छत्तीसगढ़ के राज्योत्सव के मंच पर सियासत, धान खरीदी से पहले पटवारियों से टकराव और 2300 नौकरियों के इंतजार में युवा

Arun Tiwari | Nov 07, 2026, 11:56 IST
छत्तीसगढ़ की चिट्ठी
Chhattisgarh witnessed a week of major developments, from State Foundation Day celebrations and farmers' concerns to protests, recruitment demands and the Mahadev betting app investigation.
छत्तीसगढ़ ने अपना 26वां स्थापना दिवस मनाया। नवा रायपुर में तीन दिन तक राज्योत्सव की रौनक रही। समापन समारोह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे तो मंच से नक्सलवाद, विकास और कांग्रेस की राजनीति पर खूब बातें हुईं। सरकार ने किसानों को धान खरीदी की तैयारी का भरोसा दिया, लेकिन दूसरी तरफ पटवारियों की हड़ताल ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

रायपुर में 2300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का गुस्सा शिक्षा मंत्री के बंगले तक पहुंच गया। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी स्वास्थ्य भवन का घेराव किया। अदालत ने दिव्यांगजनों के आश्रय गृहों की बदहाल व्यवस्था पर सरकार से जवाब मांगा। महादेव सट्टा ऐप के आरोपी सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी ने पुराने राजनीतिक विवादों को फिर हवा दे दी।



राज्योत्सव में विकास का दावा, अमित शाह के भाषण से गरमाई सियासत

छत्तीसगढ़ की स्थापना के 26 साल पूरे होने पर 1 से 3 नवंबर तक नवा रायपुर में राज्योत्सव आयोजित हुआ। इस वर्ष आयोजन की थीम 'सशक्त नारी, युवा उड़ान' रखी गई। लोक कलाकारों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सरकारी योजनाओं की प्रदर्शनी के बीच 3 नवंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने समापन समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने 36 विभूतियों और संस्थाओं को राज्य अलंकरण से सम्मानित किया। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से बाहर निकलकर शांति और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर नक्सलवाद को संरक्षण देने के आरोप लगाए और राहुल गांधी की राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने नवा रायपुर को पीपल सिटी बनाने के लिए पांच लाख पीपल के पेड़ लगाने की योजना का जिक्र किया। हालांकि, राज्योत्सव के दौरान ही सरकारी कर्मचारियों और राशन दुकानदारों को समापन समारोह में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के आदेश पर विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस ने इसे भीड़ जुटाने का सरकारी प्रयास बताया, जबकि भाजपा ने इसे आयोजन की व्यवस्था का हिस्सा बताया।




धान खरीदी की उलटी गिनती, लेकिन पटवारी हड़ताल बनी सबसे बड़ी चुनौती

प्रदेश में 15 नवंबर से खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान खरीदी शुरू होनी है। सरकार ने 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदने की व्यवस्था की है। इस बार 27.50 लाख से अधिक किसानों से खरीदी का अनुमान है। 360 नए केंद्र खोलने के बाद कुल केंद्रों की संख्या 3100 हो जाएगी। किसानों को 10 नवंबर से 'तुंहर टोकन' ऐप के माध्यम से टोकन लेने की सुविधा देने की तैयारी है। लेकिन खरीदी से ठीक पहले 13 अक्टूबर से जारी पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल सरकार के लिए परेशानी बन गई है। पटवारी पीवी ऐप की तकनीकी दिक्कतों, वेतन विसंगति और पदोन्नति सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 150 से अधिक पटवारियों को निलंबित किया गया है और एक हजार से अधिक को ब्रेक इन सर्विस के नोटिस जारी किए गए हैं। बिलासपुर और सरगुजा संभाग में बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए गए हैं। पटवारी संघ का आरोप है कि नेटवर्क, सर्वर और तकनीकी प्रशिक्षण की कमी के बावजूद डिजिटल सत्यापन का दबाव बनाया जा रहा है। इस टकराव का सबसे बड़ा नुकसान किसानों को हो सकता है। डिजिटल क्रॉप सर्वे, गिरदावरी, एग्रीस्टैक और किसान अभिलेखों का सत्यापन प्रभावित होने से धान बेचने की प्रक्रिया में दिक्कत आ सकती है।



महादेव सट्टा ऐप : सौरभ चंद्राकर की वापसी से खुलेंगे पुराने राज?

