साय सरकार की नई पहल सुघ्घर छत्तीसगढ़, बदलेंगे गांवों के हालात

The Sootr | Jun 23, 2026, 15:31 IST
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छत्तीसगढ़ सरकार ने सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान शुरू करने की तैयारी की है। इस अभियान के तहत 23 जिलों में 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत संतृप्तिकरण किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र परिवार सरकारी लाभ से वंचित न रहे।

Raipur. छत्तीसगढ़ में अब सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार खुद गांवों और परिवारों तक पहुंचेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी पात्र व्यक्ति किसी योजना से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार इसी सोच के साथ प्रदेशव्यापी सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान शुरू करने जा रही है। यह अभियान प्रदेश के 23 जिलों में चलाया जाएगा, जिसके तहत 31 प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत संतृप्तिकरण करने का लक्ष्य रखा गया है।



सरकार का मानना है कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी पूरा होगा, जब विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से तैयार किया गया यह अभियान प्रशासन, तकनीक और जनभागीदारी को एक मंच पर लाकर काम करेगा। अभियान का फोकस यह सुनिश्चित करने पर होगा कि योजनाओं का फायदा वास्तव में पात्र परिवारों तक पहुंचे और उनके जीवन में बदलाव दिखाई दे।



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बस्तर के सफल मॉडल से पहुंची पहल

सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की बड़ी खासियत यह है कि इसकी नींव पहले से सफल नियद नेल्लानार मॉडल पर रखी गई है। वर्ष 2024 में बस्तर संभाग के दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में शुरू की गई नियद नेल्लानार योजना ने प्रशासन और आम लोगों के बीच भरोसे का नया रिश्ता बनाया है। इसके जरिए विभिन्न विभागों की सेवाओं और योजनाओं को एक साथ जोड़कर लोगों तक पहुंचाया गया है। दूर-दराज के गांवों में सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ी है और बड़ी संख्या में पात्र हितग्राहियों को लाभ मिला है। योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद इसे नियद नेल्लानार 2.0 के रूप में 10 जिलों तक विस्तार दिया गया है। अब उसी मॉडल को राज्यव्यापी स्वरूप देते हुए सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान शुरू किया जा रहा है।



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23 जिलों में चलेगा अभियान

यह अभियान रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के 23 जिलों में संचालित किया जाएगा। इसके तहत रायपुर संभाग के रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी और महासमुंद जिले इसमें शामिल हैं। बिलासपुर संभाग के बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़, सक्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले भी अभियान का हिस्सा होंगे।



दुर्ग संभाग के दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम और राजनांदगांव जिलों में भी यह अभियान चलेगा। वहीं, सरगुजा संभाग के सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले भी इसमें शामिल किए गए हैं। इन जिलों के ग्रामीण परिवारों को सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर सर्वे, शिविर और निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा।



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31 योजनाओं को एक मंच पर लाएगी सरकार

अक्सर देखा जाता है कि एक परिवार कई योजनाओं के लिए पात्र होता है, लेकिन जानकारी के अभाव या प्रक्रिया की जटिलता के कारण उसे लाभ नहीं मिल पाता। सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान इसी का समाधान लेकर आया है। अभियान के तहत सामाजिक सुरक्षा, आवास, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, महिला सशक्तीकरण, कृषि, कौशल विकास और नागरिक सेवाओं से जुड़ी 31 प्रमुख योजनाओं को एक मंच पर लाया जाएगा।



अभियान में मनरेगा जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जल जीवन मिशन, राशन कार्ड, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, आयुष्मान भारत योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, मिशन इंद्रधनुष, महतारी वंदन योजना, जन-धन योजना, कौशल विकास कार्यक्रम, श्रम कार्ड, वनाधिकार पट्टा, आधार कार्ड और विभिन्न प्रमाण-पत्र सेवाएं शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य यह है कि हर पात्र परिवार को इन योजनाओं का पूरा लाभ मिले और किसी भी लाभार्थी का नाम सूची से छूटे नहीं।



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तकनीक बनेगी अभियान की ताकत

सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाया जा रहा है। इसके लिए छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) अत्याधुनिक डिजिटल डैशबोर्ड विकसित करेगी। यह डैशबोर्ड राज्य स्तर से लेकर संभाग, जिला, विकासखंड, ग्राम पंचायत और गांव तक योजनाओं की प्रगति की रियल-टाइम जानकारी देगा। किस योजना में कितने पात्र लोग लाभ से वंचित हैं, किस क्षेत्र में काम तेजी से हो रहा है और कहां अतिरिक्त प्रयास की जरूरत है, इसकी पूरी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध रहेगी। डैशबोर्ड पर प्रत्येक योजना की संतृप्तिकरण स्थिति, शेष हितग्राहियों की संख्या और प्रगति प्रतिशत दिखाई देगा। इससे प्रशासन को त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलेगी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।



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तीन चरणों में चलेगा पूरा अभियान

राज्य सरकार ने अभियान के संचालन के लिए तीन चरणों की विस्तृत कार्ययोजना बनाई है। पहले चरण में गांव-गांव जाकर आधारभूत सर्वेक्षण किया जाएगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और विभिन्न विभागों के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर संभावित हितग्राहियों की पहचान की जाएगी। इसके बाद योजनावार बेसलाइन तैयार होगी।



दूसरे चरण में ग्राम, क्लस्टर और विकासखंड स्तर पर विशेष संतृप्तिकरण शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में पात्र लोगों का पंजीयन किया जाएगा और उन्हें योजनाओं से जोड़ा जाएगा। जिन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी, उनकी व्यवस्था भी यहीं की जाएगी। तीसरे चरण में लगातार निगरानी, समीक्षा और मूल्यांकन किया जाएगा। जहां कमियां सामने आएंगी, वहां तुरंत सुधार के कदम उठाए जाएंगे, ताकि अभियान का लक्ष्य पूरी तरह हासिल किया जा सके।



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कलेक्टर से लेकर CS तक करेंगे निगरानी

अभियान के संचालन में जिला प्रशासन की भूमिका सबसे अहम होगी। कलेक्टर अपने जिले में अभियान के प्रमुख अधिकारी होंगे और सर्वेक्षण से लेकर शिविरों तथा संतृप्तिकरण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। संभागायुक्त हर तीन महीने में प्रगति की समीक्षा करेंगे। वहीं मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति अभियान की मॉनिटरिंग करेगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका असर जमीन पर दिखाई दे।



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अलग बजट नहीं, विभागों के अभिसरण से काम

सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान की एक और खास बात यह है कि इसके लिए अलग से कोई नया बजट शीर्ष नहीं बनाया जाएगा। सरकार विभिन्न विभागों की स्वीकृत योजनागत निधियों का उपयोग करेगी। इसके साथ ही कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR), जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) और अन्य संस्थागत स्रोतों से भी संसाधनों का अभिसरण किया जाएगा। इस मॉडल से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।



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सुशासन का नया अध्याय लिखने की तैयारी

राज्य सरकार का मानना है कि किसी भी योजना की सफलता का वास्तविक पैमाना उसके बजट का आकार नहीं, बल्कि लाभार्थियों तक उसकी पहुंच होती है। सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान इसी सोच को धरातल पर उतारने का प्रयास है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि यह अभियान नागरिक-केंद्रित सुशासन की व्यापक पहल है। इसका उद्देश्य हर परिवार तक विकास, सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के अवसर पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जब शासन की प्रत्येक योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी, जब हर पात्र परिवार योजनाओं से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस करेगा, तभी सच्चे अर्थों में विकसित छत्तीसगढ़ का सपना साकार होगा।


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