वकील ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने जान का खतरा होने जैसी किसी आशंका से इनकार किया। उनके मुताबिक कस्टडी के दौरान वकील से मुलाकात, आमने-सामने बातचीत और दूसरी जरूरी सुविधाएं सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और कानूनी मानकों के अनुसार तय की गई हैं। अब 12 नवंबर तक होने वाली पूछताछ पर सबकी नजर है। देखना होगा कि सौरभ के बयान से महादेव सट्टा नेटवर्क के दूसरे आरोपियों और कथित आर्थिक लेन-देन को लेकर कितनी नई जानकारी सामने आती है।
यह खबर क्यों जरूरी है
महादेव सट्टा ऐप का मामला छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टे के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण और उस पर उठे कानूनी सवाल दिखाते हैं कि विदेश से आरोपियों को लाने की प्रक्रिया कितनी जटिल होती है। इस मामले में करीब 6 हजार करोड़ रुपए के कथित घोटाले का आरोप है। जांच एजेंसियों की पूछताछ से तय होगा कि नेटवर्क के दूसरे चेहरे कौन हैं। कानून के दायरे में रहकर जांच पूरी होना जरूरी है, ताकि दोष साबित होने तक हर आरोप सिर्फ आरोप रहे।
FAQs
सवाल 1: सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण किस कानून के तहत हुआ है?
जवाब: बचाव पक्ष के वकील के मुताबिक सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण मुख्य रूप से धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हुआ है। ओमान से प्रत्यर्पण के लिए रायपुर की PMLA अदालत ने आदेश जारी किया था। इसी आधार पर बचाव पक्ष ने प्रत्यर्पण की शर्तों पर कानूनी सवाल उठाए हैं।
सवाल 2: महादेव सट्टा ऐप मामले में कितने रुपए के घोटाले का आरोप है?
जवाब: महादेव सट्टा ऐप मामले में करीब 6 हजार करोड़ रुपए के कथित घोटाले का आरोप है। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को इस नेटवर्क के प्रमुख संचालक बताया गया है। जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के आर्थिक लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं।
सवाल 3: आगे की पूछताछ से क्या सामने आ सकता है?
जवाब: जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ में सट्टा नेटवर्क के संचालन और आर्थिक लेन-देन पर जवाब मिल सकते हैं। सौरभ के बयान से दूसरे आरोपियों की भूमिका पर भी नई जानकारी सामने आ सकती है।