छत्तीसगढ़ तहसीलदार हड़ताल : 7 जून तक राजस्व कामकाज पूरी तरह ठप

Umeshwari Baghel | Jun 03, 2026, 16:15 IST
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छत्तीसगढ़ में नायब तहसीलदार से मारपीट के विरोध में 500 से अधिक तहसीलदार हड़ताल पर। आय-जाति, नामांतरण और राजस्व कार्य प्रभावित, तहसील न्यायालयों में लंबित प्रकरण बढ़े। हड़ताल 7 जून तक जारी रहने की संभावना।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ तहसीलदार हड़ताल: कामकाज 7 जून तक ठप
  • नायब तहसीलदार से मारपीट के विरोध में प्रदेशव्यापी हड़ताल
  • आय-जाति, नामांतरण और राजस्व कार्य प्रभावित, न्यायालयों में लंबित प्रकरण बढ़े
  • कांग्रेस ने हड़ताल को जायज बताया, दोषी विधायक को बचाने का आरोप सरकार पर
  • सरकारी कार्रवाई नहीं, तहसीलदारों का विरोध जारी, आम लोगों को परेशानी

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में नायब तहसीलदार के साथ हुई बदसलूकी और मारपीट के विरोध में राज्य के 500 से ज्यादा तहसीलदार हड़ताल पर चले गए हैं। इस वजह से तहसीलों में सारे काम-काज पूरी तरह ठप हो गए हैं, और आसार हैं कि 7 जून तक दफ्तरों में यही सन्नाटा पसरा रहेगा।



प्रदेशव्यापी हड़ताल का असर

राज्य के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों के हड़ताल पर जाने से आय-जाति प्रमाण, नामांतरण, मूल निवास और राजस्व संबंधी काम ठप हो गए हैं। तहसील न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। रायपुर समेत सभी बड़े तहसील कार्यालयों में हड़ताल का असर साफ देखा जा रहा है।



कई लोग अपने प्रकरणों या दस्तावेज़ों के लिए तहसील कार्यालय पहुंचे, लेकिन हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा।



हड़ताल का कारण

यह हड़ताल सीतापुर में हुई मारपीट के मामले के बाद शुरू हुई। नायब तहसीलदार के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर तहसीलदार हड़ताल पर बैठे हैं।



सरकार ने मामले पर चर्चा की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से तहसीलदार नाराज हैं। कांग्रेस ने भी तहसीलदारों के हड़ताल को जायज बताया और आरोप लगाया कि बीजेपी विधायक रामकुमार टोप्पो को बचाने के लिए सरकार निष्क्रिय है।



कांग्रेस के संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि विधायक के नायब तहसीलदार के साथ मारपीट के मामले में तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विधायक को किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर आपत्ति थी तो वे उच्च अधिकारियों या मुख्यमंत्री से शिकायत कर सकते थे। मारपीट का अधिकार किसी को नहीं है।



तहसील न्यायालयों में सुनवाई पर असर

2 जून को होने वाले प्रकरण अब 8 जून को होंगे।



3, 4 और 5 जून के प्रकरण अगले सप्ताह ही सुनवाई के लिए निर्धारित किए गए हैं।



इससे लोगों को अपने प्रकरणों के निपटान में अवकाश और देरी का सामना करना पड़ रहा है।



प्रभावित कामकाज

आय और जाति प्रमाण पत्र


नामांतरण और मूल निवास प्रमाण पत्र


जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र


त्रुटि सुधार और खसरा नंबर अद्यतन


सीमांकन और पुराने बटांकन काम



सरकार की निष्क्रियता पर सवाल

घटना को एक हफ्ता बीत गया है, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। कांग्रेस का कहना है कि सरकार दोषी विधायक को बचाने के लिए सक्रिय है, जबकि अधिकारी अपने अधिकारों के लिए हड़ताल पर हैं।



शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को हड़ताल की जानकारी नहीं होने की वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग कार्यालय पहुंचकर खाली हाथ लौट रहे हैं।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में तहसीलदारों की हड़ताल राजस्व प्रणाली और नागरिक सेवाओं पर बड़ा असर डाल रही है। हड़ताल सरकार की निष्क्रियता और अधिकारियों की नाराजगी का परिणाम है। अगले सप्ताह तक तहसील कामकाज ठप रहने की संभावना है, जिससे लोगों को अपनी योजनाओं और दस्तावेज़ों में देरी का सामना करना पड़ेगा।



FAQ

  1. तहसीलदार हड़ताल कब तक चलेगी?
    तहसीलदारों की हड़ताल 7 जून तक जारी रहने की संभावना है। इसके चलते प्रदेशभर के तहसील कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहेगा। लोग आय-जाति, नामांतरण और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए अधिकारियों से संपर्क नहीं कर पाएंगे।
  2. हड़ताल का मुख्य कारण क्या है?
    हड़ताल का मुख्य कारण सीतापुर में नायब तहसीलदार के साथ हुई मारपीट और अभद्रता है। तहसीलदारों का कहना है कि दोषी विधायक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। नाराज तहसीलदारों ने सरकार से ठोस कदम न उठाए जाने के चलते यह हड़ताल शुरू की है।
  3. हड़ताल का आम लोगों पर क्या असर पड़ा हैं?
    हड़ताल के कारण जाति-निवास और आय प्रमाण पत्र से लेकर रजिस्ट्री, नामांतरण, जन्म-मृत्यु सर्टिफिकेट और जमीनों के सीमांकन जैसे जरूरी काम पूरी तरह रुक गए हैं। खसरा सुधार और जमीन के बंटवारे से जुड़ी फाइलें भी आगे नहीं बढ़ पा रही हैं, जिससे तहसील कोर्ट में मामलों का अंबार लग गया है और आम लोग दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

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