वेदांता प्लांट हादसा ; मौत का आंकड़ा 24 पहुंचा, दिल्ली की स्पेशल टीम ने संभाली जांच की कमान
NEWS IN SHORT
- मौत का आंकड़ा 24 पहुंचा, दिल्ली की टीम जांच में जुटी।
- केंद्र और राज्य की टीमें करेंगी तकनीकी जांच, रिपोर्ट जल्द।
- 24 मजदूरों की मौत, 30 दिन में आएगी विस्तृत रिपोर्ट।
- भेल और एनटीपीसी के इंजीनियरों ने संभाला मोर्चा।
- औद्योगिक सुरक्षा पर उठे सवाल, दोषियों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 14 अप्रैल को हुई इस हृदयविदारक घटना में रविवार सुबह एक और घायल मजदूर की मौत के साथ अब कुल मृतकों की संख्या 24 हो गई है। दम तोड़ने वाले मजदूर का इलाज रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में चल रहा था।
हादसे की भयावहता और घायलों की स्थिति
इस भीषण विस्फोट में कुल 36 मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए थे। वर्तमान में 12 घायलों का इलाज जारी है, जिनमें से कुछ की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है। मृतकों में पश्चिम बंगाल के सुभ्रत कुमार जेना और झारखंड के भूपेंद्र शाह जैसे श्रमिक शामिल हैं, जो रोजी-रोटी की तलाश में यहां आए थे। प्रशासन का दावा है कि घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा दी जा रही है, लेकिन लगातार बढ़ते मौत के आंकड़ों ने परिजनों में भारी आक्रोश और शोक पैदा कर दिया है।
केंद्र और राज्य की सक्रियता
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
राज्य स्तरीय जांच : बिलासपुर संभाग के कमिश्नर सुनील जैन को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी।
केंद्रीय तकनीकी टीम: केंद्र सरकार की ओर से सात सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम शनिवार को प्लांट पहुंची। इसमें सेंट्रल बॉयलर बोर्ड (CBB) और DPIIT के निर्देश पर BHEL (भेल) और NTPC के अनुभवी इंजीनियर शामिल हैं। यह टीम बॉयलर के डिजाइन, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
प्रारंभिक जांच में तकनीकी खामी के संकेत
विशेषज्ञों और बॉयलर एक्सपर्ट उज्जवल गुप्ता के अनुसार, प्राथमिक तौर पर यूनिट-1 के स्टीम पाइप से जुड़े वाटर सप्लाई पाइप के जॉइंट में खराबी को ब्लास्ट का कारण माना जा रहा है। टीम सेफ्टी वाल्व और मेंटेनेंस रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि क्या समय पर सुरक्षा ऑडिट किया गया था या नहीं।
सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवाल
वेदांता प्लांट हादसा न केवल एक औद्योगिक दुर्घटना है, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा (Industrial Safety) के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान भी है। 24 जिंदगियों की मौत ने सुरक्षा ऑडिट की पोल खोल दी है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी या प्रबंधन का हिस्सा हो, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
वेदांता प्लांट का यह भीषण हादसा औद्योगिक सुरक्षा में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। 24 श्रमिकों की मौत ने सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। अब 30 दिनों के भीतर आने वाली जांच रिपोर्ट और दोषियों पर होने वाली सख्त कार्रवाई ही पीड़ित परिवारों को न्याय दिला पाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।
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