छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी, बीजेपी सरकार में हर महीने बढ़े 17 हजार बेरोजगार, महज 400 को मिली नौकरी

Aman Vaishnav | Feb 16, 2026, 16:09 IST
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छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। पिछले दो सालों में बेरोजगारी की संख्या 4 लाख से ज्यादा बढ़ चुकी है। कुल मिलाकर अब प्रदेश में करीब 15 लाख युवा बेरोजगार हैं।

News In Short

  • छत्तीसगढ़ में बेरोजगारों की संख्या 15 लाख से ज्यादा हो गई है।
  • 2 साल में छत्तीसगढ़ में 4 लाख बेरोजगार बढ़ गए हैं।
  • सरकार के पास रोजगार का प्रभावी मॉडल नहीं है।
  • रोजगार मंत्री के जिले में ही 88 हजार बेरोजगार हैं।

News In Detail

रायपुर: छत्तीसगढ़ में 15 लाख युवाओं के पास कोई काम नहीं है। बीजेपी सरकार में हर महीने 17 हजार बेरोजगार बढ़े हैं। इनमें से सरकार 400 लोगों को ही रोजगार दे पाई है। प्रदेश में जब बीजेपी ने सत्ता संभाली थी तब बेरोजगारों की संख्या 11 लाख 39 हजार 656 थी। यह आंकड़ा अप्रैल 2024 का पंजीयन कार्यालय में रजिस्टर्ड युवाओं का है। इसके करीब दो साल बाद यानी दिसंबर 2025 में यह संख्या 15 लाख 47 हजार 857 हो गई है।



यानी दो साल में बेरोजगारों की संख्या 4 लाख से ज्यादा हो गई है। जिस हिसाब से बेरोजगारों की संख्या बढ़ी है उस तरह से छत्तीसगढ़ सरकार कोई रोजगार मॉडल नहीं बना पाई है। रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के जिले में 88 हजार से ज्यादा बेरोजगार हैं। 'द सूत्र' यह इसलिए बता रहा है क्योंकि राज्य सरकार का तीसरा बजट आने वाला है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी के सूटकेस से निकलने वाले प्रभावी रोजगार मॉडल का इन युवाओं को बेसब्री से इंतजार है।



15 लाख के पास कोई काम नहीं

छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी लगातार एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौती बनती जा रही है। प्रदेश में इस समय करीब 15 लाख युवा बेरोजगार हैं। ये रोजगार की तलाश में पंजीयन कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार जब प्रदेश में बीजेपी सरकार ने सत्ता संभाली थी, उस समय बेरोजगारों की संख्या 11 लाख 39 हजार 656 थी। यह आंकड़ा अप्रैल 2024 का है, जो रोजगार पंजीयन कार्यालय में दर्ज युवाओं पर आधारित है।



करीब दो साल बाद दिसंबर 2025 तक यह संख्या बढ़कर 15 लाख 47 हजार 857 हो गई है। इसका मतलब है कि महज दो वर्षों में प्रदेश में 4 लाख से अधिक युवा बेरोजगारों की सूची में जुड़ गए। बीजेपी सरकार की बेरोजगार सूची में हर महीने 17 हजार नए बेरोजगार जुड़ रहे हैं। हर महीने सिर्फ 400 लोगों को ही नौकरी मिल पा रही है।



बेरोजगारी की रफ्तार देखते हुए यह साफ है कि राज्य सरकार अब तक कोई ठोस और प्रभावी रोजगार मॉडल तैयार करने में सफल नहीं हो पाई है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बेरोजगारी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।



खास बात यह है कि रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के जिले रायपुर में ही 88 हजार से ज्यादा युवा बेरोजगार हैं। यह आंकड़ा सरकार की रोजगार योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करता है। अब सरकार का तीसरा बजट आने वाला है। युवाओं को इंतजार है कि वित्त मंत्री ओपी चौधरी के सूटकेस से कौन सा रोजगार मॉडल निकलता है।



फैक्ट फाइल



साल 2024 में बेरोजगार- 11 लाख 39 हजार 656



साल 2026 में बेरोजगार- 15 लाख 47 हजार 857



इस दौरान बेरोजगार बढ़े- 4 लाख 08 हजार 201



दो साल में नौकरी पाने वाले- 9 हजार 463



हर महीने बढ़े बेरोजगार- 17 हजार



हर महीने नौकरी मिली- 400



बेरोजगारी में टॉप 10 जिले...



