वेदांता प्लांट हादसा ; 17 मौतों पर प्रदेश में सियासी भूचाल, कांग्रेस ने कहा- यह हादसा नहीं, हत्या है
NEWS IN SHORT
- वेदांता प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट, 17 मजदूरों की मौत।
- दीपक बैज का आरोप, यह हादसा नहीं 'हत्या' है।
- कांग्रेस ने बनाई नौ सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी।
- परिजनों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग।
- मशीनों की रिपेयरिंग और सुरक्षा में भारी लापरवाही उजागर।
NEWS IN DETAIL
सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट (vedanta plant blast) में हुआ भीषण हादसा प्रदेश की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में से एक बनकर उभरा है। इस घटना ने न केवल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े किए हैं, बल्कि प्रदेश की सियासत में भी उबाल ला दिया है।
लापरवाही की भेंट चढ़ीं 17 जिंदगियां
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल (मंगलवार) की दोपहर एक भीषण बॉयलर ब्लास्ट हुआ। इस धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि अब तक कुल 17 मजदूरों की मौत हो चुकी है। हादसे के वक्त प्लांट में मौजूद मजदूर बुरी तरह झुलस गए। आंकड़ों के अनुसार, 4 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि अन्य ने रायगढ़ मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और रायपुर के निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान दम तोड़ा। वर्तमान में 17 घायल मजदूर अब भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
विपक्ष का हमला: 'यह हादसा नहीं, हत्या है'
इस दर्दनाक घटना के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने सरकार और प्लांट प्रबंधन को आड़े हाथों लिया है।
दीपक बैज (PCC चीफ): बैज ने इस घटना को 'हत्या' करार देते हुए मृतकों के परिजनों के लिए 1 करोड़ रुपये और घायलों के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है।
टीएस सिंहदेव (पूर्व डिप्टी सीएम): उन्होंने प्लांट में एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुरक्षा सुविधाओं के अभाव पर सवाल उठाए और इसे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बताया।
रामकुमार यादव (विधायक, चंद्रपुर): विधायक यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वेदांता ने इस पुराने प्लांट को औने-पौने दाम में खरीदा था और बिना मशीनों की सही रिपेयरिंग किए, क्षमता से अधिक काम लिया जा रहा था, जिससे यह ब्लास्ट हुआ।
प्रबंधन और सरकार की कार्रवाई
हादसे के बाद प्रशासन और सरकार हरकत में आए हैं:
मजिस्ट्रियल जांच: कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं।
श्रम मंत्री का आश्वासन: श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी दुख व्यक्त करते हुए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मुआवजे की घोषणाएं
पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए केंद्र, राज्य और प्रबंधन ने अलग-अलग राहत राशियों का ऐलान किया है:
वेदांता प्रबंधन: मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये और नौकरी, जबकि घायलों को 15 लाख रुपये देने का वादा किया है।
मुख्यमंत्री सहायता: राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को 5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की है।
प्रधानमंत्री राहत कोष (PMNRF): मृतकों के लिए 2 लाख और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है।
कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी
जमीनी हकीकत जानने के लिए कांग्रेस ने 9 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के नेतृत्व में यह टीम ग्राउंड जीरो पर जाकर पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों से मुलाकात करेगी। समिति यह जांच करेगी कि क्या सुरक्षा नियमों की जानबूझकर अनदेखी की गई थी।
सुरक्षा पर उठते सवाल
कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत ने याद दिलाया कि वेदांता के संयंत्रों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इनके कोरबा स्थित प्लांट में चिमनी हादसे जैसी बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। यह सवाल अब सार्वजनिक हो चुका है कि आखिर बार-बार होने वाले इन औद्योगिक हादसों के लिए जिम्मेदार कौन है?
निष्कर्ष
सक्ती पावर प्लांट हादसा औद्योगिक सुरक्षा मानकों की पोल खोलता है। मृतकों में अधिकांश मजदूर यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों के प्रवासी थे, जो रोजी-रोटी की तलाश में यहाँ आए थे। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद क्या वाकई बड़े अधिकारियों और प्रबंधन पर गाज गिरती है या यह मामला भी पुरानी फाइलों की तरह दब कर रह जाता है।
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