MP में AAP के 131 पदाधिकारी घोषित, 230 सीटों पर चुनाव की तैयारी, अंदरूनी खींचतान पर सवाल

Ramanand Tiwari | Apr 03, 2026, 16:16 IST
aap-mission-mp
AAP मध्य प्रदेश की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। संगठन विस्तार के लिए 131 नए पद घोषित किए गए। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा जैसे नेताओं के बयान और पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों ने इसकी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आम आदमी पार्टी (AAP) देशभर में अपना संगठन तेजी से फैलाने में जुटी है और दावा कर रही है कि वह 230 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। मध्य प्रदेश में भी बड़े पैमाने पर पदाधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है।



दूसरी ओर, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा जैसे नेताओं के बयानों और पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों ने इसकी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या अंदरूनी दरारों के बीच AAP का यह विस्तार मजबूत नींव बना पाएगा या सिर्फ एक औपचारिक कवायद बनकर रह जाएगा?



MP में संगठन विस्तार का बड़ा दावा

मध्य प्रदेश में AAP ने हाल ही में 131 पदाधिकारियों की घोषणा की है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी, सह-प्रभारी, संगठन मंत्री जैसे कई अहम पद शामिल हैं। पार्टी का दावा है कि अब तक राज्य में करीब चार हजार पदाधिकारी बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा जिला से लेकर गांव स्तर तक संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।



हर विधानसभा तक पहुंचने की रणनीति

AAP ने MP की सभी 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इसके लिए हर जोन और विधानसभा स्तर पर सह-प्रभारी तैनात किए जा रहे हैं। पार्टी का फोकस बूथ स्तर तक अपनी पकड़ बनाने पर है, ताकि चुनावी जमीन तैयार की जा सके।



सह प्रभारी का दावा- टीम तैयार हो रही है

मध्य प्रदेश के सह-प्रभारी बिश्वेंद्र सिंह का कहना है कि पार्टी तेजी से अपनी टीम खड़ी कर रही है। उनके मुताबिक, जिलों से नीचे हर स्तर पर संगठन का विस्तार किया जा रहा है और जल्द ही इसका असर चुनावी मैदान में दिखेगा।



बड़ा सवाल: क्या संगठन ही काफी है?

यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ पदाधिकारी बनाने से पार्टी मजबूत हो जाती है? राजनीतिक जानकार मानते हैं कि संगठन विस्तार जरूरी है, लेकिन नेतृत्व की विश्वसनीयता और आंतरिक एकजुटता उससे भी ज्यादा अहम होती है।



राघव चड्ढा प्रकरण ने बढ़ाई बेचैनी

हाल ही में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाया गया और उनकी जगह अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद चड्ढा का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने इशारों-इशारों में पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। इससे यह संदेश गया कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।



आबकारी मामले के बाद गिरी साख

दिल्ली आबकारी घोटाले से जुड़े मामलों ने AAP की छवि को पहले ही नुकसान पहुंचाया है। अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं पर लगे आरोपों ने विपक्ष को हमला करने का मौका दिया है, जिससे पार्टी की विश्वसनीयता पर असर पड़ा है।



अपनी पार्टी में ही असंतोष के संकेत

एक ओर AAP हर राज्य में तेजी से संगठन खड़ा करने में जुटी है, तो दूसरी ओर उसके अपने कुनबे में असंतोष के संकेत मिल रहे हैं।


ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह विस्तार जमीन पर असर दिखाएगा या सिर्फ आंकड़ों तक सीमित रह जाएगा।



आगे का रास्ता आसान नहीं

मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 230 सीटों पर चुनाव लड़ना आसान नहीं है। अगर संगठन मजबूत भी हो जाए, तो भी बिना स्पष्ट नेतृत्व, रणनीति और भरोसे के चुनावी सफलता मिलना मुश्किल होगा।



AAP का मौजूदा मॉडल, तेजी से विस्तार और बड़े दावे पहली नजर में प्रभावी लगता है, लेकिन अंदरूनी असंतोष, नेतृत्व पर सवाल और हालिया विवाद इस रणनीति की कमजोरी भी उजागर करते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह पार्टी इन चुनौतियों से उबरकर खुद को फिर से मजबूत कर पाएगी, या फिर विस्तार का यह अभियान केवल एक अधूरी कोशिश बनकर रह जाएगा।



ये खबरें भी पढ़ें...



इंदौर यशवंत क्लब के बाहर बकाया टैक्स वसूली में मुनादी पर निगमायुक्त को अवमानना नोटिस



MP बजट 2025-26 का 1.74 लाख करोड़ खर्च नहीं कर पाया विभाग, अब तिमाही सीमा लागू



भोपाल की शराब कंपनियों पर शिकंजा, 62 करोड़ की बैंक गारंटी भुनाएगा आबकारी विभाग



इंदौर से CBI ने बैंक लोन घोटाले में सोनी इस्पात के डायरेक्टर राजीव लोचन सोनी को किया गिरफ्तार



Tags:
  • आम आदमी पार्टी
  • अरविंद केजरीवाल
  • AAP
  • मध्य प्रदेश
  • राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा