अब सरेंडर नक्सली बनेंगे पुलिस के ट्रेनर, IED और गुरिल्ला युद्ध की देंगे ट्रेनिंग

Harrison Masih | Apr 07, 2026, 15:56 IST
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पुलिस ने एक दर्जन से अधिक सरेंडर माओवादी कैडर को कांकेर CTJW कॉलेज भेजा है, जहां वे नए पुलिस जवानों को IED से निपटने और गुरिल्ला युद्ध की रणनीतियों की ट्रेनिंग देंगे। ये कैडर पहले माओवादी संगठन में IED एक्सपर्ट और मेडिकल टीम का हिस्सा रह चुके हैं।

NEWS IN SHORT

  • पुलिस ने एक दर्जन से ज्यादा सरेंडर माओवादियों को CTJW कॉलेज भेजा है।
  • ये कैडर नए पुलिस जवानों को IED और गुरिल्ला टैक्टिक्स की जानकारी देंगे।
  • ये सरेंडर नक्सली पहले संगठन में IED एक्सपर्ट रह चुके हैं।
  • बस्तर के पुनर्वास केंद्रों में 600 से ज्यादा सरेंडर नक्सली रह रहे हैं।
  • योग, काउंसलिंग और रोजगार प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

News In Detail

Jagdalpur. बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान के बीच पुलिस ने एक अहम रणनीतिक कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक दर्जन से ज्यादा सरेंडर कर चुके माओवादी कैडर को कांकेर स्थित काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वॉरफेयर (CTJW) कॉलेज भेजा है, जहां वे नए पुलिस जवानों को IED से निपटने और गुरिल्ला युद्ध की रणनीतियों के बारे में जानकारी देंगे।



इन सरेंडर कैडरों का अनुभव पुलिस बल की फील्ड ट्रेनिंग को और मजबूत बनाने में मददगार माना जा रहा है।



IED एक्सपर्ट रहे नक्सली देंगे फील्ड ट्रेनिंग

सरेंडर करने वाले अधिकांश कैडर पहले प्रतिबंधित CPI (माओवादी) संगठन में IED एक्सपर्ट के रूप में काम कर चुके हैं। कुछ सदस्य संगठन की मेडिकल टीम का भी हिस्सा थे, जो जंगल में घायल गुरिल्लाओं का इलाज करते थे। अब यही अनुभव पुलिस के नए जवानों को प्रशिक्षण देने में इस्तेमाल किया जाएगा।



CTJW कॉलेज में नए रंगरूटों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

कांकेर स्थित CTJW कॉलेज (CTJW College Kanker) राज्य का सबसे बड़ा जंगल वॉरफेयर ट्रेनिंग संस्थान है। यहां सब-इंस्पेक्टर और डिप्टी एसपी के नए बैच को गुरिल्ला युद्ध की रणनीतियां सिखाई जाती हैं। IG बस्तर पी. सुंदरराज पट्टिलिंगम के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य जवानों को माओवादियों के काम करने के तरीकों से बेहतर तरीके से परिचित कराना है।



अलग-अलग जिलों से भेजे गए सरेंडर कैडर

सूत्रों के अनुसार सुकमा से 6 कैडर, बीजापुर से 2 कैडर, दंतेवाड़ा से 5 कैडर, कांकेर से 5 कैडर को ट्रेनिंग सेशन के लिए भेजा गया है।



IED पहचान में मिल रही अहम मदद

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सरेंडर नक्सलियों ने हाल के दिनों में जंगलों और सड़कों पर लगाए गए IED की पहचान करने में महत्वपूर्ण मदद की है।



उन्होंने बताया कि माओवादी अक्सर पत्तों और प्राकृतिक संकेतों का विशेष तरीके से इस्तेमाल कर IED लगाने की जगह चिन्हित करते थे, जिसे पहचानने में उनका अनुभव बेहद उपयोगी साबित हो रहा है।



पुनर्वास केंद्रों में योग, काउंसलिंग और रोजगार प्रशिक्षण

बस्तर के छह पुनर्वास केंद्रों में 600 से अधिक सरेंडर नक्सलियों को योग, काउंसलिंग, स्किल डेवलपमेंट, रोजगार प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे सामान्य जीवन की मुख्यधारा से जुड़ सकें। मनोचिकित्सकों की निगरानी में उनकी मानसिकता बदलने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।



नए सरेंडर नक्सलियों के लिए रोल मॉडल बनेंगे पुराने कैडर

सीनियर सरेंडर नक्सलियों को कैंप में बुलाकर उन्हें नए सरेंडर कैडर के सामने प्रेरणा मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। IG बस्तर पी. सुंदरराज के अनुसार, इसका उद्देश्य हिंसक मानसिकता को पूरी तरह समाप्त करना है।



आगे क्या

पुलिस का मानना है कि सरेंडर नक्सलियों के अनुभव से नए जवानों की जंगल ऑपरेशन क्षमता और IED डिटेक्शन स्किल बेहतर होगी। इससे बस्तर में नक्सल विरोधी अभियानों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।



निष्कर्ष

सरेंडर नक्सलियों को CTJW कॉलेज में ट्रेनिंग प्रक्रिया से जोड़ना छत्तीसगढ़ पुलिस की रणनीतिक पहल है। इससे जहां नए जवानों को गुरिल्ला युद्ध और IED से निपटने की बेहतर समझ मिलेगी, वहीं सरेंडर कैडरों के पुनर्वास और मुख्यधारा में शामिल होने की प्रक्रिया भी मजबूत होगी।



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