स्मृति ईरानी का संगठन के नेताओं को सख्त संदेश, न होर्डिंग न हार, स्वागत-सत्कार छोड़िए, बूथ संभालिए
एयरपोर्ट पर न ढोल-नगाड़े बजे, न फूल-मालाओं से स्वागत हुआ और न ही नेताओं की भीड़ के बीच शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। पार्टी कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में भी उन्होंने स्वागत के पारंपरिक तामझाम से दूरी बनाए रखी।
संगठन में बदलाव के बाद छत्तीसगढ़ पहुंचीं स्मृति ईरानी ने पहले दिन ही अपने तेवर से यह संकेत दे दिया कि उनकी प्राथमिकता नेताओं से मेल-मुलाकात तक सीमित नहीं रहेगी। उनका जोर संगठन की कार्यप्रणाली, नेताओं की जवाबदेही और बूथ स्तर पर पार्टी की सक्रियता बढ़ाने पर रहेगा। स्वागत के लिए पहुंचे नेताओं को उनका संदेश साफ था, परिचय और औपचारिकताएं पूरी हो गईं, अब काम पर लगिए।
एयरपोर्ट से पार्टी कार्यालय तक दिखा बदला हुआ अंदाज
स्मृति ईरानी के रायपुर पहुंचने से पहले पार्टी के 16 नेताओं के स्वागत की चर्चा थी, लेकिन एयरपोर्ट पर तस्वीर अलग नजर आई। स्वागत के लिए पहुंचे नेताओं में से कुछ को ही उनसे मिलने का अवसर मिला। न तो फूल-मालाओं का दौर चला और न ही पारंपरिक स्वागत के लिए विशेष इंतजाम नजर आए। वहां होर्डिंग भी नजर नहीं आए।
इसके बाद जब वह भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर पहुंचीं, तब भी उनका रुख सख्त बना रहा। यहां स्वागत के लिए जुटे नेताओं से उन्होंने औपचारिक मुलाकात की, लेकिन फूल-मालाएं स्वीकार करने से परहेज किया। उनके इस अंदाज को संगठन में अनुशासन और कार्यसंस्कृति को लेकर दिए गए संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
परिचय के बाद सीधे संगठन की समीक्षा
पार्टी कार्यालय में स्मृति ईरानी ने दिनभर संगठनात्मक बैठकों का सिलसिला चलाया। दोपहर करीब 12:30 बजे प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री के साथ उनकी बैठक हुई। इसके बाद प्रदेश पदाधिकारियों के साथ संगठन की स्थिति, राजनीतिक गतिविधियों और आगामी रणनीति पर चर्चा की गई।
बैठकों का दायरा केवल मौजूदा पदाधिकारियों तक सीमित नहीं रहा। संभाग प्रभारियों, सह-प्रभारियों, जिला प्रभारियों, सह-प्रभारियों और जिला अध्यक्षों के साथ भी अलग-अलग बैठकें हुईं। इसके बाद पूर्व विधायकों और पूर्व सांसदों से चर्चा की गई। दिन के अंत में निगम-मंडलों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के साथ भी बैठक हुई।
लगातार बैठकों के इस कार्यक्रम से स्पष्ट है कि प्रदेश प्रभारी संगठन की अलग-अलग इकाइयों की कार्यप्रणाली को समझने और नेताओं से सीधे संवाद स्थापित करने में जुटी हैं।
विधायकों और मंत्रियों से भी चर्चा
स्मृति ईरानी के दौरे के दूसरे दिन सोमवार को भाजपा कोर ग्रुप की अहम बैठक होगी। पहले यह बैठक रविवार को प्रस्तावित थी, लेकिन कार्यक्रम में बदलाव के बाद इसे सोमवार के लिए निर्धारित किया गया।
सोमवार सुबह करीब 10 बजे से बैठकों का दौर शुरू होगा। स्मृति ईरानी पहले प्रदेश के सभी भाजपा विधायकों के साथ बैठक करेंगी। इसके बाद सांसदों और मंत्रियों से चर्चा होगी। कोर ग्रुप की बैठक में संगठन की मौजूदा स्थिति, सरकार और संगठन के बीच समन्वय तथा आगामी राजनीतिक रणनीति जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। दौरे के दौरान विचार परिवार के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ भी बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद स्मृति ईरानी के दिल्ली लौटने का कार्यक्रम है।
पूर्व मंत्री-विधायकों ने उठाए अफसरशाही पर सवाल
स्मृति ईरानी के दौरे के दौरान पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों ने सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। बैठक में शामिल कुछ पूर्व जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की कार्यशैली के कारण जनप्रतिनिधियों की भूमिका कमजोर हो रही है और उनकी बातों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा।
बैठक से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, स्मृति ईरानी ने पूर्व जनप्रतिनिधियों से पूछा कि सब कुछ ठीक चल रहा है या नहीं। इस पर कुछ नेताओं ने अपनी समस्याएं रखीं और कहा कि मंत्रियों तथा अधिकारियों तक उनकी बातों की सुनवाई नहीं हो रही है। कुछ ने अफसरशाही के हावी होने का मुद्दा भी उठाया।
पूर्व जनप्रतिनिधियों की शिकायतों का एक प्रमुख पहलू यह रहा कि उन्हें अपने क्षेत्रों की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर अधिकारियों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
रिपोर्ट कार्ड लेकर पहुंचीं प्रभारी, कार्यक्रमों में भागीदारी पर भी सवाल
बैठक के दौरान स्मृति ईरानी अपने साथ एक रिपोर्ट कार्ड भी लेकर पहुंची थीं। उन्होंने संगठन के नेताओं से कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी और सक्रियता को लेकर सवाल किए। बैठक में मौजूद कुछ नेताओं के मुताबिक, उन्होंने कार्यक्रमों में अनुपस्थिति और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के निर्वहन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।
पूर्व मंत्रियों और विधायकों ने इस दौरान सम्मान और संवाद का विषय उठाया। उनका कहना था कि यदि वरिष्ठ नेताओं को उचित सम्मान के साथ बुलाया जाएगा, तो वे कार्यक्रमों और बैठकों में जरूर शामिल होंगे। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि कई बार कार्यक्रमों में औपचारिकता निभाने के लिए उन्हें बुलाया जाता है, लेकिन उनकी बातों को पर्याप्त महत्व नहीं मिलता।
संगठन को क्या संदेश दे गईं स्मृति?
स्मृति ईरानी का पहला दौरा भाजपा के भीतर संगठनात्मक अनुशासन और जवाबदेही की कसौटी के तौर पर देखा जा रहा है। स्वागत-सत्कार से दूरी और लगातार बैठकों के जरिए उन्होंने यह संकेत दिया कि संगठन में पद से ज्यादा महत्वपूर्ण सक्रियता और काम का मूल्यांकन होगा।
हालांकि, पूर्व मंत्रियों और विधायकों की ओर से उठाए गए सवालों का समाधान किस तरह निकलेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, स्मृति ईरानी के सख्त तेवरों ने प्रदेश भाजपा में संगठन और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।