छत्तीसगढ़ में न्याय की नई तस्वीर, अदालतों में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी
RAIPUR : छत्तीसगढ़ की न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी एक नई और सकारात्मक तस्वीर पेश कर रही है। प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में अब बड़ी संख्या में महिलाएं न्यायिक जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। हालात ऐसे हैं कि निचली अदालतों में लगभग हर दूसरे पद पर महिला अधिकारी कार्यरत हैं। इसे न्याय व्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति और बदलते सामाजिक परिवेश का बड़ा संकेत माना जा रहा है। मदर्स डे पर बताते है किस तरह मां इंसाफ की जननी भी बनी है।
इंसाफ की मां:
प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में महिलाओं की यह मजबूत मौजूदगी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय प्रशासन की दिशा तय करने में भी उनकी अहम भूमिका दिखाई दे रही है। अदालतों में महिलाओं की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि अब बेटियां केवल पारंपरिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संवैधानिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में भी प्रभावी नेतृत्व निभा रही हैं और वे इंसाफ की जननी भी बन रही है।
आधे पदों पर महिलाएं:
जानकारी के अनुसार प्रदेश में हाई और लोअर जुडिशियरी को मिलाकर कुल 562 न्यायिक अधिकारी पदस्थ हैं। इनमें 261 महिलाएं हैं। यानी न्यायपालिका में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 46.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा देश के कई राज्यों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है और इसे न्यायिक क्षेत्र में लैंगिक संतुलन की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।
निचली अदालतों में ज्यादा संख्या:
सबसे उल्लेखनीय स्थिति लोअर जुडिशियरी में देखने को मिल रही है। यहां महिलाओं की भागीदारी पुरुष अधिकारियों के लगभग बराबर पहुंच चुकी है। आंकड़ों के मुताबिक लोअर जुडिशियल सर्विस के कुल 308 पदों में से 184 पदों पर महिला अधिकारी कार्यरत हैं। यानी इस स्तर पर करीब 59.7 प्रतिशत पद महिलाओं के पास हैं। यह स्थिति बताती है कि न्यायपालिका के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण स्तर पर महिलाओं की मजबूत उपस्थिति बन चुकी है।
हायर अदालतों में बढ़ती मौजूदगी:
वहीं हाई जुडिशियल सर्विस में भी महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इस श्रेणी के कुल 254 पदों में 77 महिला अधिकारी कार्यरत हैं। भले ही यहां संख्या अपेक्षाकृत कम हो, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उच्च न्यायिक पदों पर भी महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
क्या कहते हैं जानकार:
कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालतों में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति से न्यायिक प्रक्रिया अधिक संवेदनशील और संतुलित हुई है। खासकर महिलाओं, बच्चों और पारिवारिक मामलों से जुड़े प्रकरणों में महिला न्यायिक अधिकारियों की भूमिका काफी प्रभावी मानी जा रही है। इससे पीड़ित पक्ष को भी अपनी बात रखने में सहजता महसूस होती है।
सामाजिक दृष्टि से भी यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय तक न्यायपालिका को पुरुष प्रधान क्षेत्र माना जाता रहा, लेकिन अब महिलाओं ने अपनी क्षमता और मेहनत के दम पर इस धारणा को बदल दिया है। प्रदेश की न्यायपालिका में महिलाओं की यह बढ़ती हिस्सेदारी आने वाली पीढ़ी की बेटियों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
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