सौरभ चंद्राकर की वापसी पर सियासी दंगल, कांग्रेस ने कहा हमने कराई 72 FIR, बीजेपी बोली पंच साल फला फूला क्यों सट्टा

Arun Tiwari | Nov 04, 2026, 16:40 IST
सौरभ चंद्राकर की वापसी पर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान, कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
Saurabh Chandrakar’s return to India sparks a fresh political face-off between the BJP and Congress in Chhattisgarh over the Mahadev betting app case.
महादेव ऑनलाइन सट्टा एप के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर घमासान मच गया है। सौरभ की वापसी को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। कांग्रेस जहां इसका श्रेय पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार की कार्रवाई को दे रही है।

वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस के शासनकाल में 72 एफआईआर दर्ज होने के बावजूद सट्टे का सिंडिकेट फलता-फूलता रहा। भाजपा ने इसे कागजी कार्रवाई बताते हुए कांग्रेस से पूछा है कि आखिर सट्टे के असली सरगना को किसका संरक्षण हासिल था?



भूपेश सरकार में दर्ज हुईं 72 एफआईआर

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की कार्रवाई बहुत देर से हुई है। इसे केंद्र सरकार की कोई बड़ी उपलब्धि बताना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सौरभ को भारत लाने का रास्ता कांग्रेस की भूपेश सरकार के दौरान की गई ठोस कार्रवाई से तैयार हुआ था। महादेव सट्टा एप के खिलाफ पहली एफआईआर से लेकर कुल 72 एफआईआर दर्ज की गईं। 500 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं और जब्तियां भी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थीं। रायपुर पुलिस की अर्जी पर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कराया गया था। कांग्रेस सरकार के अनुरोध पर ही महादेव एप को गूगल प्ले स्टोर से हटाया गया और ऑनलाइन गेमिंग सट्टे के खिलाफ सख्त कानून भी बनाया गया।



बैज ने सवाल उठाया कि सौरभ चंद्राकर को तो भारत लाया गया, लेकिन रवि उप्पल और शुभम सोनी को कब लाया जाएगा? उन्होंने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले महादेव एप को लेकर भाजपा ने खूब प्रचार किया था, लेकिन डबल इंजन की सरकार बनने के तीन साल बाद भी सट्टे का यह कारोबार पूरी तरह बंद क्यों नहीं हुआ? आज भी सोशल मीडिया पर महादेव एप के विज्ञापन दिखाई दे रहे हैं। उनके मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में महादेव सिंडिकेट से जुड़े कई ऑनलाइन सट्टा पैनल सक्रिय रहे हैं।




पीएमओ से प्रसार भारती तक के अधिकारियों पर लगाए आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष ने महादेव एप मामले में दिसंबर 2025 में सामने आए खुलासों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी हीरेन जोशी, 23वें वित्त आयोग के सदस्य हितेश जैन और प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत सहगल की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि इन लोगों ने किसके कहने पर महादेव सट्टा एप को संरक्षण दिया? उन्होंने भाजपा आर्थिक सेल के पूर्व संयोजक विकास गर्ग की भूमिका की जांच की मांग भी की। बैज का आरोप है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद संबंधित लोगों पर कार्रवाई नहीं होना सत्ता के संरक्षण की ओर इशारा करता है।




इस तरह चल रहा है सट्टे का कारोबार

बैज ने रेड्डी अन्ना, रेड्डी क्लब, एफबीबीईटी77, सीबीएफटीई ऑनलाइन बुक, बेटभाई बुक, फेयरप्ले, सुपरविन, विनबज, जन्नत बुक, महाकाल बुक, राजवीर ऑनलाइन बुक, लोटस 365, लेजर बुक, कोहनूर बुक, अलीबाबा बुक, खेलोयार, एसडी बुक, लॉयन बुक, स्काईएक्सचेंज और डायमंडएक्स डॉट कॉम जैसे प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए कहा कि नए-नए सट्टा पैनल खुलेआम चल रहे हैं।




भाजपा का पलटवार- एफआईआर दर्ज कराकर किसे बचा रही थी कांग्रेस?

कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता अब विक्टिम कार्ड खेलकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। जिस कारोबार को भूपेश बघेल सरकार के समय फलने-फूलने का मौका मिला, आज जब कानून का शिकंजा कस रहा है तो कांग्रेस को अपनी पुरानी उपलब्धियां याद आने लगी हैं।



मिश्रा ने कहा कि भूपेश बघेल सरकार 72 एफआईआर दर्ज करने का दावा कर रही है, लेकिन सवाल यह है कि यदि इतनी कार्रवाई हो रही थी तो सट्टे का सिंडिकेट लगातार बढ़ता कैसे गया? एफआईआर दर्ज करना और सट्टे के कारोबार को जड़ से खत्म करना दो अलग-अलग बातें हैं। कांग्रेस को बताना चाहिए कि दुबई से रायपुर तक फैले इस नेटवर्क को किसका संरक्षण प्राप्त था और सट्टे का असली मालिक कौन है?



भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संधियों और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर सौरभ चंद्राकर को भारत लाना केंद्र की मोदी सरकार और वर्तमान राज्य सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति का परिणाम है। जिस आरोपी पर कांग्रेस सरकार पांच साल में हाथ नहीं डाल सकी, उसे आज कानून के कठघरे में खड़ा किया जा रहा है। सीबीआई और ईडी जैसी जांच एजेंसियां साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। मुख्य आरोपी की रिमांड के दौरान पूछताछ से सत्ता के गलियारों में बैठे कई चेहरे बेनकाब होने की उम्मीद है।




2023 के चुनाव और शुभम सोनी के वीडियो पर भी सियासत

दीपक बैज ने 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान महादेव एप मामले को लेकर भाजपा और जांच एजेंसियों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले शुभम सोनी का वह वीडियो जारी हुआ था, जिसमें उसने खुद को मालिक और सौरभ चंद्राकर तथा रवि उप्पल को नौकर बताया था। बैज का दावा है कि यह वीडियो किसी सामान्य स्थान से नहीं, बल्कि सीधे भाजपा कार्यालय से जारी हुआ था। उन्होंने एक काली इनोवा गाड़ी से पैसे बरामद होने के दावे का जिक्र करते हुए कहा कि गाड़ी भाजपा नेता के नाम पर पंजीकृत थी। इस मामले में जांच एजेंसियां खामोश क्यों हैं?



वहीं, भाजपा का कहना है कि जांच की आंच जैसे-जैसे ऊपर बैठे पावर सेंटर्स तक पहुंचेगी, कांग्रेस नेताओं की बेचैनी और बढ़ेगी। डॉ. मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता नहीं भूली है कि किस तरह प्रदेश को सट्टेबाजों का सेफ हेवन बनाया गया था। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी सुपर बॉस को बख्शा नहीं जाएगा।

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