2023 में बन चुका है 33 फीसदी महिला आरक्षण का कानून, पूर्व मंत्री अकबर बोले, मनमाना परिसीमन करना चाहती थी सरकार
Raipur. महिला आरक्षण पर सियासत और तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र 30 अप्रैल को बुलाया जा रहा है। यह सत्र सिर्फ निंदा प्रस्ताव पास करने के लिए बुलाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि निंदा करने के लिए विशेष सत्र बुलाना सिर्फ सियासत है क्योंकि इसका कोई फर्क नहीं पड़ता।
पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने कहा कि बीजेपी जिस कानून पर राजनीति कर रही है वो तो 2023 में ही बन चुका है। इस बार तो सिर्फ मनमाने परिसीमन के लिए महिला आरक्षण के नाम पर विधेयक लाया गया था जो संसद में गिर गया।
2023 में बन चुका 33 फीसदी महिला आरक्षण कानून :
पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने बयान जारी कर कहा है कि लोकसभा में 131 वां संविधान संशोधन विधेयक पारित न हो पाने के बाद बीजेपी लोगों को गुमराह करना चाह रही है। महिला आरक्षण विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से 2023 को पारित हो चुका है। यही नहीं लोकसभा, विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का कानून बन चुका है।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में बीजेपी सरकार मनमाने परिसीमन करने की साजिश कर रही थी जो नाकाम हो गई। इसी बौखलाहट में वो गैर बीजेपी पर्टियों पर महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने देने का झूठा आरोप लगा रही है। जबकि महिला आरक्षण विधेयक साल 2023 में ही पारित हो चुका है।
विशेष सत्र की सियासत क्यों :
मोहम्मद अकबर (Mohammad Akbar) ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 174 के अनुसार विधानसभा का सत्र बुलाने की शक्ति राज्यपाल के पास है। लेकिन व्यवहार में यह निर्णय मंत्री परिषद की सलाह पर होता है। यदि सरकार चाहे तो किसी विशेष मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने की सिफारिश कर सकती है। सामान्यतः विशेष सत्र राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए होता है।
विश्वास मत का सवाल हो, बहुमत परीक्षण की जरुरत हो, बजट या अनुपूरक बजट पारित करने, प्राकृतिक आपदा या कानून व्यवस्था संकट या विशेष कानून पारित करने के लिए विशेष सत्र बुलाया जाता है। मामला बहुत गंभीर हो या तात्कालिक या राजनैतिक रूप से महत्वपूर्ण हो तो सरकार विशेष सत्र बुला सकती है। लेकिन गुमराह करने के लिए विशेष सत्र बुलाया जा रहा है।
निंदा करने की राजनीति :
अकबर ने कहा कि विधानसभा इसलिए है ताकि राज्य अपनी जनता के लिए अपने स्तर पर शासन चला सके और स्थानीय समस्याओं का समाधान कर सके। सामान्यतः निंदा प्रस्ताव नियमित सत्र में लाया जाता है और आमतौर पर विपक्ष द्वारा सरकार की नीतियों या कार्यों की आलोचना के लिए लाया जाता है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार बीजेपी सरकार विधानसभा का विषेश सत्र निंदा प्रस्ताव के लिए बुला रही है।
विधानसभा द्वारा पारित ऐसा कोई भी निंदा प्रस्ताव प्रतीकात्मक होता है। इसका कोई भी कानून पर बाध्यकारी प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन ये एक राजनैतिक संदेश देने की कोशिश है। अब छत्तीसगढ़ में जिनको बीजेपी की सरकार संदेश देना चाहती है उन तक ये संदेश पहुंचेगा या नहीं यह तो आने वाला समय बताएगा।
ये खबरें भी पढ़ें...
30 अप्रैल को छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र, निंदा प्रस्ताव लाएगी सरकार
साय कैबिनेट में बनेगा रणनीति का ब्लूप्रिंट! विशेष सत्र से पहले सरकार का बड़ा प्लान तैयार
एमपी विधानसभा विशेष सत्र में शामिल होंगे सीएम मोहन यादव, कांग्रेस विधायक दल की बैठक आज