113 करोड़ की साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: डीएन चक्रधारी एजुकेशन एसोसिएशन का डायरेक्टर देवनारायण गिरफ्तार
समझें क्या है पूरा मामला
- जांच में आरोपी से जुड़ी दो संस्थाओं के तीन बैंक खातों का पता चला।
- इन खातों में लगभग 23 करोड़ रुपए का लेनदेन बताया गया है।
- इन खातों का संबंध 150 साइबर शिकायतों से पाया गया।
- ये शिकायतें जनवरी 2024 से जुलाई 2025 के बीच दर्ज हुई बताई गईं।
- कुल ठगी की रकम 113 करोड़ 32 लाख रुपए से अधिक बताई गई है।
सूचना कहां से मिली
सूचना भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के पोर्टल से मिली थी। पोर्टल की सूचनाओं की जांच में जिले की एक शैक्षणिक संस्था का खाता संदिग्ध मिला। इसके बाद पुलिस ने संबंधित खातों की जांच शुरू की। बाद में इस मामले का दायरा कई राज्यों तक फैला हुआ पाया गया। सोर्स में छत्तीसगढ़ से लेकर जम्मू-कश्मीर तक की शिकायतों के नाम दिए गए हैं।
तीन खाते, दो संस्थाएं और लेनदेन
आरोपी से जुड़ी दो संस्थाओं के खाते सामने आए हैं। पहली संस्था डीएन चक्रधारी एजुकेशन डेवलपमेंट एसोसिएशन है। इसका पंजीयन 25 मई 2023 को कराया गया था। इस संस्था के नाम पर भारतीय स्टेट बैंक की सूरजपुर शाखा में संयुक्त खाता संचालित था। इसमें करीब 12 करोड़ 50 लाख रुपए का लेनदेन बताया गया है।
दूसरी संस्था जनसेवा शिक्षा एवं सामाजिक उत्थान ट्रस्ट है। इसके नाम पर आईडीएफसी बैंक में दो खाते खोले गए थे। इनमें लगभग 10 करोड़ 50 लाख रुपए के ट्रांजेक्शन दर्ज हैं। तीनों खातों में मिलाकर करीब 23 करोड़ रुपए का वित्तीय लेनदेन सामने आया है। पुलिस अब रकम के आने और आगे भेजे जाने के रिकॉर्ड खंगाल रही है।
व्हाट्सएप कॉल से कमीशन तक
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को कई जानकारियां दी हैं। पुलिस के मुताबिक, व्हाट्सएप कॉल से ठगी से जुड़े लोगों से संपर्क हुआ। गिरोह ने बड़ी रकम के लेनदेन पर मोटा कमीशन देने का प्रस्ताव रखा था।
पटना में खाते और पासवर्ड
कमीशन के लालच में आरोपी पटना पहुंचा। पुलिस के मुताबिक, पटना में खातों की जानकारी और पासवर्ड दिए गए। आरोपी ने खाते उपलब्ध कराने के बदले आठ लाख रुपए मिलने की बात कही है। ये आरोप पुलिस के बयान के आधार पर हैं और अदालत में साबित होने बाकी हैं।
म्यूल अकाउंट की आशंका
जांच में यह सवाल उठा है कि क्या कमीशन पर खाते दिए गए। साइबर अपराधों में ऐसे खातों को आमतौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है। म्यूल अकाउंट में खाताधारक और रकम चलाने वाले लोग अलग होते हैं। पुलिस यह भी देख रही है कि खाते इसी तरह इस्तेमाल हुए या नहीं। अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और अदालती प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
शिक्षा संस्था या खातों का दुरुपयोग?
पुलिस संस्थाओं के गठन और पंजीयन के दस्तावेज जांच रही है। पदाधिकारियों की भूमिका और खाते खुलवाने के रिकॉर्ड भी देखे जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि संस्थाएं असल में चल रही थीं या नहीं।
अभी तक आरोपियों की असली भूमिका और उनकी जानकारी में कितनी रकम का लेनदेन हुआ, यह तय नहीं हुआ है। देश के अलग-अलग हिस्सों में ठगी के शिकार हुए लोगों की रकम इन खातों से जुड़ी बताई गई है।
गिरफ्तारी का क्रम
22 फरवरी 2026 को सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज किया। इसमें डायरेक्टर देवनारायण चक्रधारी और को-डायरेक्टर महेश चक्रधारी आरोपी बनाए गए थे।इसके बाद 22 अगस्त 2026 को महेश चक्रधारी गिरफ्तार कर जेल भेजे गए। पूछताछ में महेश ने बैंक खाता चचेरे भाई के नाम से खुलवाने की बात कही।
महेश की गिरफ्तारी के बाद देवनारायण फरार था। पुलिस की लगातार तलाश के बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। बाद में उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
आगे क्या होगा
पुलिस अब अन्य संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जिन लोगों ने कथित रूप से बैंकिंग सुविधाएं ली थीं, उनकी पहचान चुनौती है। पुलिस रिकॉर्ड और बयानों के आधार पर नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। सूरजपुर के पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल इस मामले की जांच पर निगरानी रख रहे हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है
साइबर ठगी के शिकार लोग अक्सर अपनी जमा पूंजी गंवा देते हैं, और ठगी की रकम बैंक खातों के जरिए इधर-उधर होती है। ऐसे में बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों की जिम्मेदारी भी सवालों में आती है। संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को सम्मान से जीने का अधिकार देता है, जिसमें आर्थिक सुरक्षा भी शामिल मानी गई है। इसलिए जांच की पारदर्शिता और पीड़ितों की रकम की वापसी दोनों जरूरी हैं।
FAQs
सवाल: इस साइबर नेटवर्क मामले में अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं?
जवाब: अब तक दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, महेश चक्रधारी और देवनारायण चक्रधारी। दोनों को जेल भेजा जा चुका है।
सवाल: ठगी की कुल रकम कितनी बताई गई है?
जवाब: शिकायतों में 113 करोड़ 32 लाख रुपए से अधिक की रकम शामिल बताई गई है। सूरजपुर की संस्थाओं के खातों में लगभग 23 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ। दोनों आंकड़े अलग हैं।
सवाल: क्या आरोपों पर अंतिम फैसला हो गया है?
जवाब: नहीं, अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और अदालती प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।