CDL के वाइस प्रेसिडेंट उदय राव गिरफ्तार, 183 करोड़ के आबकारी भुगतान घोटाले में EOW की बड़ी कार्रवाई

VINAY VERMA | May 13, 2026, 21:11 IST
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छत्तीसगढ़ डिस्टलरीज लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट एन. उदय राव को EOW ने 183 करोड़ के आबकारी भुगतान घोटाले में गिरफ्तार किया है। इस घोटाले में फर्जी बिलिंग, भुगतान समन्वय, और कमीशन नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी होने का आरोप है।

छत्तीसगढ़ के चर्चित आबकारी ओवरटाइम भुगतान घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए CDL यानी छत्तीसगढ़ डिस्टलरीज लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट एन. उदय राव को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में इससे पहले सात आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजे जा चुके हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि उदय राव फर्जी बिलिंग, भुगतान समन्वय और कमीशन नेटवर्क का अहम कड़ी था।



रिकॉर्ड में दूसरी कंपनी, संचालन कोई और करता था

EOW की जांच में सामने आया है कि छग स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के रिकॉर्ड में मैनपावर सप्लाई का कार्य ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड के नाम पर दर्ज था, लेकिन वास्तविक फील्ड संचालन, बिलिंग समन्वय, कर्मचारियों की व्यवस्था और भुगतान संबंधी काम एन. उदय राव देख रहा था। जांच एजेंसी के अनुसार यह पूरा संचालन CDL से जुड़ी कंपनी एनकेजेए के माध्यम से किया जा रहा था।



5 साल में 182.98 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान

EOW की विवेचना में वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच मैनपावर एजेंसियों को अलग-अलग मदों में करीब 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किए जाने का खुलासा हुआ है।ओवरटाइम के नाम पर 101.20 करोड़, बोनस में 12.21 करोड़ और एक्स्ट्रा वर्किंग डेज के बहाने 54.46 करोड़ का चूना लगाया गया।सर्विस चार्ज एवं सर्विस टैक्स के रूप में करीब 15.11 करोड़ रुपए शामिल हैं।



फर्जी बिलों से निकाली गई रकम

जांच एजेंसी के मुताबिक यह राशि वास्तविक कर्मचारियों तक पहुंचने के बजाय फर्जी और बढ़े हुए बिलों के जरिए निकाली गई। आरोप है कि इस रकम का उपयोग अधिकारियों और सिंडिकेट को कमीशन देने तथा संबंधित कंपनियों के आर्थिक लाभ के लिए किया गया। EOW का कहना है कि ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त कार्य दिवसों की बिलिंग उदय राव के कहने पर तैयार की जाती थी।



अनवर ढेबर तक पहुंचता था कमीशन

विवेचना में यह भी सामने आया है कि अतिरिक्त भुगतान से मिलने वाले कमीशन के समन्वय का काम अरूणपति त्रिपाठी के जरिए किया जाता था और रकम आगे अनवर ढेबर तक पहुंचती थी। जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेयरिंग और पैसों के प्रवाह की जांच कर रही है।



ए-टू-जेड को ही मिला 34 करोड़ से ज्यादा

दस्तावेजों के मुताबिक ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड को अकेले करीब 34.07 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान हुआ। इसमें ओवरटाइम मद में 18.34 करोड़ रुपए, बोनस में 1.85 करोड़ रुपए, चार अतिरिक्त कार्य दिवसों के भुगतान में 11.06 करोड़ रुपए और सर्विस चार्ज व टैक्स के रूप में करीब 2.81 करोड़ रुपए शामिल हैं।



पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां

इस मामले में पूर्व में नीरज कुमार चौधरी, अजय लोहिया, अजीत दरंदले, अमित प्रभाकर सालुंके, अमित मित्तल, राजीव द्विवेदी और संजीव जैन को गिरफ्तार किया जा चुका है। EOW को इन आरोपियों से पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर उदय राव की भूमिका के अहम सबूत मिले थे।



भ्रष्टाचार अधिनियम और IPC की धाराओं में जांच

मामले की जांच दो वर्ष से EOW और एंटी करप्शन ब्यूरो कर रहे हैं। प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7(बी), 8 तथा IPC की धारा 467, 468, 471 और 120-बी के तहत अपराध दर्ज है। गिरफ्तार उदय राव को विशेष न्यायालय में पेश किया जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि मामले में आगे भी कई अहम खुलासे हो सकते हैं।



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