दुर्ग- 1 लाख 7031



बिलासपुर- 1 लाख 0373



रायपुर- 87 हजार 855



राजनांदगांव- 84 हजार 903



बालोद- 88 हजार 982



जांजगीर चांपा- 95 हजार 907



जशपुर- 52 हजार 960



कबीरधाम- 50 हजार 151



धमतरी- 66 हजार 719



महासमुंद- 58 हजार 051



कुल बेरोजगार- 15 लाख 47 हजार 857



स्थानीय लोगों को रोजगार देने में कोताही

छत्तीसगढ़ का कोयला हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। रायगढ़ के तमनार इलाके में गारे पेलमा कोल ब्लॉक से सबसे ज्यादा कोयला निकाल रही हैं। यह कंपनियां स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने में भी कोताही बरत रही हैं।



जबकि सरकार की औद्योगिक नीति में स्थानीय रोजगार की शर्त लगाई गई है। 'द सूत्र' ने कुछ बड़ी पॉवर कंपनियों में स्थानीय रोजगार की पड़ताल की तो असली स्थिति सामने आई। महाजेनको, जिंदल और अंबुजा जैसी बड़ी कंपनियों में करीब 2 हजार लोगों को ही काम दिया गया है।



इन कंपनियों ने इतनों को दिया रोजगार

कंपनी का नामनौकरियों की संख्या
महाराष्ट्र विद्युत उत्पादन कंपनी (महाजेनको)21
छत्तीसगढ़ पॉवर जनरेशन कार्पोरेशन217
जिंदल पॉवर181
जिंदल पॉवर 2143
हिंडाल्को इंडस्ट्रीज301
जिंदल स्टील128
सारडा एनर्जी142
अंबुजा सीमेंट1142

निष्कर्ष

विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। औद्योगिक निवेश की धीमी गति, सरकारी भर्तियों में देरी इसका कारण है। साथ ही निजी क्षेत्र में नए अवसरों की कमी और कौशल विकास योजनाओं का अपेक्षित परिणाम न दे पाना प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं। युवाओं का कहना है कि सरकार की घोषणाएं कागजों तक सीमित रह गई हैं। जमीनी स्तर पर रोजगार के अवसर नहीं दिख रहे हैं।



अब आगे क्या

यह मुद्दा इसलिए भी अहम हो जाता है, क्योंकि राज्य सरकार का तीसरा बजट जल्द ही पेश होने वाला है। वित्त मंत्री के बजट सूटकेस से निकलने वाले फैसलों पर लाखों बेरोजगार युवाओं की निगाहें टिकी हैं। युवा वर्ग को इससे बहुत उम्मीद है। इस बार बजट में सिर्फ घोषणाएं नहीं बल्कि ठोस, व्यावहारिक और समयबद्ध रोजगार मॉडल सामने आएगा।



Sootr Knowledge

प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी न केवल आर्थिक समस्या है, बल्कि इसका सीधा असर सामाजिक स्थिरता और युवाओं के भविष्य पर भी पड़ रहा है। जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। अब देखना यह होगा कि आगामी बजट में सरकार बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।



सरकार रोजागार मॉडल निवेश पर आधारित है लेकिन उम्मीद के अनुरुप प्रदेश में निवेश नहीं आ पा रहा है। सरकार की कोशिशें बहुत हैं, लेकिन वे कंपनियों के वादे के बाद भी परवान नहीं चढ़ पा रही हैं। दो साल में सरकार महज 9 हजार लोगों को ही रोजगार दे पाई है। अब सरकार को रोजगार का कोई ठोस उपाय सोचना होगा। ऐसा नहीं हुआ तो यही बेरोजगार बड़ी समस्या बन जाएंगे।



Important Points

  • छत्तीसगढ़ में बेरोजगारों की संख्या 15 लाख के पार हुई। दो साल में 4 लाख से ज्यादा युवाओं की बढ़ोतरी हुई है।
  • बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद बेरोजगारों में इजाफा हुआ है। अप्रैल 2024 से दिसंबर 2025 तक बड़ा उछाल आया है।
  • रोजगार मंत्री के जिले में ही 88 हजार से ज्यादा बेरोजगार हैं।
  • सरकार अब तक प्रभावी रोजगार मॉडल तैयार करने में नाकाम हुईू है।
  • तीसरे बजट से बेरोजगार युवाओं को बड़ी उम्मीदें हैं। युवाओं को ठोस और व्यावहारिक फैसलों का इंतजार है।

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