छत्तीसगढ़ में शिक्षक संकट, 27 एप्स में उलझे टीचर, कक्षा का समय हो रहा कम
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के 30 हजार से ज्यादा पद खाली हैं। मौजूदा शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा 27 एप्स पर काम करना पड़ता है। मिड-डे मील, चुनाव और सर्वे जैसे काम भी शिक्षकों के जिम्मे हैं। एक ही छात्र की जानकारी कई पोर्टल पर अलग-अलग भरनी पड़ती है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
खाली पदों का बड़ा संकट
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी पुरानी समस्या है। 30 हजार से ज्यादा पद अभी भी खाली पड़े हैं। यह आंकड़ा विधानसभा में सरकार ने खुद पेश किया था। इस कमी के बावजूद मौजूदा शिक्षकों पर काम का दबाव कम नहीं हुआ है। बल्कि गैर शैक्षणिक जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। इससे कक्षाओं में पढ़ाई का समय घटता जा रहा है।
27 एप्स में उलझे शिक्षक
शिक्षकों को रोजमर्रा के काम के लिए 27 अलग-अलग एप्स और पोर्टल पर जानकारी दर्ज करनी पड़ती है। इनमें दीक्षा एप, निष्ठा एप, उल्लास एप और सीजी एमडीएम एप जैसे कई प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
इसके अलावा वोटर हेल्पलाइन एप, बीएलओ (BLO – Booth Level Officer) एप और आयुष्मान एप पर भी शिक्षकों को काम करना पड़ता है। चुनाव और जनगणना जैसे कार्यों में भी इनकी ड्यूटी लगती है। समग्र शिक्षा पोर्टल, शाला कोष और सीजीस्कूल.इन जैसे पोर्टल पर भी नियमित डेटा अपडेट करना होता है। इतने सारे प्लेटफॉर्म पर एक साथ काम करना शिक्षकों के लिए चुनौती बन गया है।
एक जानकारी, कई बार एंट्री
शिक्षकों को विद्यार्थियों का नाम, जन्मतिथि और मोबाइल नंबर जैसी जानकारी बार-बार दर्ज करनी पड़ती है। सीजी स्कूल इन, यू-डाइस (U-DISE – Unified District Information System for Education) जैसे पोर्टल पर एक ही डेटा अलग-अलग अपलोड करना पड़ता है। इससे शिक्षकों का काफी समय बर्बाद होता है। कई बार एक ही छात्र की सूचना तीन से चार जगह भरनी होती है। इस दोहराव से शिक्षकों में थकान और तनाव भी बढ़ता है।
पढ़ाई पर पड़ता है असर
शिक्षक संगठनों का कहना है कि डेटा एंट्री के दबाव से सीधा असर कक्षा की पढ़ाई पर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि वेतन रोकने जैसी कार्रवाई के डर से शिक्षकों को डिजिटल काम में लगातार उलझाया जाता है। इस वजह से शिक्षक चाहकर भी पूरा समय बच्चों को पढ़ाने में नहीं दे पाते। शिक्षा विभाग की मंशा गुणवत्ता सुधारने की है, लेकिन व्यवस्था इसके उलट काम कर रही है।
समाधान के तौर पर सुझाव
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का हल इंटीग्रेटेड स्कूल मैनेजमेंट सिस्टम (ISMS – Integrated School Management System) में है। इस सिस्टम में अटेंडेंस, किताब और साइकिल वितरण जैसे सभी काम एक ही जगह हो सकते हैं।
तमिलनाडु और हरियाणा जैसे राज्यों में यह मॉडल पहले से अपनाया जा चुका है। वहां इसे सफल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कामों से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। मौजूदा स्थिति में शिक्षकों का करीब एक तिहाई समय गैर शैक्षणिक कामों में चला जाता है। यदि व्यवस्था सरल हो जाए तो यह समय फिर से पढ़ाई के लिए उपलब्ध हो सकता है।
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