मध्यप्रदेश में फार्मासिस्ट के 1132 पद खाली, सरकारी अस्पताल से दवा सुरक्षा तक निगरानी किसके भरोसे?
मध्यप्रदेश में मरीज को सही दवा देने से लेकर उसके सुरक्षित इस्तेमाल सवाल खड़े हो रहे है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 2623 नियमित फार्मासिस्ट पदों में 1132 खाली हैं। उधर इंदौर में जुलाई की दो दिन की जांच में 24 मेडिकल स्टोर में से 10 पर अनियमितताएं मिलीं। सवाल है-इतने बड़े दवा नेटवर्क की निगरानी आखिर किसके भरोसे है?
43% कुर्सियां खाली, जिम्मेदारी पूरी कैसे?
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियमित पदों के आंकड़ों के मुताबिक फार्मासिस्ट के 2623 स्वीकृत पद हैं। इनमें सिर्फ 1491 पद भरे हैं और 1132 खाली। यानी लगभग 43.2 प्रतिशत नियमित पद रिक्त हैं।
फार्मासिस्ट ग्रेड-1 में स्थिति और खराब है। 57 स्वीकृत पदों में केवल 24 भरे हैं और 33 खाली हैं। रिक्ति करीब 58 प्रतिशत बैठती है।
ग्रेड-2 के 2566 पदों में 1467 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 1099 पद खाली हैं। यानी यहां भी करीब 43 प्रतिशत पदों पर कर्मचारी नहीं हैं।
अस्पताल से बाजार तक एक ही सवाल-निगरानी कौन करे?
मामला सिर्फ सरकारी अस्पताल की डिस्पेंसरी तक सीमित नहीं है। जुलाई 2026 में इंदौर में औषधि विभाग ने दो दिनों में 24 मेडिकल स्टोर जांचे। इनमें 10 दुकानों पर अनियमितताएं सामने आईं और छह दवाओं के नमूने लिए गए।
जांच में यह भी देखा गया कि दवा बेचते समय योग्य फार्मासिस्ट मौजूद है या नहीं, लाइसेंस सही है या नहीं और खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड रखा जा रहा है या नहीं।
यही आंकड़ा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है-जब सीमित जांच में भी अनियमितताएं मिल रही हैं तो प्रदेश के पूरे मेडिकल स्टोर नेटवर्क की नियमित निगरानी कितनी व्यापक है?
ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी भी रही चिंता
नवंबर 2025 में सामने आए विभागीय आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट में प्रदेश में औषधि निरीक्षकों के 96 पदों में 17 रिक्त बताए गए थे। 79 नियुक्त निरीक्षकों में भी उस समय निलंबन और प्रशिक्षण के कारण केवल 67 फील्ड में काम कर रहे थे।
तत्कालीन नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन दिनेश श्रीवास्तव ने तब कहा था कि रिक्त पद भरने की प्रक्रिया की जा रही है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद नए निरीक्षकों को फील्ड में भेजा जाएगा।
भर्ती हुई, फिर 1132 पद खाली क्यों?
कमी दूर करने के लिए भर्ती भी निकली। 2024 की ग्रुप-5 भर्ती में फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के 29 और 2025 की पैरामेडिकल भर्ती में 313 पद शामिल किए गए। इसके बाद भी नियमित पदों में इतनी बड़ी रिक्ति बनी रहना भर्ती और पदस्थापना की गति पर सवाल उठाता है।
दूसरी तरफ प्रदेश में करीब 334 फार्मेसी संस्थान बताए गए हैं। यानी पढ़ाई कराने का नेटवर्क बड़ा है। लेकिन सरकारी अस्पतालों की खाली कुर्सियां अब भी नहीं भर पाईं।
समस्या सिर्फ मैनपावर की नहीं दिखती। अस्पताल में फार्मासिस्ट की कमी, बाजार में मेडिकल स्टोरों पर मिली अनियमितताएं। औषधि निरीक्षण तंत्र में पहले से दर्ज कर्मचारियों की कमी। इन तीनों को साथ रखकर देखें तो दवा सुरक्षा की पूरी चेन पर निगरानी का सवाल खड़ा होता है।
सरकार के लिए असली चुनौती अब केवल भर्ती घोषित करना नहीं, बल्कि यह सार्वजनिक करना भी है कि कितने मेडिकल स्टोर जांचे जा रहे हैं। कितने नमूने लिए जा रहे हैं, कितने अमानक निकल रहे हैं और कितने पद वास्तव में फील्ड में भरे हैं।
- मध्यप्रदेश में फार्मासिस्ट पदों की संख्या और रिक्तता के बारे में क्या जानकारी है?
मध्यप्रदेश में 2623 स्वीकृत फार्मासिस्ट पद हैं, जिनमें से 1132 पद खाली हैं, जिससे रिक्तता 43.2 प्रतिशत है। - इंदौर में मेडिकल स्टोर्स की जांच में क्या अनियमितताएं पाई गईं?
इंदौर में की गई जांच में 24 मेडिकल स्टोर्स में से 10 पर अनियमितताएं मिलीं, जिसमें योग्य फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति और लाइसेंस की जांच शामिल थी। - सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्टों की कमी से दवा सुरक्षा पर क्या असर पड़ रहा है?
सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्टों की कमी और मेडिकल स्टोरों पर मिली अनियमितताओं के कारण दवा सुरक्षा की पूरी चेन पर निगरानी का सवाल उठता है।