वन मंजूरी के बिना न पेड़ कटेंगे न खनन, तारा कोल ब्लॉक पर सरकार का जवाब

VINAY VERMA | Sept 13, 2026, 18:56 IST
तारा कोल ब्लॉक पर सरकार की दोटूक
तारा कोल ब्लॉक पर सरकार की दोटूक
तारा कोल ब्लॉक पर सरकार ने साफ किया है कि अभी सिर्फ नीलामी हुई है। खनन शुरू करने से पहले कंपनी को वन, पर्यावरण और अन्य मंजूरियां लेनी होंगी। सरकार ने कहा कि हसदेव-अरण्य में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन रखा जाएगा।

तारा कोल ब्लॉक को लेकर बढ़ते विरोध और सवालों के बीच सरकार ने स्थिति साफ की है। छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के मुताबिक अभी इस ब्लॉक में सिर्फ प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी हुई है। जमीन पर खनन शुरू नहीं हुआ है। कंपनी को पहले कई जरूरी मंजूरियां लेनी होंगी। यानी नीलामी जीतने का मतलब यह नहीं कि अगले दिन जंगल में मशीनें उतर जाएंगी।



कंपनी को कई मंजूरियां लेनी होंगी

सरकार के मुताबिक खनन शुरू करने से पहले माइनिंग प्लान मंजूर कराना होगा। इसके बाद खनन पट्टा, पर्यावरण मंजूरी, वन मंजूरी और दूसरी जरूरी अनुमति लेनी होगी। इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही असल खनन शुरू हो सकेगा। सरकार ने साफ कहा है कि मंजूरी मिलने से पहले पेड़ काटने या खनन शुरू करने की इजाजत नहीं होगी।



9 कंपनियों ने लगाई थी बोली

तारा कोल ब्लॉक की नीलामी में कुल 9 बोलियां आई थीं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह ब्लॉक CG Syn&Gas and Chemicals Limited को मिला है। सरकार का तर्क है कि यह मौजूदा व्यावसायिक कोयला खनन नीति के तहत हुई पारदर्शी नीलामी है। लेकिन कंपनी के सफल बोलीदाता बनने से उसे अपने आप वन और पर्यावरण मंजूरी नहीं मिल गई है।



तारा का मामला आज का नहीं

तारा कोल ब्लॉक का विवाद नया नहीं है। साल 2011 में यह ब्लॉक छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित हुआ था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दूसरे कोल ब्लॉकों के साथ इसका पुराना आवंटन भी रद्द हो गया। अब इसे नए सिरे से प्रतिस्पर्धी नीलामी के जरिए दिया गया है।



पुराने फैसलों का भी दिया हवाला

सरकार ने हसदेव-अरण्य के पुराने घटनाक्रम का हवाला देकर कहा है कि इस इलाके में कोयला खनन और बिजली उत्पादन को लेकर पहले भी फैसले होते रहे हैं। परसा ईस्ट केते बासन यानी PEKB को राजस्थान की बिजली उत्पादन जरूरतों से जोड़ा गया था। सरकार के दस्तावेज में दावा है कि तारा और PEKB से जुड़ी वन मंजूरी की प्रक्रिया भी 2011-12 के दौरान आगे बढ़ी थी।



विधानसभा से केंद्र तक पत्राचार

सरकार ने यह भी याद दिलाया कि हसदेव में कोयला उत्पादन को लेकर पहले की सरकारों के समय केंद्र से पत्राचार होता रहा। 2019 और 2021 में कोल ब्लॉकों के आवंटन को लेकर केंद्र को पत्र भेजे गए। साल 2022 में विधानसभा में हसदेव क्षेत्र के कोल ब्लॉकों को लेकर अशासकीय संकल्प भी पारित हुआ था।



मोरगा ब्लॉक का मामला भी बाकी

सरकार ने मोरगा कोल ब्लॉक का मुद्दा भी उठाया है। दस्तावेज के मुताबिक पिछली सरकार ने मोरगा को छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के पक्ष में आवंटित करने के लिए केंद्र से अनुरोध किया था। यानी हसदेव में कोयला खनन को लेकर फैसला केवल तारा तक सीमित नहीं है।



वैज्ञानिक रिपोर्ट का भी सहारा

हसदेव-अरण्य में भविष्य के खनन को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन भी कराया गया। इसमें जैव विविधता, वन्यजीव, पानी के स्रोत और पर्यावरण की संवेदनशीलता का आकलन किया गया। सरकार के मुताबिक अध्ययन में तारा समेत कुछ ब्लॉकों को कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ खनन के लिए विचार योग्य बताया गया।



जंगल बचने का आंकड़ा सामने

सरकार ने वन संरक्षण पर भी अपना पक्ष रखा है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की 2023 रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2021 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र में 683.62 वर्ग किलोमीटर की शुद्ध बढ़ोतरी हुई। दावा है कि यह देश के सभी राज्यों में सबसे ज्यादा वृद्धि थी।



असली सवाल अब मंजूरी का

सरकार का जवाब फिलहाल इतना है कि तारा में नीलामी हुई है, खनन नहीं। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी। वन और पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया में क्या शर्तें लगती हैं, स्थानीय लोगों की आपत्तियों का क्या होगा और जंगल पर इसका कितना असर पड़ेगा, यही आगे के सबसे बड़े सवाल हैं। सरकार ने कहा है कि ऊर्जा जरूरत, विकास, पर्यावरण और स्थानीय हितों के बीच संतुलन रखा जाएगा।



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