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में बड़ी कार्रवाई हुई। सरगना सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पण के बाद 1 नवंबर को भारत लाया गया। सीबीआई की टीम उसे दिल्ली से रायपुर लेकर पहुंची। 4 नवंबर को रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत ने उसे आठ दिन की सीबीआई हिरासत में भेजने की अनुमति दी। अगली पेशी 12 नवंबर को निर्धारित है। ईडी ने भी उसकी हिरासत की मांग की है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, महादेव सट्टा नेटवर्क के जरिए हजारों करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। हवाला और विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से रकम इधर-उधर करने के आरोप हैं। बचाव पक्ष ने प्रत्यर्पण की शर्तों का हवाला देते हुए सीबीआई की कार्रवाई पर कानूनी आपत्ति उठाई है। इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने 13 एफआईआर सीबीआई को सौंपी थीं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पूछताछ में कथित संरक्षण, पैसों के लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में क्या सामने आता है।




321 दिन का इंतजार, 2300 पदों के लिए मंत्री के बंगले तक पहुंचे युवा

रायपुर में 5 नवंबर को डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन फिर चर्चा में आ गया। 400 से अधिक अभ्यर्थी अपने परिजनों के साथ स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास पहुंचे और सहायक शिक्षक के 2300 पदों पर नियुक्ति की मांग की। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे 321 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन नियुक्ति की तारीख घोषित नहीं हुई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अभ्यर्थियों को हटाकर बसों से तूता धरना स्थल भेजा। यह मामला केवल भर्ती का नहीं, बल्कि प्रदेश के उन युवाओं की उम्मीदों का है, जो वर्षों की पढ़ाई और प्रशिक्षण के बाद सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सरकार को रिक्त पदों की वास्तविक स्थिति और नियुक्ति प्रक्रिया पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।



स्वास्थ्य भवन का घेराव, आठ महीने के इंसेंटिव का मुद्दा

स्वास्थ्य विभाग में भी असंतोष सामने आया। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन का घेराव किया। प्रदेशभर से सैकड़ों सीएचओ पहुंचे। संघ का आरोप है कि सात से आठ महीने की प्रोत्साहन राशि लंबित है। अधिकारियों ने भुगतान में पारदर्शिता, कार्यदायित्व तय करने और अनुचित कार्रवाई रोकने की मांग की। सीएचओ ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं का असर अंततः आम मरीजों पर पड़ सकता है। विभाग को कर्मचारियों की मांगों और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं, दोनों को गंभीरता से लेना होगा।




दिव्यांग आश्रय गृहों की व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त

स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सामने आया। रायपुर और बिलासपुर के घरौंदा केंद्रों की जांच रिपोर्ट में पांच लोगों की मौत, चिकित्सा निगरानी की कमी और कई व्यवस्थागत खामियों का उल्लेख किया गया। मृतकों में चार वयस्क महिलाएं और पांच साल का एक बच्चा शामिल था। डॉक्टरों की निर्धारित साप्ताहिक विजिट के बजाय महीने में केवल एक-दो बार आने, चौबीस घंटे नर्सिंग सुविधा के रिकॉर्ड नहीं मिलने और बिलासपुर केंद्र में एक निवासी को बिस्तर से बांधकर रखने जैसी बातें सामने आईं। हालांकि, जांच आयुक्त की रिपोर्ट ने मौतों के मामले में लापरवाही या दोष का अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से दो सप्ताह में विस्तृत जवाब मांगा है।



यह मामला बताता है कि सरकारी योजनाओं के तहत आश्रय देना पर्याप्त नहीं है। वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा, इलाज और सम्मान भी सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।



कर्मचारियों को डीए की राहत, युवाओं के लिए 1501 नौकरियां

इस सप्ताह कर्मचारियों के लिए भी राहत की खबर रही। राज्य सरकार ने महंगाई भत्ता और पेंशनरों की महंगाई राहत दो प्रतिशत बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी। यह वृद्धि 1 नवंबर से लागू हुई। इससे करीब 3.85 लाख कर्मचारी और 1.50 लाख पेंशनर लाभान्वित होंगे। सरकार पर सालाना करीब 432 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा। वहीं, प्रदेश की तीनों बिजली कंपनियों में 1501 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी हुआ है। इनमें सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, डाटा एंट्री ऑपरेटर, अटेंडेंट और अन्य पद शामिल हैं। आवेदन 6 नवंबर से 26 नवंबर तक ऑनलाइन किए जा सकते हैं।




इस सप्ताह की चिट्ठी का निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में एक तरफ सरकार 26 साल के विकास का उत्सव मना रही है, दूसरी तरफ किसान, युवा, कर्मचारी और स्वास्थ्यकर्मी अपने-अपने सवाल लेकर सड़कों पर हैं। सरकार ने किसानों के लिए 3100 रुपये में धान खरीदी, कर्मचारियों के लिए डीए वृद्धि और युवाओं के लिए नई भर्ती जैसे फैसले किए हैं। लेकिन इन फैसलों की सफलता तभी मानी जाएगी, जब उनका लाभ जमीन पर दिखाई दे।



राज्योत्सव के मंच से विकास की बातें करना आसान है, लेकिन 321 दिन से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे युवाओं को जवाब देना, पटवारियों की हड़ताल सुलझाना और आश्रय गृहों में रह रहे दिव्यांगजनों को सुरक्षित जीवन देना भी उतना ही जरूरी है।

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