छत्तीसगढ़ में 300 से ज्यादा शिक्षक-कर्मचारी जांच के घेरे में, DPI ने 24 जिलों से 15 दिन में मांगे आरोप पत्र
DPI ने 24 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को संबंधित मामलों में आरोप पत्र तैयार करने और जरूरी दस्तावेज 15 दिनों के भीतर भेजने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, आरोप पत्र की तैयारी का मतलब यह नहीं है कि सभी कर्मचारी दोषी साबित हो गए हैं। ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगने के पीछे वास्तविक अनुपस्थिति के साथ तकनीकी परेशानी और अवकाश से जुड़े मामले भी हैं।
रायगढ़ में सबसे ज्यादा मामले
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, रायगढ़ में 48 मामले सामने आए हैं। कांकेर में 41 और बिलासपुर में 33 प्रकरण दर्ज हैं। सूरजपुर और कोरिया में 17-17, बलौदाबाजार में 16, रायपुर और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 15-15 मामले बताए गए हैं।
इसके अलावा राजनांदगांव में 13, महासमुंद में 12 तथा बालोद और बस्तर में 11-11 मामले हैं। बीजापुर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और सुकमा में 10-10 प्रकरणों का उल्लेख है। ये आंकड़े विभागीय रिपोर्ट से जुड़े बताए गए हैं। इनका मतलब यह नहीं है कि सभी संबंधित कर्मचारी बिना अनुमति स्कूल से गायब मिले हैं। अंतिम स्थिति जांच और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही साफ होगी।
177 शिक्षक, 99 कर्मचारी
रिपोर्ट में 177 शिक्षक, 99 गैर-शैक्षणिक कर्मचारी और 44 प्रधान पाठकों के मामले बताए गए हैं। इन तीन श्रेणियों का कुल आंकड़ा 320 है। यानी मामला सिर्फ कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों तक सीमित नहीं है। स्कूलों और शिक्षा विभाग में दूसरे पदों पर काम करने वाले कर्मचारी भी इसकी जद में हैं। हालांकि, इन श्रेणीवार आंकड़ों की मूल विभागीय सूची से स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
DPI ने जिला शिक्षा अधिकारियों से आरोपों का विवरण, संबंधित अभिलेखों की सूची और साक्ष्य तैयार करने को कहा है। इसके बाद ही संबंधित कर्मचारियों के मामलों में विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
182 मामले छुट्टी के
रिपोर्ट के अनुसार, 182 मामले स्कूल से अनुपस्थिति, अनधिकृत छुट्टी और अवकाश से जुड़े हैं। इनमें लंबे समय से स्कूल नहीं आने, मेडिकल लीव और असाधारण अवकाश जैसे प्रकरण शामिल बताए गए हैं। इन मामलों में यह देखना जरूरी होगा कि कर्मचारी बिना अनुमति गैरहाजिर था या उसकी छुट्टी से जुड़े दस्तावेज लंबित थे।
अगर कर्मचारी बिना मंजूरी लंबे समय तक अनुपस्थित रहा है, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है। लेकिन यदि अवकाश स्वीकृत था या संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं, तो उस मामले को अलग तरीके से देखना होगा। जांच से पहले सभी को एक ही श्रेणी में रखना सही नहीं होगा।
मोबाइल ने भी अटकाई हाजिरी
ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं होने के पीछे तकनीकी समस्याओं का भी जिक्र है। रिपोर्ट में 90 मामले मोबाइल फोन या तकनीकी दिक्कतों से जुड़े बताए गए हैं। कुछ कर्मचारियों के पास स्मार्टफोन नहीं होने और कीपैड फोन इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। कुछ ने आईफोन में VSK ऐप इंस्टॉल नहीं होने की समस्या बताई है।
इसके अलावा पुराने एंड्रॉयड वर्जन, मोबाइल खराब होने और फोन गुम होने जैसी परेशानियां भी बताई गई हैं। ऐसे मामलों में सवाल यह है कि क्या विभाग ने कर्मचारियों को जरूरी तकनीकी सुविधा दी थी? अगर ऐप ही काम नहीं कर रहा था, तो उसकी जिम्मेदारी कर्मचारी पर डालने से पहले तकनीकी रिकॉर्ड भी देखना होगा।
19 मामलों में पंजीयन नहीं
रिपोर्ट में 19 ऐसे मामले भी बताए गए हैं, जिनमें कर्मचारियों पर निर्देश के बावजूद VSK ऐप पर पंजीयन नहीं कराने या ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करने में लापरवाही का आरोप है। विभाग की व्यवस्था के मुताबिक, कर्मचारियों को तय प्रक्रिया से डिजिटल उपस्थिति दर्ज करनी है। लेकिन पंजीयन नहीं कराने की वजह भी जांचनी होगी। निर्देश की जानकारी नहीं मिली, तकनीकी परेशानी आई या जानबूझकर नियम नहीं माना गया, यह स्पष्टीकरण के बाद ही तय होगा।
पहले भी नोटिस की सख्ती
स्कूल शिक्षा विभाग VSK ऐप के जरिए डिजिटल हाजिरी दर्ज कर रहा है। इसका मकसद स्कूलों में कर्मचारियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड रखना और निगरानी बढ़ाना है। 8 अक्टूबर को जारी निर्देशों से जुड़ी प्रकाशित रिपोर्टों में भी ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगाने वाले कर्मचारियों से कारण पूछे जाने की जानकारी सामने आई थी। रायगढ़ में 5 अक्टूबर की ऑनलाइन उपस्थिति रिपोर्ट के आधार पर 1,034 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस देने संबंधी निर्देश की खबर भी सामने आई थी।
अब 24 जिलों से 15 दिनों के भीतर आरोप पत्र और जरूरी दस्तावेज मांगे जाने की जानकारी है। हालांकि, इस विशेष निर्देश वाले मूल पत्र की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कार्रवाई से पहले जांच जरूरी
अब जिला शिक्षा अधिकारियों को रिकॉर्ड जुटाकर संबंधित मामलों की रिपोर्ट भेजनी है। जहां बिना अनुमति अनुपस्थिति या जानबूझकर निर्देशों की अवहेलना साबित होगी, वहां सेवा नियमों के मुताबिक कार्रवाई हो सकती है। वहीं, तकनीकी दिक्कत या स्वीकृत अवकाश वाले मामलों में दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी।
सरकार की डिजिटल हाजिरी व्यवस्था का मकसद उपस्थिति पर नजर रखना है, लेकिन तकनीकी समस्या और वास्तविक गैरहाजिरी में फर्क करना भी जरूरी है। अब देखना होगा कि 15 दिन में जिलों से कितनी फाइलें पहुंचती हैं और जांच के बाद कितने कर्मचारियों पर कार्रवाई की नौबत आती है।