मध्यप्रदेश के 88 हजार पेंशनर्स को बड़ी राहत: एक साल से रुका पैसा जारी
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में पेंशनर्स की ई-केवाईसी के लिए दमोह मॉडल अपनाया जाएगा।
- यह मॉडल अब प्रदेश के सभी 54 जिलों में लागू होगा।
- दमोह में सेवा एवं आशीर्वाद अभियान से 1664 बुजुर्गों की पेंशन बहाल हुई।
- सामाजिक न्याय विभाग ने 88 हजार पेंशनर्स की रुकी पेंशन जारी कर दी है।
- अब घर-घर जाकर अंगूठा, आंख या चेहरे से पहचान होगी।
मध्य प्रदेश में पेंशनर्स की ई-केवाईसी को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। ई-केवाईसी यानी Electronic Know Your Customer एक सत्यापन प्रक्रिया है। सामाजिक न्याय विभाग दमोह मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू कर रहा है। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगों और जरूरतमंद लोगों को सीधी राहत मिलेगी। साथ ही पेंशन व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
क्या है दमोह मॉडल
दमोह जिले के कलेक्टर ने कुछ समय पहले एक अभियान शुरू किया था। इसका नाम सेवा एवं आशीर्वाद अभियान रखा गया। इस अभियान के तहत पात्र बुजुर्गों की पहचान की गई। ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय और जनपद पंचायत ने मिलकर काम किया।
आधार सेवा केंद्रों की भी इसमें बड़ी भूमिका रही। टीमें सीधे लोगों के घर तक पहुंचीं। गांव और वार्ड स्तर पर इसका खूब प्रचार हुआ। कोशिश यह थी कि कोई पात्र व्यक्ति छूट न जाए।
वृद्ध, दिव्यांग और असहाय लोगों के लिए घर बैठे सुविधा दी गई। इसके लिए किसी से कोई फीस नहीं ली गई। जहां बायोमेट्रिक डिवाइस काम नहीं आया, वहां दूसरा तरीका अपनाया गया। वहां आईरिस या चेहरे की पहचान का इस्तेमाल हुआ।
कैसे हुई पहचान
आधार केंद्र प्रभारी बायोमेट्रिक और आईरिस डिवाइस लेकर घरों तक गए। बुजुर्गों के हाथ पहले अच्छे से धुलवाए गए। इसके बाद दसों उंगलियों के फिंगरप्रिंट मिलाए गए।
कई बुजुर्गों के मोबाइल नंबर आधार से जुड़े हुए हैं। ऐसे लोगों की पहचान ओटीपी (One Time Password) से भी हुई। इस तरीके से बुजुर्गों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़े।
1664 बुजुर्गों को राहत
दमोह कलेक्टर ने इस अभियान की जानकारी विभाग को दी। बताया कि अभियान से 1664 पात्र बुजुर्गों की पेंशन नियमित हो गई है। इन्हें सितंबर 2025 से पेंशन नहीं मिल रही थी।
इसकी सीधी वजह ई-केवाईसी का पूरा न होना थी। यह काम 18 मई 2026 से शुरू हुआ। इसे एक महीने के भीतर पूरा कर लिया गया। इससे इन बुजुर्गों की पेंशन दोबारा शुरू हो सकी।
88 हजार पेंशनर्स को राहत
दूसरी तरफ पूरे प्रदेश में भी बड़ी राहत मिली है। पिछले कई महीनों से ई-केवाईसी अटकी हुई थी। इसकी वजह से करीब 88 हजार पेंशनर्स की पेंशन रुकी थी।
सामाजिक न्याय विभाग ने अब इन सभी की पेंशन जारी कर दी है। इन पेंशनर्स को हर महीने 600 रुपए पेंशन मिलती है। यानी लंबे इंतजार के बाद इन परिवारों को राहत मिली है।
हालांकि विभाग ने एक बात साफ की है। पेंशन जारी होने के साथ ई-केवाईसी की प्रक्रिया भी जारी रहेगी। आगे भी पात्र लोगों की पहचान लगातार होती रहेगी।
घर-घर पहुंचेगी टीम
अब यही दमोह मॉडल पूरे 54 जिलों में लागू किया जा रहा है। आधार केंद्र प्रभारी बायोमेट्रिक और आईरिस डिवाइस के साथ लोगों के घर जाएंगे।
