घर में पीएनजी कनेक्शन नहीं, फिर भी रसोई गैस बुकिंग बंद? भोपाल में एलपीजी कनेक्शन ब्लॉक पर उठे सवाल
पीएनजी नहीं पहुंच रही!
राजधानी भोपाल में करीब 98 हजार परिवारों के एलपीजी कनेक्शन ब्लॉक होने का मामला सामने आया है। इनमें 83 हजार ई-केवाईसी और 14 से 15 हजार पीएनजी रिकॉर्ड के कारण प्रभावित बताए गए हैं। सबसे गंभीर सवाल उन परिवारों का है, जिनके घर पीएनजी पहुंची ही नहीं। लेकिन रिकॉर्ड में सुविधा उपलब्ध बताकर एलपीजी बुकिंग रोक दी गई। अब उपभोक्ता पूछ रहे हैं। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के रसोई गैस क्यों रोकी गई?
रिकॉर्ड में पीएनजी, घर में कनेक्शन नहीं
भोपाल में रसोई गैस कनेक्शन ब्लॉक (LPG connection blocked ) होने का मामला अब सिर्फ ई-केवाईसी तक सीमित नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल सरकारी और गैस कंपनियों के रिकॉर्ड तथा घरों में वास्तव में उपलब्ध सुविधाओं के अंतर का है।
जानकारी के अनुसार, शहर की 30 से अधिक कॉलोनियों में करीब 14 से 15 हजार एलपीजी कनेक्शन पीएनजी उपलब्धता के रिकॉर्ड के आधार पर ब्लॉक किए गए हैं। कई जगह घरों तक पीएनजी कनेक्शन नहीं पहुंचने की शिकायत है। यही इस मामले का प्रमुख विरोधाभास है। यदि घर में पाइप गैस का कनेक्शन ही नहीं है तो एलपीजी बुकिंग रोकने से पहले वास्तविक उपलब्धता की जांच कैसे हुई?
83 हजार उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी अधूरी
भोपाल में करीब 83 हजार एलपीजी कनेक्शन ई-केवाईसी (e-KYC)पूरी नहीं होने के कारण ब्लॉक होने की जानकारी सामने आई है। केंद्र सरकार के 19 सितंबर 2026 के निर्देश के अनुसार, एक अक्टूबर से सब्सिडी वाली घरेलू एलपीजी रिफिल के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण जरूरी किया गया है।
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रमाणीकरण नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित डिजिटल माध्यम से विकल्प दर्ज कर एलपीजी प्राप्त करने की व्यवस्था है। इसलिए हर मामले में स्थायी रूप से गैस आपूर्ति बंद होना नियम का अनिवार्य परिणाम नहीं है।
हाईकोर्ट तक पहुंचा एलपीजी रोकने का विवाद
इस मामले में एक नया और महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी सामने आया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया है कि भोपाल के अयोध्या बायपास क्षेत्र की कुछ कॉलोनियों में पीएनजी सुविधा मिलने से पहले ही एलपीजी आपूर्ति रोक दी गई। राज्य सरकार का पक्ष है कि एलपीजी आपूर्ति केवल उन्हीं क्षेत्रों में रोकी गई, जहां पीएनजी सुविधा लागू हो चुकी थी। हाईकोर्ट ने संबंधित कॉलोनियों की वास्तविक स्थिति की जांच कर विस्तृत जानकारी देने को कहा है। यह किसी पक्ष की गलती सिद्ध करने वाला अंतिम फैसला नहीं है।
दो लाख घरों तक पाइपलाइन
पीएनजी विस्तार से जुड़ी एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में लगभग दो लाख घरों तक पाइपलाइन पहुंचने और करीब आधे घरों में कनेक्शन सक्रिय होने की जानकारी सामने आई थी। यह प्रदेश स्तर का पुराना आंकड़ा है, इसे भोपाल के वर्तमान सक्रिय कनेक्शनों की संख्या नहीं माना जा सकता। फिर भी यह अंतर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। क्या केवल पाइपलाइन बिछने को किसी घर में गैस सुविधा उपलब्ध होने के बराबर माना जा सकता है?
नियम क्या कहता है, उपभोक्ता को क्या अधिकार है?
केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में घरेलू पीएनजी कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी संबंधी नियम बदले थे। इसके बाद 25 मई को जारी संशोधन में पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन हटाने के लिए आवेदन करने या भविष्य में गैर-पीएनजी क्षेत्र में बहाली हेतु ट्रांसफर वाउचर लेने का विकल्प दिया गया। यहां कानूनी और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अंतर है। किसी कॉलोनी में पीएनजी नेटवर्क होना और किसी उपभोक्ता के घर में वास्तविक पीएनजी कनेक्शन होना अलग स्थितियां हैं।
कनेक्शन ब्लॉक है तो क्या करें?
जिला आपूर्ति नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन के बयान के अनुसार, उपभोक्ता संबंधित गैस एजेंसी में अपना पंजीकृत नंबर देकर कनेक्शन ब्लॉक होने का कारण पता कर सकते हैं। यदि पीएनजी उपलब्ध नहीं होने के बावजूद एलपीजी रोकी गई है तो लिखित शिकायत देकर सत्यापन और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कराई जा सकती है। समाधान नहीं मिलने पर संबंधित तेल कंपनी की वेबसाइट या ग्राहक सहायता माध्यम पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
रिकॉर्ड सुधरेगा या उपभोक्ता भटकेगा?
भोपाल में करीब 98 हजार प्रभावित कनेक्शनों का आंकड़ा प्रशासन और गैस कंपनियों के बीच समन्वय की जरूरत सामने लाता है। अब यह स्पष्ट होना जरूरी है कि कितने कनेक्शन ई-केवाईसी के बाद बहाल हुए, कितने घरों में वास्तविक पीएनजी सुविधा है और कितनी शिकायतें गलत रिकॉर्ड से जुड़ी हैं। सवाल केवल गैस कनेक्शन बहाल करने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि बिना वैकल्पिक सुविधा उपलब्ध कराए किसी पात्र परिवार की रसोई प्रभावित न हो।