एमपी में 27% OBC आरक्षण: ओबीसी वर्ग के वकील बोले- सरकार की ओर से नहीं रखा किसी ने पक्ष

Neel Tiwari | Jan 29, 2026, 17:08 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई में सरकार की लापरवाही सामने आई। सुप्रीम कोर्ट ने 4 फरवरी 2026 को अगली सुनवाई तय की। अब 4 फरवरी को इस मामले की सुनवाई होगी।

NEWS IN SHORT

  • मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट में कोई वकील पेश नहीं किया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की लापरवाही पर नाराजगी जताई और खेद प्रकट किया।
  • अधिवक्ताओं ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लागू करने की गंभीरता से कोर्ट को अवगत कराया।
  • सरकार ओबीसी को आरक्षण देने के बावजूद 13% पदों को होल्ड कर रही है।
  • अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को होगी, सुप्रीम कोर्ट ने तारीख तय की है।

NEWS IN DETAIL

JABALPUR. मध्य प्रदेश में ओबीसी को 27% आरक्षण मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई। इस दौरान ओबीसी वर्ग के अधिवक्ताओं ने राज्य सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया। उनका आरोप था कि राज्य सरकार की ओर से कोई भी वकील इस सुनवाई में उपस्थित नहीं था।



सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब मामले को 106 नंबर पर सूचीबद्ध किया गया, तो कोई भी मध्य प्रदेश सरकार का वकील कोर्ट में मौजूद नहीं था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की।



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OBC अधिवक्ताओं ने उठाए सवाल

इस मामले पर ओबीसी वर्ग के सीनियर एडवोकेट अनूप चौधरी ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता समेत पांच अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नियुक्त किया है। फिर भी इस मामले में सुनवाई के दिन एक भी वकील उपस्थित नहीं हुआ।



यह लापरवाही सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है। इसके बावजूद, ओबीसी अधिवक्ताओं ने मामले की गंभीरता से कोर्ट को अवगत कराया और अगले फैसले की उम्मीद जताई।



क्या है 27% ओबीसी आरक्षण मामला?

यह मामला मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी को 27% आरक्षण देने से जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से इन मामलों को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने का आग्रह किया था। आरोप है कि सरकार ने ऐसा दबाव से बचने के लिए किया है।



मध्य प्रदेश सरकार भले ही भर्ती विज्ञापनों में ओबीसी को 27% आरक्षण देने की बात करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि 13% पदों को होल्ड किया जा रहा है, एक ओबीसी प्रतिनिधि ने कहा।



13% पदों की होल्डिंग

हालांकि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने इस मामले में कोई स्टे नहीं दिया है, लेकिन राज्य सरकार पिछले एक साल से अधिक समय से लगातार तारीख पर तारीख ले रही है। हर सुनवाई में समय मांगा जाता है, और सरकार के वकील कोर्ट में कभी नहीं पहुंचे।



यह सारा मामला उस 27% आरक्षण को लागू करने का है, जिस पर सरकार कार्रवाई नहीं कर पा रही है। सरकार को इस आरक्षण के लागू होने से बचने का कोई तरीका नहीं मिल रहा है।



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अगली सुनवाई 4 फरवरी को

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को निर्धारित की है। ओबीसी पक्ष के वकील कोर्ट में उपस्थित रहे और अपनी स्थिति को स्पष्ट किया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने खेद प्रकट किया और सरकार से बेहतर आचरण की उम्मीद जताई।



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