राहुल गांधी के दौरे से अफसरों की गैरमौजूदगी पर बढ़ा सियासी विवाद,अब आदेशों का रिकॉर्ड मांगेगी कांग्रेस
अफसरों को क्या लिखित निर्देश मिले थे?
बालाघाट में राहुल गांधी का दौरा खत्म हो गया, लेकिन कलेक्टर और एसपी की गैरमौजूदगी का विवाद अब शुरू हुआ है। कांग्रेस इसे केवल अफसरों के कार्यक्रम में नहीं पहुंचने तक सीमित नहीं रखना चाहती। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari ) ने दावा किया है कि दौरे की सूचना प्रशासन को थी। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अधिकारियों को क्या निर्देश मिले थे और उनकी गैरमौजूदगी की वजह क्या थी?
कलेक्टर-एसपी कहां थे नहीं, उन्हें निर्देश क्या थे?
राहुल गांधी (Rahul Gandhi ) एक अक्टूबर को बालाघाट के जगला गांव पहुंचे थे। उन्होंने आदिवासी परिवारों से मुलाकात की और बच्चों की मौत, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा कुपोषण का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं।
अब इस दौरे से जुड़ा दूसरा विवाद राजनीतिक केंद्र में आ गया है। जीतू पटवारी का आरोप है कि पूर्व सूचना और मुख्य सचिव से बातचीत के बावजूद बालाघाट के कलेक्टर और एसपी मौके पर मौजूद नहीं रहे। कांग्रेस इसे प्रोटोकॉल और प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़ रही है।
अब अधिकारियों की जिम्मेदारी और सुरक्षा निर्देशों पर सवाल हैं। प्रशासन को दौरे की सूचना कब मिली थी? कलेक्टर और एसपी की क्या जिम्मेदारी तय थी? क्या उनकी जगह दूसरे अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई? सुरक्षा और प्रोटोकॉल पर क्या लिखित निर्देश जारी हुए? राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने क्या निर्देश दिए? जिला प्रशासन ने क्या लिखित निर्देश जारी किए? पटवारी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। उन्होंने इन बिंदुओं की जांच की मांग की है।
मामला ऊपर तक ले जाएगी कांग्रेस
जीतू पटवारी का कहना है कि कांग्रेस कलेक्टर और एसपी की गैरमौजूदगी को विधानसभा में उठाएगी। पार्टी राष्ट्रपति और केंद्रीय गृहमंत्री तक शिकायत पहुंचाने तथा विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाने पर भी विचार कर रही है।
पटवारी ने इसे सरकार और प्रशासन के बीच तालमेल के बड़े सवाल से भी जोड़ा है। उनके अनुसार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों में समन्वय की शिकायतें हैं। सरकार को प्रशासनिक जवाबदेही पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है। इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
बच्चों की मौत का संवेदनशील मुद्दा
इस राजनीतिक विवाद का मूल विषय आदिवासी बच्चों की मौत है। राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और स्वास्थ्य, पोषण तथा बुनियादी सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग के आकलन में बच्चों की मौतों के पीछे मलेरिया, खसरा, कुपोषण, एनीमिया और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख सामने आया है। कांग्रेस अब आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पोषण और विकास के लिए आवंटित राशि के इस्तेमाल का विवरण भी सार्वजनिक करने की मांग कर रही है।
सिर्फ बालाघाट नहीं, दूसरे मामलों को भी जोड़ा
पटवारी ने बालाघाट के साथ सागर में संदिग्ध जहरीली शराब कांड, इंदौर में दूषित पानी और छिंदवाड़ा में कफ सिरप से जुड़ी मौतों का मामला भी उठाया है। उन्होंने इन मामलों में पारदर्शी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
कांग्रेस ने प्रदेश के कर्ज और सरकारी खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग भी जोड़ी है। कर्ज से जुड़ी बड़ी संख्याएं राजनीतिक दावों के रूप में सामने आई हैं, इसलिए स्वतंत्र सरकारी आंकड़ों से पुष्टि के बिना उन्हें अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
अब सरकार के जवाब पर टिकेगा मामला
कांग्रेस के आरोपों से अलग प्रशासनिक रूप से सबसे अहम तथ्य यह होगा कि राहुल गांधी के दौरे के लिए जारी आधिकारिक ड्यूटी और सुरक्षा आदेश क्या कहते हैं। इन्हीं दस्तावेजों से स्पष्ट हो सकेगा कि कलेक्टर-एसपी की व्यक्तिगत मौजूदगी अपेक्षित थी या व्यवस्था किसी अन्य अधिकारी को सौंपी गई थी। यानी विवाद अब केवल दो अफसर क्यों नहीं आए का नहीं है। अगला सवाल दस्तावेजों का है सूचना कब मिली, आदेश किसने दिया और जिम्मेदारी किसकी तय थी?