इंदौर में कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय बोले- अब राजपूत-ब्राह्मण की नहीं, Gen Z और Gen Alpha की जंग शुरू

Aman Vaishnav | Oct 26, 2026, 13:07 IST
इंद्रेश उपाध्याय का इंदौर में युवाओं से संवाद, जेन-जेड चर्चा में दिखी युवाओं की भीड़
athavachak Indresh Upadhyay interacts with youth at the Gen Z discussion held at DAVV Indore’s Takshashila campus, speaking on Gen Z, Gen Alpha and never giving up
इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के तक्षशिला परिसर में Gen-Z चर्चा हुई। इस दौरान कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि अब जंग राजपूत और ब्राह्मण जातियों की नहीं, Gen Z और Gen Alpha की है। इसके अलावा इंद्रेश उपाध्याय ने धोनी, सचिन और विराट का उदाहरण भी दिया। कार्यक्रम में करियर, रिश्ते और संस्कार जैसे विषयों के लिए मंच बना था।

जंग जातियों की नहीं, जेन-अल्फा की?

कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय (Indresh Upadhyay) ने बदलते दौर और युवाओं की सोच के संदर्भ में अपनी बात रखी। उन्होंने राजपूत और ब्राह्मण जातियों का नाम लेकर तुलना रखी। फिर कहा कि अब जंग जेन-जेड और जेन-अल्फा Gen Z, Gen Alpha) के बीच शुरू हो गई है।



सोचिए एक बार। जब चर्चा जातियों से हटकर नई उम्र के लोगों पर आ जाए, तो युवाओं के सामने कौन-से सवाल खड़े होते हैं? कथावाचक ने यही मुद्दा मंच से उठाया।



जेन-जेड और जेन-अल्फा का क्या मतलब?

बता दें कि ये दोनों नाम नई उम्र के लोगों की पहचान बताने के लिए इस्तेमाल होते हैं। कार्यक्रम का नाम ही जेन-Z चर्चा था। यानी बातचीत के केंद्र में युवा थे।



धोनी, सचिन, विराट का उदाहरण

सफलता पर बात करते हुए इंद्रेश उपाध्याय ने तीन नाम गिनाए। ये नाम थे महेंद्र सिंह धोनी, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली। उनके मुताबिक ये क्रिकेटर इसलिए सफल हुए, क्योंकि वे कभी टूटे नहीं।



कथावाचक ने मुश्किल हालात में डटे रहने पर जोर दिया। उनका कहना था कि सफलता के पीछे न टूटना भी एक अहम वजह रही। इसी उदाहरण के सहारे उन्होंने युवाओं तक अपना संदेश पहुंचाया।



मुश्किल हालात में डटे रहने की सीख

यह बात कार्यक्रम के मिजाज से भी जुड़ी थी। मंच करियर, रिश्ते, जीवन के उद्देश्य, संस्कार और व्यक्तिगत विकास जैसे विषयों के लिए तैयार किया गया था। इन सबमें डटे रहने की सीख युवाओं के काम आ सकती है।



करियर से रिश्तों तक, कौन से विषय?

कार्यक्रम में पांच विषयों पर चर्चा का मंच बना। ये थे करियर, रिश्ते, जीवन के उद्देश्य, संस्कार और व्यक्तिगत विकास। सोचिए एक बार। इन सवालों पर किसी कथावाचक से सीधे पूछने का मौका मिले, तो आप क्या पूछेंगे?



प्रवेश नि:शुल्क, सीधे सवाल का मौका

आयोजकों ने युवाओं को अपने सवाल सीधे इंद्रेश उपाध्याय से पूछने का अवसर दिया। कार्यक्रम में प्रवेश नि:शुल्क रखा गया था। यानी बिना शुल्क के कोई भी इच्छुक युवा इसका हिस्सा बन सकता था।



यह खबर क्यों जरूरी है?

यह खबर इसलिए जरूरी है कि इसमें युवाओं से सीधा संवाद हुआ। कथावाचक ने जातियों की जगह जेन-जेड और जेन-अल्फा की बात उठाई। संविधान सबको बराबरी का हक देता है, और जाति से आगे सोचने की बहस इसी से जुड़ती है। साथ ही न टूटने और डटे रहने का संदेश उन युवाओं के लिए अहम है जो करियर और रिश्तों के सवालों से गुजर रहे हैं।



FAQ



1. कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने इंदौर में क्या कहा?



उन्होंने कहा कि अब जंग राजपूत और ब्राह्मण जातियों की नहीं, जेन-जेड और जेन-अल्फा की शुरू हो गई है। यह बात उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में युवाओं से संवाद के दौरान कही।



2. कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने धोनी, सचिन और विराट का जिक्र क्यों किया?



इंद्रेश उपाध्याय ने सफलता के उदाहरण के तौर पर इन तीनों के नाम लिए। उनके मुताबिक ये क्रिकेटर इसलिए सफल हुए, क्योंकि वे कभी टूटे नहीं। उन्होंने मुश्किल हालात में डटे रहने पर जोर दिया।

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