CM के दरबार में क्यों लाचार है पार्टी संगठन, IAS का एक ऐसा बैच जिसका है जलवा और क्यों घबराए हुए हैं मंत्री
छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार है लेकिन सीएम की सरलता का फायदा अफसर उठा रहे हैं। साहब लोग कहते हैं कि यह उनकी सरकार है। उनके सामने संगठन भी लाचार नजर आता है। साहब के सामने संघ और संगठन की न चलने जैसी बातें होने लगी हैं। वहीं एक आईएएस का बैच ऐसा है जिसका नौकरशाही में जलवा चल रहा है।
खबर एक और है कि मंत्रिमंडल विस्तार से कुछ मंत्री घबराए हुए हैं। आखिर मंत्रियों का ब्लडप्रेशर क्यों बढ़ा हुआ है। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों की ऐसी ही अनसुनी खबरों के लिए पढ़िए द सूत्र का साप्ताहिक कॉलम सिंहासन छत्तीसी।
सीएम का दरबार - संगठन लाचार
सीएम की सरलता का फायदा उनके सिपहसालार खूब उठा रहे हैं। सिपहसालार से मतलब है उनसे जुड़े आईएएस,आईपीएस अफसर। ये साहब अपने आपको ही सरकार समझने लगे हैं। इनकी नजर में संघ हो या बीजेपी संगठन, इनकी कोई वैल्यु यानी पूछ परख नहीं है। साहब ने बाकायदा जिला कलेक्टरों और सचिवों को ताक़ीद करना शुरू कर दिया कि संघ और संगठन के किसी भी सुझाव या निर्देश पर कान देने की जरूरत नहीं है।
केवल मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों का पालन किया जाए। बीजेपी सरकार में संघ की बातों पर ध्यान न देने की नसीहत बहुत अजीब सी लगती है। अफसरों ने इस नई केमिस्ट्री का फॉर्मूला समझने के लिए उनसे मुलाकातें शुरू की हैं तो आजकल साहब बड़े रौब से यह कहते पाए जा रहे हैं कि वह संघ और संगठन कुछ नहीं समझते हैं।
सिर्फ इतना ही नहीं, साहब ये बताना भी नहीं भूलते कि वो सिर्फ नंबर वन और नंबर टू (पीएम मोदी और एचएम अमित शाह) को रिपोर्ट करते हैं और उन्हीं के निर्देशों का पालन करते हैं। अब देखते हैं कि संघ और संगठन के पास इनका इलाज है या नहीं।
सरगुजा के मंत्री की कुर्सी पर खतरा
सीएम विष्णुदेव साय ने अपना मंत्रिमंडल फुल कर लिया है। जाति साधी तो क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ गया। राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा सवाल सीएम के इस समीकरण पर उठ खड़ा हुआ है। क्या यह चुनाव तक का या चुनाव जिताने वाला मंत्रिमंडल है। सूत्र बताते हैं कि इस मंत्रिमंडल विस्तार में खास रणनीति अपनाई गई है। यही रणनीति मंत्रियों को टेंशन में डाल रही है।
अंबिकापुर से राजेश अग्रवाल को मंत्रिमंडल में शामिल करने से सरगुजा के मंत्रियों का ब्लडप्रेशर बढ़ गया है। सरगुजा से इस समय रामविचार नेताम, श्यामबिहारी जायसवाल, लक्ष्मी राजवाड़े और अब राजेश अग्रवाल मंत्री हैं।
जाहिर है, बस्तर और सरगुजा में ऐसा असंतुलन है कि लगभग सभी मानकर चल रहे हैं कि आगे चलकर सरगुजा से दो-एक मंत्रियों का विकेट गिरेगा। सरगुजा से बीजेपी को अगर 14 में 14 सीटें मिलीं तो बस्तर की 12 में से आठ सीटें आईं।
सरगुजा को अगर 14 में पांच का प्रतिनिधित्व मिल रहा तो बस्तर को आठ में ढाई का तो मिलना ही चाहिए। ऐसे में, विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रिमंडल के पुनर्गठन में निश्चित तौर पर बस्तर को एक मंत्री मिलेगा ही। यही कारण है कि सरगुजा के मंत्री घबराए हुए घूम रहे हैं।
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