छत्तीसगढ़ DMF केस : कमीशनखोरी के आरोपी सतपाल छाबड़ा को मिली जमानत

Umeshwari Baghel | Jul 15, 2026, 22:44 IST
सतपाल सिंह छाबड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
DMF घोटाला मामले में आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। कोर्ट ने अनिल टुटेजा की जमानत को आधार मानते हुए राहत दी। आरोप है कि DMF खरीदी में कमीशन नेटवर्क के जरिए करोड़ों के लेनदेन हुए।

समझें क्या है पूरा मामला

CG DMF SCAM :छत्तीसगढ़ के चर्चित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) घोटाला मामले में आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उन्हें सशर्त नियमित जमानत देने का आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला मामले की लंबी सुनवाई और ट्रायल में लगने वाले संभावित समय को देखते हुए दिया है।



सतपाल सिंह छाबड़ा की जमानत याचिका पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। सुनवाई के दौरान छाबड़ा की ओर से दलील दी गई कि इस मामले के मुख्य आरोपी रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को पहले ही सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है। इसी आधार पर छाबड़ा को भी राहत देने की मांग की गई।



टुटेजा की जमानत को बनाया गया आधार

सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि DMF घोटाले से जुड़े मामले में अनिल टुटेजा को 18 मई 2026 को नियमित जमानत दी जा चुकी है। इसके अलावा कुछ अन्य आरोपियों को भी अदालत से राहत मिल चुकी है। छाबड़ा के वकीलों ने इसी समानता के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी बात रखी।



अदालत ने कहा कि मामले का ट्रायल अभी पूरा नहीं हुआ है। जांच और न्यायिक प्रक्रिया में समय लग सकता है। ऐसे में किसी आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं है। इसी विचार के आधार पर सतपाल सिंह छाबड़ा को जमानत देने का फैसला किया गया।



DMF घोटाले में क्या है आरोप

DMF घोटाले की जांच छत्तीसगढ़ में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) कर रही है। इस मामले में 16 जनवरी 2024 को एफआईआर दर्ज की गई थी।



जांच एजेंसियों के अनुसार यह मामला DMF के तहत होने वाली खरीदी और अनुबंध प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि कृषि सामग्री सहित अन्य खरीदी कार्यों में कमीशन का नेटवर्क चलाया गया था।



अभियोजन पक्ष के अनुसार सतपाल सिंह छाबड़ा वर्ष 2019 से DMF से जुड़ी कृषि खरीद प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका में थे। आरोप है कि जिन वेंडरों को काम के आदेश चाहिए थे उनसे बड़ी राशि कमीशन के रूप में ली जाती थी।



जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि वर्क ऑर्डर दिलाने के लिए 30 से 35 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। इसमें से कुछ हिस्सा छाबड़ा के पास रहने और बाकी राशि कथित सिंडिकेट तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।



जांच में करीब 5 करोड़ रुपये के लेनदेन का भी दावा किया गया है। एजेंसियों का आरोप है कि यह राशि परिवार के सदस्यों और संबंधित फर्मों के बैंक खातों के जरिए भेजी गई थी।



ACB और EOW की कार्रवाई के बाद बढ़ी थी मुश्किलें

DMF घोटाला सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ में जांच एजेंसियों ने कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस मामले में अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।



आरोप है कि DMF की राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के बजाय गलत तरीके से किया गया। हालांकि सभी आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में ट्रायल के बाद ही होगा।



जमानत के साथ कोर्ट ने रखी कई शर्तें

सुप्रीम कोर्ट ने सतपाल सिंह छाबड़ा को जमानत देते हुए कई शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। उन्हें निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत बांड जमा करना होगा।



इसके अलावा उन्हें वही शर्तें माननी होंगी जो इस मामले में पहले रिहा हुए अन्य आरोपियों पर लागू हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि जमानत मिलने के बाद भी आरोपी को जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करना होगा।



सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद DMF घोटाले से जुड़े मामले में आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। अब आगे की कार्रवाई निचली अदालत में चलने वाले ट्रायल पर निर्भर करेगी।



DMF घोटाला मामला : महत्वपूर्ण तथ्य

मामला: छत्तीसगढ़ का डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) घोटाला


आरोपी: सतपाल सिंह छाबड़ा


राहत: सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त नियमित जमानत दी


एफआईआर दर्ज: 16 जनवरी 2024


जांच एजेंसी: एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW)


मामले का आधार: DMF से जुड़े अनुबंधों और खरीदी प्रक्रिया में कथित अनियमितता


मुख्य आरोपी: रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा


टुटेजा को जमानत: सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई 2026 को नियमित जमानत दी थी


छाबड़ा की जमानत का आधार: सह-आरोपी को मिली राहत और लंबे समय तक चलने वाली ट्रायल प्रक्रिया


आरोप: वेंडरों से 30 से 35 प्रतिशत तक कमीशन लेने का दावा


कथित लेनदेन: जांच एजेंसियों के अनुसार करीब 5 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच


सुप्रीम कोर्ट पीठ: CJI की अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे


जमानत शर्त: निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत बांड जमा करना होगा और अन्य सह-आरोपियों जैसी शर्तों का पालन करना होगा।



FAQ

  1. सतपाल सिंह छाबड़ा को किस मामले में जमानत मिली है?
    सतपाल सिंह छाबड़ा को छत्तीसगढ़ के चर्चित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से सशर्त नियमित जमानत मिली है।
  2. सतपाल सिंह छाबड़ा की जमानत का आधार क्या बना?
    छाबड़ा की जमानत याचिका में मुख्य आरोपी अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से मिली नियमित जमानत और अन्य सह-आरोपियों को मिली राहत को आधार बनाया गया।
  3. DMF घोटाले में सतपाल सिंह छाबड़ा पर क्या आरोप हैं?
    जांच एजेंसियों का आरोप है कि DMF से जुड़ी खरीदी प्रक्रिया में कमीशन नेटवर्क के जरिए कथित अनियमितताएं हुईं और करीब 5 करोड़ रुपये के लेनदेन की जांच की गई।

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