वेदांता ब्लास्ट : तीन महीने बाद रिपोर्ट तैयार, अब एक्शन की बारी
समझें क्या है पूरा मामला
Raipur। सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण विस्फोट में 25 मजदूरों की मौत के करीब तीन महीने बाद भी जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। हादसे की जांच को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस बीच राहत की बात यह है कि बिलासपुर संभाग के कमिश्नर और दिल्ली से आई केंद्रीय विशेषज्ञ टीम अपनी जांच पूरी कर चुकी है। दोनों रिपोर्ट अगले सप्ताह राज्य सरकार को सौंप दी जाएंगी। माना जा रहा है कि इन रिपोर्टो के आधार पर एफआईआर में नामजद अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा। दूसरी ओर, पुलिस अब भी विभिन्न विभागों की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
बिलासपुर संभाग के कमिश्नर सुनील कुमार जैन ने पुष्टि की है कि उनकी जांच रिपोर्ट पूरी हो चुकी है और अगले सप्ताह शासन को सौंप दी जाएगी। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल लॉग्स और विभिन्न विभागों से प्राप्त दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है, ताकि कोई तथ्य छूट न जाए।
वहीं हादसे के बाद बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय बॉयलर बोर्ड (CBB) और उद्योग संवर्धन विभाग ने सात सदस्यीय केंद्रीय विशेषज्ञ टीम गठित की थी। इस टीम में भेल (BHEL) और एनटीपीसी (NTPC) के वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक टीम की जांच भी पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट तैयार है और उस पर औपचारिक हस्ताक्षर होने बाकी हैं। यह रिपोर्ट भी अगले सप्ताह सरकार को सौंप दी जाएगी।
प्रारंभिक जांच में सामने आई गंभीर खामियां
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार शुरुआती तकनीकी जांच में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्लांट में अधिक बिजली उत्पादन और मुनाफे के दबाव में बॉयलर को निर्धारित सीमा से अधिक दबाव पर चलाया जा रहा था। बॉयलर के भीतर ईंधन का अत्यधिक जमाव भी पाया गया।
सबसे गंभीर तथ्य यह बताया गया कि हादसे से दो दिन पहले सुरक्षा प्रणाली ने अलार्म दिया था और ट्रिपिंग की समस्या भी सामने आई थी। इसके बावजूद प्लांट बंद करने के बजाय अस्थायी बाईपास सिस्टम के सहारे उत्पादन जारी रखा गया। जांच में यह भी उल्लेख है कि वेंटिलेशन और आपातकालीन निकास मार्ग मलबे व कबाड़ से बाधित थे, जिससे विस्फोट के समय कई मजदूर बाहर नहीं निकल सके।
पुलिस जांच अब भी अधूरी
उधर, आपराधिक जांच अभी भी पूरी नहीं हो सकी है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल के नेतृत्व में गठित विशेष फोरेंसिक और पुलिस टीम विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। पंकज पटेल का कहना है कि फोरेंसिक, श्रम विभाग और अन्य एजेंसियों से कई महत्वपूर्ण इनपुट अभी मिलने बाकी हैं।
सभी रिपोर्ट मिलने के बाद ही पुलिस अपनी अंतिम जांच पूरी कर सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्ट कब तक आएगी, इसके बारे में अभी समय-सीमा बताना संभव नहीं है। वहीं डभरा थाना पुलिस का कहना है कि अंतिम तकनीकी और फोरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद ही आपराधिक मामले में आगे की कार्रवाई तेज होगी।
देरी पर उठ रहे सवाल
हादसे के बाद प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के संकेत मिलने के बावजूद अंतिम रिपोर्ट आने में हुई देरी पर विपक्ष, श्रमिक संगठनों और पीड़ित परिवारों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि तीन महीने बीत जाने के बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं होना और कार्रवाई का लंबा इंतजार न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
एफआईआर दर्ज, लेकिन कार्रवाई बाकी
सक्ती पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106, 289 और 3(5) के तहत वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। हालांकि अब तक किसी के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं हुई है। सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब सरकार के फैसले पर नजर
अब पूरे मामले में निगाहें अगले सप्ताह सरकार के पास पहुंचने वाली दोनों अहम जांच रिपोर्टो पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रिपोर्ट के आधार पर हादसे की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होगी, क्या रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी और क्या एफआईआर में नामजद अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू होगी। इन सवालों के जवाब का इंतजार केवल पीड़ित परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा प्रदेश कर रहा है।
IMP FACTS
हादसे की तारीख: 14 अप्रैल
स्थान: सिंघीतराई, सक्ती जिला, छत्तीसगढ़
प्लांट: वेदांता पावर प्लांट
मौतों की संख्या: 25 मजदूर
जांच अवधि: करीब 3 महीने बाद रिपोर्ट तैयार
जांच एजेंसी: बिलासपुर संभाग कमिश्नर और केंद्रीय विशेषज्ञ टीम
केंद्रीय टीम: 7 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम
तकनीकी विशेषज्ञ: BHEL और NTPC के वरिष्ठ अधिकारी
एफआईआर धाराएं: BNS धारा 106, 289 और 3(5)
एफआईआर में नाम: अनिल अग्रवाल, देवेंद्र पटेल समेत अन्य अधिकारी
मुख्य जांच बिंदु: बॉयलर दबाव, सुरक्षा प्रणाली, तकनीकी लापरवाही
प्रारंभिक खामी: सुरक्षा अलार्म और ट्रिपिंग के बाद भी उत्पादन जारी रहा
पुलिस जांच स्थिति: अंतिम फोरेंसिक और तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार
आगे की कार्रवाई: जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिम्मेदारी तय होगी और कार्रवाई संभव है।
FAQ
- वेदांता पावर प्लांट ब्लास्ट हादसा कब और कहां हुआ था?
यह हादसा 14 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुआ था। - वेदांता प्लांट हादसे में कितने लोगों की मौत हुई थी?
इस भीषण विस्फोट में 25 मजदूरों की मौत हुई थी। - हादसे की जांच में अब तक क्या सामने आया है?
शुरुआती जांच में बॉयलर पर अधिक दबाव, सुरक्षा प्रणाली में लापरवाही और तकनीकी खामियों के संकेत मिले हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
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