छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले में कार्रवाई से लेकर शिक्षकों की टीईटी तक, सियासत और सिस्टम पर उठे सवाल
भर्ती परीक्षाओं के स्थगित होने से युवाओं की चिंता बढ़ी। इसी बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर दौरा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की बिलासपुर में संगठनात्मक बैठकें भी सुर्खियों में रहीं। आइए, नजर डालते हैं इस सप्ताह प्रदेश की प्रमुख खबरों और उनके मायनों पर।
1. शराब घोटाले में नया मोड़, 20 व्यक्तियों और 22 कंपनियों पर आरोप
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) और एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 20 व्यक्तियों और 22 फर्मों व कंपनियों के खिलाफ दसवां चालान पेश किया। जांच एजेंसियों ने मामले में लगभग 27 हजार पृष्ठों के दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए हैं। एजेंसी ने घोटाले से संबंधित विभिन्न मदों की राशि 3,076.34 करोड़ रुपये आंकी है। मामले में आबकारी विभाग के अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव को भी निलंबित किया गया। इस कार्रवाई ने शराब कारोबार में अनियमितताओं और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है।
2. खेल विभाग की खरीदी में बिलों का खेल, टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
खेल विभाग में खेल सामग्री की खरीदी और सेवाओं के भुगतान को लेकर गंभीर सवाल उठे। सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, एक ही दिन में जूडो, खो-खो और कबड्डी की सामग्री के लिए अलग-अलग बिल जारी किए गए। इन पांच बिलों की कुल राशि लगभग 14.85 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा, वेटलिफ्टिंग उपकरणों की खरीदी और हॉकी टर्फ की सफाई के लिए किए गए भुगतान भी चर्चा में हैं। आरोप है कि खरीदी को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर निविदा प्रक्रिया से बचने की कोशिश की गई। यदि जांच में ऐसा साबित होता है, तो यह वित्तीय पारदर्शिता और सरकारी खरीद नियमों के पालन से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
3. 80 हजार शिक्षकों को विशेष टीईटी की उम्मीद
प्रदेश के लगभग 80 हजार सेवारत शिक्षकों के लिए इस सप्ताह राहत भरी खबर आई। राज्य सरकार ने कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने पर सहमति दी है। परीक्षा छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल के माध्यम से कंप्यूटर आधारित पद्धति से आयोजित की जाएगी। सरकार ने वर्ष में कम से कम दो बार परीक्षा कराने के निर्देश भी दिए हैं। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता से बड़ी संख्या में सेवारत शिक्षकों की नौकरी और पदोन्नति का भविष्य जुड़ा है।
4. भर्ती परीक्षाओं ने बढ़ाई युवाओं की चिंता
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सप्ताह पूरी तरह राहत भरा नहीं रहा। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सूबेदार, उप निरीक्षक संवर्ग और प्लाटून कमांडर मुख्य परीक्षा-2024 स्थगित कर दी। परीक्षा पहले नवंबर में प्रस्तावित थी। दूसरी ओर, शिक्षक भर्ती को लेकर भी न्यायिक प्रक्रिया और आरक्षण संबंधी विवादों के कारण अनिश्चितता बनी रही। दिव्यांग अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर देने की प्रक्रिया ने कुछ राहत जरूर दी, लेकिन भर्ती कैलेंडर और परीक्षा की निश्चित तारीखों को लेकर सवाल कायम हैं। युवाओं की मांग है कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के साथ समयबद्धता भी सुनिश्चित की जाए।
5. मोहन भागवत के दौरे से आरएसएस के पुनर्गठन की चर्चा तेज
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का 22 और 23 अक्टूबर को बिलासपुर प्रवास भी राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा का विषय रहा। इस दौरान बौद्धिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक बैठकों के जरिए कार्य विस्तार तथा भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ। इसी बीच, छत्तीसगढ़ में संघ के मौजूदा प्रांतीय ढांचे को रायपुर और बिलासपुर केंद्रित दो इकाइयों में बांटने की संभावना की चर्चा सामने आई। यदि पुनर्गठन होता है, तो इसे प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाएगा।
6. राष्ट्रपति का बस्तर दौरा, आदिवासी संस्कृति पर देश की नजर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का छत्तीसगढ़ प्रवास सप्ताह की प्रमुख घटनाओं में शामिल रहा। 22 अक्टूबर को रायपुर में कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद 23 अक्टूबर को उनका जगदलपुर दौरा निर्धारित था। इस दौरान मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन, पारंपरिक मुरिया दरबार में सहभागिता और लालबाग मैदान में कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण रहे। राष्ट्रपति का बस्तर दशहरा से जुड़ना आदिवासी परंपराओं और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर है। हालांकि, बस्तर की पहचान केवल संस्कृति तक सीमित नहीं है। विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और दूरस्थ क्षेत्रों तक प्रशासनिक सुविधाएं पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
7. पटवारियों की हड़ताल और प्रशासनिक व्यवस्था पर दबाव
अपनी मांगों को लेकर पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने राजस्व संबंधी कामकाज पर असर पड़ने की आशंका बढ़ाई। शासन और कर्मचारी संगठन के बीच बातचीत से ठोस समाधान नहीं निकलने के बाद गतिरोध बना रहा। पटवारी राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण और जमीन से जुड़े अनेक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में हड़ताल लंबी खिंचने पर आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अब निगाहें सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर हैं।
इस सप्ताह का संदेश
छत्तीसगढ़ में इस सप्ताह सरकार और प्रशासन के सामने जवाबदेही, पारदर्शिता तथा जनसुविधाओं से जुड़े कई सवाल खड़े हुए। शराब घोटाले की जांच और खेल विभाग की खरीदी पर उठे सवाल सरकारी तंत्र की निगरानी की जरूरत बताते हैं। शिक्षकों की टीईटी और भर्ती परीक्षाओं की अनिश्चितता युवाओं तथा कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ी है। वहीं, राष्ट्रपति का बस्तर दौरा प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का अवसर बना।