टीआई दिनेश वर्मा को 6 साल बाद आरोपपत्र, DIG के आरोपत्र देने पर सवाल, हाईकोर्ट से स्टे

Sanjay Gupta | Oct 07, 2026, 13:03 IST
साइबर सेल निरीक्षक दिनेश वर्मा को हाईकोर्ट से बड़ी राहत
सायबर सेल में पदस्थ निरीक्षक दिनेश वर्मा को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। हाल में शुरू हुई उनकी विभागीय जांच के आदेश पर तकनीकी गलती के चलते हाईकोर्ट से रोक लग गई है। वहीं मामला 6 साल पुराना है जिसमें आरोपत्र हाल ही में जारी हुए और विभागीय जांच शुरू की गई थी।

हाईकोर्ट ने इसलिए लगाई रोक

यह मामला साल 2019-20 में तिलकनगर थाने में उनकी पदस्थापना के समय का है। अब करीब 6 साल बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जा रही है। इसी को लेकर टीआई वर्मा ने हाईकोर्ट में जांच के खिलाफ याचिका लगाई।



याचिका में उन्होंने कहा कि वे इंस्पेक्टर पद पर हैं और नियमों के मुताबिक उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश डीसीपी ही दे सकते हैं। लेकिन इस मामले में जांच के आदेश और आरोपपत्र डीआईजी कुमार प्रतीक की ओर से जारी किए गए।



इस पर हाईकोर्ट ने 26 मार्च 2025 को चार्जशीट जारी करने और आगे की पूरी प्रक्रिया पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।



हत्या को लेकर यह था पूरा मामला

दरअसल यह मामला 2019 में तिलकनगर थाना क्षेत्र में हुई एक हत्या से जुड़ा है। उस समय थाने के टीआई धर्मेंद्र शिवहरे थे। आरोपियों की गिरफ्तारी से लेकर पूरे मामले की जांच और आरोपियों को जेल भेजने तक की कार्रवाई उनके समय हुआ। हत्या में इस्तेमाल चाकू भी उन्हीं के समय जब्त किया गया था। इसके बाद धर्मेंद्र शिवहरे का ट्रांसफर हो गया। उनकी जगह मीणा कर्णावत टीआई बनीं। फिर करीब 15 दिन बाद दिनेश वर्मा ने टीआई का पद संभाला। इनके कार्यकाल में इस मामले में केवल चालान पेश किया गया।



एक इंच चाकू की नाप में उलझी पुलिस

टीआई वर्मा ने मामले में चालान पेश किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि पुलिस ने जब्ती में जिस चाकू की लंबाई तीन इंच बताई थी, फॉरेंसिक जांच में वही चाकू चार इंच का निकला। चाकू की नाप में इस अंतर के कारण आरोपी बरी हो गए।



इसके बाद साल 2025 में तत्कालीन टीआई शिवहरे के खिलाफ विभागीय जांच बैठी। साथ ही सिर्फ चालान पेश करने के आधार पर टीआई वर्मा को भी आरोप पत्र जारी कर दिया गया।



वर्मा ने अपने जवाब में कहा कि चाकू की जब्ती और मामले की बाकी पूरी जांच उनसे पहले के अधिकारियों ने की थी। उन्होंने सिर्फ चालान कोर्ट में पेश किया था। इसके बावजूद उन्हें भी विभागीय जांच में शामिल कर लिया गया। इसी कार्रवाई के खिलाफ टीआई वर्मा ने हाईकोर्ट का रुख किया।



वर्मा का हाल ही में सीपी ने डिमोशन किया था

इंदौर पुलिस कमिश्नर ने खजराना के पूर्व थाना प्रभारी (TI) दिनेश वर्मा को 'हाल ही में पॉकेट गवाह' के एक मामले में डिमोशन कर दिया था। उन्हें डीएसपी से फिर इंस्पैक्टर पद पर डिमोट किया गया। इसे भी वर्मा ने अपील के जरिए चुनौती दी है।



पुलिस कमिशनर संतोष सिंह कर रहे सख्त कार्रवाई

सीपी संतोष सिंह की सख्ती इस बार भी चर्चा में है। वे लगातार थाना प्रभारियों पर कार्रवाई कर उन्हें डिमोट कर रहे हैं। दिनेश वर्मा को पाकेट गवाह के मामले में डिमोट किया गया। वहीं विजयनगर के पूर्व टीआई रवींद्र गुर्जर पर भी डिमोशन की कार्रवाई हुई। साल 2024 में एक सट्टा केस में अनियमितता मिलने के बाद उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई थी। अब यह मामला हाईकोर्ट की डबल बेंच में है।



इसी तरह पूर्व टीआई अजय वर्मा को डिमोट कर एसआई बनाया गया। आम तौर पर विभागीय जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने और दोष सिद्ध होने पर इस तरह की सख्त डिमोशन की कार्रवाई की जाती है।



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