मध्यप्रदेश में राजस्व महाअभियान के बाद सुलझे 8.49 लाख मामले

Sanjay Sharma | Jul 02, 2025, 20:20 IST
Revenue Maha Abhiyan Photograph: (The Sootr)
मध्य प्रदेश में राजस्व विभाग ने रिकॉर्ड 8.49 लाख प्रकरणों का निराकरण किया है। फरवरी से शुरू हुए राजस्व महाअभियान 2.0 के तहत छह माह में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन जैसे विवादित प्रकरण सुलझाए गए हैं।

BHOPAL. राजस्व विभाग ने महाअभियान के दूसरे चरण के बाद लंबित मामलों के निराकरण की रफ्तार बढ़ा दी है। राजस्व महाअभियान 2.0 के दो चरणों के बाद बीते छह माह में विभाग ने रिकॉर्ड 8.49 लाख लंबित केस सुलझाए हैं। नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन जैसे विवादित प्रकरण सुलझने से राजस्व कार्यालयों पर भार कम हुआ है।



सबसे ज्यादा 32 हजार मामले भोपाल जिले के हैं जो कई सालों से अटके हुए थे। वहीं अलिराजपुर जिले के राजस्व कार्यालयों ने सबसे कम ढाई हजार केसों का निपटारा किया है। सालों से लंबित इन मामलों के निराकरण से राजस्व कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों को भी राहत मिली है। वहीं इन मामलों को लेकर तहसील, ब्लॉक और जिला कार्यालयों में भटकने वाले आमजन की परेशानी भी कम हुई है।



राजस्व दस्तावेजों के बोझ से निजात

मध्यप्रदेश के राजस्व कार्यालयों में दशकों पुराने विवादित जमीनी मामलों की भरमार थी। इनमें ज्यादातर प्रकरण कानूनी दावपेंचों के कारण उलझे हुए थे। इन मामलों के कारण जहां राजस्व कार्यालयों के रिकॉर्ड रूम ठसे हुए थे वहीं इन दस्तावेजों को संभालने में अधिकारी भी मुश्किल उठा रहे थे।



इस स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा राजस्व मामलों के निराकरण के लिए चरणबद्ध अभियान शुरू किए गए थे। पहले चरण में लंबित मामलों के समाधान के सकारात्मक नतीजों के बाद फरवरी 2025 से जून माह के बीच राजस्व न्यायालयों ने तेजी के साथ प्रकरणों का निराकरण किया है।



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भोपाल अव्वल, नए जिलों में भी तेजी

अधिकारियों की रुचि के चलते जमीन के नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के मामलों तेजी से सुलझे हैं। इन 6 माह में प्रदेश में लंबित 8,49,681 प्रकरणों का निराकरण किया गया है। राजस्व प्रकरणों के निराकरण में भोपाल सबसे अव्वल रहा है। जिले के राजस्व न्यायालयों ने 31,996 मामलों का समाधान किया है।



रीवा और इंदौर जिलों के अधिकारियों ने भी 31 हजार के आंकड़े को छुआ है। राजस्व प्रकरणों के निराकरण में छोटे जिलों ने भी प्रगति की है। कुछ साल पहले ही अस्तित्व में आए पांढुर्णा में 5,016, निवाड़ी में 4,491, मऊगंज में 6,788 और मैहर जिले में 8,612 मामलों का समाधान किया गया है।



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निराकरण में जिलों की स्थिति

भोपाल में 31,996 रीवा में 31,789 इंदौर में 31,540 छतरपुर में 28,325 जबलपुर में 28,167


उज्जैन में 26,614 ग्वालियर में 26,221 सागर में 25,841 छिंदवाड़ा में 23,084 कटनी में 22,299


भिण्ड में 21,964 बालाघाट में 21,897 मुरैना में 21,538 बैतूल में 21,407 शिवपुरी में 21,098


सिवनी में 20,725 विदिशा में 19,854 सतना में 18,959 सिंगरौली में 17,373 सीहोर में 17,112


देवास में 16,395 राजगढ़ में 15,911 दमोह में 15,616 रायसेन में 15,343 शाजापुर में 14,816


गुना में 14,784 मंदसौर में 14,776 दतिया में 14,501 खरगौन में 14,037 रतलाम में 13,720


सीधी में 13,653 धार में 13,362 खण्डवा में 13,413 शहडोल में 12,646 नर्मदापुरम में 12,089


पन्ना में 11,544 टीकमगढ़ में 11,387 मण्डला में 11,110 अनूपपुर में 10,690 आगर-मालवा में 10,417


अशोकनगर में 10,130 नरसिंहपुर में 9,650 डिण्डौरी में 9,203 नीमच में 8,710 मैहर में 8,612


उमरिया में 7,000 मऊगंज में 6,788 झाबुआ में 6,730 बुरहानपुर में 6,340 हरदा में 5,704


बड़वानी में 5,610 श्योपुर में 5,134 पांढुर्णा में 5,016 निवाड़ी में 4,491 अलीराजपुर में 2,550





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