सामाजिक सुरक्षा अधिकारी और आधार सेवा केंद्रों के बीच तालमेल बनाया जाएगा। इससे हर जिले में यह अभियान तेजी से आगे बढ़ेगा। बुजुर्गों को अब बार-बार दफ्तर नहीं जाना पड़ेगा।
दो-तीन महीने का लक्ष्य
सामाजिक न्याय विभाग का एक साफ लक्ष्य है। सभी जिलों में ई-केवाईसी का काम दो से तीन महीने में पूरा हो। विभाग चाहता है कि भविष्य में किसी की पेंशन इस वजह से न रुके।
इसीलिए दमोह मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। यह फैसला विभाग ने खुद लिया है। विभाग की कोशिश है कि हर पात्र बुजुर्ग तक समय पर मदद पहुंचे।
क्यों जरूरी ई-केवाईसी
सरकार डिजिटल तरीकों से योजनाओं को पारदर्शी बनाने पर काम कर रही है। आधार आधारित सत्यापन से फर्जीवाड़ा रुकने की उम्मीद है।
इससे पात्र लाभार्थियों को सही समय पर पेंशन मिलेगी। जो लोग योजना के पात्र नहीं हैं, उनकी पहचान भी आसान होगी। इससे सरकारी पैसे का सही इस्तेमाल हो सकेगा।
विभाग का बयान
सामाजिक न्याय विभाग की प्रमुख सचिव सोनाली पोष वायंगणकर ने इस पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि पात्र पेंशनर्स की पेंशन जारी कर दी गई है। उनका कहना है कि ई-केवाईसी की प्रक्रिया भी लगातार जारी रहेगी।
उनके मुताबिक विभाग की पूरी कोशिश यही है। किसी भी पात्र बुजुर्ग की पेंशन ई-केवाईसी की वजह से न रुके। विभाग हर जिले में इस काम पर नजर रखेगा।
इस पूरी कवायद से प्रदेश के लाखों बुजुर्गों को फायदा मिलेगा। दिव्यांगों और जरूरतमंद लोगों को भी सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। आने वाले महीनों में हर जिले में यह अभियान और तेज होगा।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर बुजुर्ग, दिव्यांग और असहाय नागरिकों के सामाजिक सुरक्षा अधिकार से जुड़ी है। भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों में बुजुर्गों और कमजोर वर्गों की सहायता की बात कही गई है। पेंशन जैसी योजनाएं इसी भावना पर आधारित हैं।
दमोह मॉडल में सहमति से बायोमेट्रिक सत्यापन किया गया, बिना किसी फीस या दबाव के, जो डिजिटल निजता और पारदर्शिता का सही संतुलन दिखाता है। तकनीक के जरिए फर्जीवाड़ा रोकना और असली हकदार तक मदद पहुंचाना सुशासन का उदाहरण है।
इससे आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं पर भरोसा बढ़ता है। यह खबर बताती है कि प्रशासन कैसे संवेदनशील तरीके से डिजिटल व्यवस्था लागू कर सकता है।
FAQ
- ई-केवाईसी के लिए पेंशनर्स को क्या करना होगा?
पात्र पेंशनर्स को अभी कहीं जाने की जरूरत नहीं है। आधार केंद्र प्रभारी खुद बायोमेट्रिक और आईरिस डिवाइस लेकर घर आएंगे। जिनके मोबाइल नंबर आधार से जुड़े हैं, उनकी पहचान ओटीपी से भी हो सकती है। यह पूरी सुविधा मुफ्त दी जा रही है और किसी तरह की फीस नहीं ली जाएगी।
ये खबरें भी पढ़िए...
पुराना पेंशन विवाद खत्म, अब बिना छत्तीसगढ़ सहमति मिलेगा पेंशनर्स को डीआर
MP News: पेट्रोल पंप पर ग्राहकों के साथ खेला, बेच रहे पानी मिला डीजल
रेप मामले में एमपी पुलिस के तत्कालीन AIG को उम्रकैद, पॉस्को कोर्ट ने सुनाया फैसला
आज झाबुआ दौरे पर रहेंगे सीएम मोहन यादव, कई स्थानीय कार्यक्रम में होंगे शामिल