परीक्षा में नकल करने वालों की अब खैर नहीं, तीन शहरों में बनीं स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट

Harrison Masih | Oct 20, 2026, 18:40 IST
परीक्षा में नकल पर सख्ती
छत्तीसगढ़ में परीक्षा में नकल करने वालों के खिलाफ सख्ती बढ़ गई है। राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ विशेष त्वरित अदालत की व्यवस्था की है। कदम का मकसद प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाना है। राज्य शासन ने तीन जिलों की अदालतों को खास दर्जा दिया है।

बिलासपुर, रायपुर और कोरिया के सत्र न्यायाधीश न्यायालय अब विशेष त्वरित अदालत होंगे। यहां सार्वजनिक परीक्षा में नकल से जुड़े मामलों की तेज सुनवाई होगी।



समझें क्या है पूरा मामला

  • छत्तीसगढ़ शासन ने नकल रोकने के लिए तीन विशेष त्वरित अदालतें नामित की हैं।
  • ये अदालतें बिलासपुर, रायपुर और कोरिया जिले के सत्र न्यायाधीश न्यायालय हैं।
  • कानून एवं विधायी कार्य विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी की है।
  • कोरिया जिले की विशेष अदालत बैकुंठपुर में लगेगी।
  • इन अदालतों में परीक्षा में गड़बड़ी के मामले की तेजी से सुनवाई होगी।

अनुचित साधनों का निवारण अधिनियम

यह फैसला सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत हुआ है। अनुचित साधनों का निवारण अधिनियम यानी परीक्षा में गलत तरीकों की रोकथाम का कानून।



अधिसूचना (सरकार की आधिकारिक सूचना) में धारा 12-क की उपधारा (2) का जिक्र है। उपधारा यानी धारा का एक छोटा हिस्सा। राज्य शासन ने इसी उपधारा से मिली शक्तियों का इस्तेमाल किया।



अधिसूचना वर्ष 2026 में संशोधित अधिनियम के तहत आने वाले मामलों के लिए है। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें नामित हुई हैं। नामित यानी तय की गई।



कानून एवं विधायी कार्य विभाग की अधिसूचना

यह अधिसूचना कानून एवं विधायी कार्य विभाग की ओर से जारी हुई है। इसमें तीन जिलों की अदालतों के नाम दर्ज हैं। ये बिलासपुर, रायपुर और कोरिया हैं।



अधिसूचना में साफ है कि हर अदालत अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में काम करेगी। यानी तीनों जिलों की अदालतें अपने इलाके के मामले देखेंगी।




सत्र न्यायाधीश न्यायालय की भूमिका

अब जिम्मेदारी तीन सत्र न्यायाधीश न्यायालयों पर है। सत्र न्यायाधीश यानी जिले की सत्र अदालत के प्रमुख न्यायाधीश। हर अदालत अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में ऐसे मामलों की सुनवाई करेगी।



अधिकार क्षेत्र यानी वह इलाका, जहां तक अदालत का फैसला लागू होता है। बिलासपुर की अदालत बिलासपुर के मामले देखेगी। रायपुर और कोरिया की अदालतों पर भी यही बात लागू होगी।



सोचिए एक बार। फैसला बरसों न आए, तो परीक्षार्थी का भरोसा कैसे टिकेगा? इसी भरोसे के लिए तीन अदालतों को तेज सुनवाई का जिम्मा मिला है।



तीनों जिलों में सत्र न्यायाधीश न्यायालयों को ही यह जिम्मा मिला है। बिलासपुर, रायपुर और कोरिया की अदालतें अब परीक्षा से जुड़े ऐसे मामले देखेंगी। नामित होने के बाद इनकी पहचान विशेष अदालत की होगी। अब जरा सुनवाई की जगह देखते हैं।



कोरिया की अदालत बैकुंठपुर में

कोरिया जिले की विशेष अदालत बैकुंठपुर में लगेगी। बैकुंठपुर विशेष अदालत कोरिया जिले के अपने अधिकार क्षेत्र के मामले देखेगी। बाकी दो अदालतें बिलासपुर और रायपुर में अपने-अपने क्षेत्र के मामले सुनेंगी। यानी सुनवाई तीन अलग शहरों में होगी।



इस फैसले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की भी भूमिका रही। अधिसूचना चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र के परामर्श के बाद जारी हुई। यानी फैसले से पहले चीफ जस्टिस से सलाह ली गई।



छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने आगे की प्रक्रिया शुरू की। उन्होंने संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को अधिसूचना की प्रतियां भेजीं। साथ में जरूरी निर्देश भी जारी किए।




प्रतियोगी परीक्षा नकल रोकथाम का मकसद

इस पूरे कदम का मकसद साफ है। विशेष अदालतें अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों का शीघ्र निपटारा करेंगी। इससे परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहेगी।



प्रतियोगी परीक्षा नकल रोकथाम की यही कोशिश अधिसूचना में दिखती है। कानूनी कार्रवाई को गति देने पर सरकार का जोर है। अनुचित साधन यानी परीक्षा में अपनाए गए गलत तरीके।



आखिर अलग अदालत की जरूरत क्यों पड़ी?

सीधा जवाब है, मामलों के जल्द निपटारे के लिए। त्वरित अदालत यानी वह अदालत, जो मामलों की सुनवाई तेजी से करे। परीक्षा में पारदर्शिता बनी रहे, यह भी बड़ा लक्ष्य है। इसी लक्ष्य से बिलासपुर, रायपुर और कोरिया की तीन अदालतें नामित हुई हैं। अब नजर इन अदालतों पर रहेगी। सुनवाई कैसे आगे बढ़ती है, यह आने वाले समय में दिखेगा।



Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • छत्तीसगढ़ में नकल
  • परीक्षा में नकल
  • स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन
  • Special Fast-Track Courts
  • बिलासपुर
  • रायपुर