छत्तीसगढ़ शिक्षा में नई व्यवस्था : अब छात्रों के प्रदर्शन से तय होगी शिक्षकों की रेटिंग
समझें क्या है पूरा मामला
- सरकारी स्कूलों में अब केवल छात्रों की उपस्थिति नहीं देखी जाएगी।
- शिक्षकों के कामकाज का आकलन उनके छात्रों के प्रदर्शन से होगा।
- कक्षा के बच्चों की ग्रीन, येलो और रेड कैटेगरी में मैपिंग होगी।
- टीचर्स डायरी में बच्चों की हर महीने की प्रगति दर्ज की जाएगी।
- पूरे सिस्टम की मॉनिटरिंग के लिए एआई का उपयोग होगा।
शिक्षकों का होगा रिपोर्ट कार्ड
छत्तीसगढ़ में अब शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने की तैयारी है। स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षकों के कामकाज का नया पैमाना लेकर आया है। अब शिक्षकों की रेटिंग उनके पढ़ाने के तरीके से तय होगी। इसके लिए हर कक्षा के बच्चों का रिकॉर्ड टीचर्स डायरी में होगा।
तीन जोन में बंटेगा प्रदर्शन
शिक्षकों को हर महीने बच्चों का रिकॉर्ड तैयार करना होगा। प्रदर्शन के आधार पर बच्चों को तीन जोन में बांटा जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चे ग्रीन जोन में होंगे। औसत प्रदर्शन वाले बच्चे येलो जोन में रखे जाएंगे। जो बच्चे कमजोर हैं, उन्हें रेड जोन में रखा जाएगा।
रेड जोन पर खास फोकस
विभाग का मुख्य जोर रेड जोन के बच्चों पर होगा। हर महीने शिक्षक यह देखेंगे कि कितने बच्चे रेड से येलो में आए। येलो से ग्रीन जोन में पहुंचने वाले बच्चों का भी हिसाब होगा। इसी प्रगति के आधार पर शिक्षक की रेटिंग तय की जाएगी। समग्र शिक्षा विभाग को इस पूरी योजना की जिम्मेदारी दी गई है।
एआई से आसान होगी मॉनिटरिंग
भविष्य में इस काम को और अधिक आसान बनाने की तैयारी है। स्कूलों का डेटा तैयार करने के लिए एआई तकनीक का उपयोग होगा। इससे अधिकारियों के लिए मॉनिटरिंग करना और भी सरल हो जाएगा। टेक्नोलॉजी के जरिए हर स्कूल की सटीक रिपोर्ट सामने आएगी।
भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा परिणाम
प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। स्कूलों में लगभग 5000 शिक्षकों के पदों पर भर्ती होगी। इसमें सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता के पद शामिल हैं।
व्याख्याता के 854 पदों के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इस साल बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम में भी सुधार हुआ है। परीक्षा परिणामों में करीब 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
बहुभाषी शिक्षा पर जोर
छत्तीसगढ़ शिक्षामें स्थानीय भाषाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पहली से तीसरी कक्षा तक स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई होगी। इसमें छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी भाषा शामिल हैं। इन भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों के निर्माण की प्रक्रिया जारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP – National Education Policy) के तहत यह हो रहा है।
FAQ
- सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का मूल्यांकन अब कैसे किया जाएगा?
उत्तर: अब शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके और उनके छात्रों के प्रदर्शन (ग्रीन, येलो और रेड जोन मैपिंग) के आधार पर शिक्षकों का रिपोर्ट कार्ड और रेटिंग तय होगी। - बच्चों की 'रेड, येलो और ग्रीन जोन' मैपिंग क्या है?
उत्तर: छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। कमजोर बच्चों को रेड जोन, औसत को येलो जोन और बेहतर प्रदर्शन करने वालों को ग्रीन जोन में रखा जाएगा। - त्तीसगढ़ के स्कूलों में किन स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई होगी?
उत्तर: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत पहली से तीसरी कक्षा तक छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई करवाई जाएगी।
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