रेलवे का नया नियम, एसी कोच में चोरी हुई तो अटेंडर होगा आरोपी

Sanjay Dhiman | Aug 15, 2026, 12:03 IST
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रेलवे ने सर्कुलर जारी कर कहा है कि एसी कोच में चोरी होने पर अटेंडर को भी आरोपी बनाया जाएगा। विदिशा और ग्वालियर में चोरी के मामले लगातार बढ़े हैं।

भारतीय रेलवे ने एसी कोच में चोरी को लेकर सख्त सर्कुलर जारी किया है। अब चोरी होने पर अटेंडर को भी आरोपी बनाया जाएगा। यह फैसला बढ़ती चोरी की घटनाओं के बाद लिया गया है। विदिशा और ग्वालियर में मामले तेजी से बढ़े हैं। रेलवे का कहना है कि यात्री सुरक्षा पहली प्राथमिकता है।



ट्रेन के एसी कोच में होने वाली चोरी अब सिर्फ यात्री की बदकिस्मती नहीं मानी जाएगी। रेल मुख्यालय ने साफ कर दिया है कि इसकी जिम्मेदारी अटेंडर की भी होगी। सर्कुलर में कहा गया है कि चोरी की स्थिति में अटेंडर को अनिवार्य रूप से आरोपी बनाया जाएगा।



रेल पुलिस मुख्यालय का तर्क सीधा है। कोच की निगरानी और यात्रियों की सुरक्षा अटेंडर की ड्यूटी में आती है। ऐसे में उसकी ड्यूटी के दौरान चोरी होना खुद में एक सवाल बन जाता है। यही सवाल अब जांच का आधार बनेगा।



पिछले कुछ समय से एसी कोच में चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं। कुछ मामलों में अटेंडरों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। इन्हीं वजहों से रेलवे पुलिस मुख्यालय ने लगाम कसने का फैसला किया है।



विदिशा-ग्वालियर के आंकड़े

रेलवे पुलिस की जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जीआरपी (GRP – Government Railway Police) थाना विदिशा में तीन साल में 116 मामले दर्ज हुए। इनमें ज्यादातर चोरी एसी कोच में हुई। स्लीपर और जनरल कोच में ऐसी घटनाएं काफी कम रहीं।



ग्वालियर जीआरपी क्षेत्र के आंकड़े और भी गंभीर हैं। 2022 में यहां एसी कोच में 109 चोरी हुई। 2023 में यह संख्या 129 तक पहुंची। 2024 में मामले सीधे 334 तक जा पहुंचे।



यानी सिर्फ दो साल में चोरी के मामले करीब तीन गुना बढ़ गए। यही ट्रेंड रेलवे की चिंता की बड़ी वजह बना। आंकड़ों ने साफ कर दिया कि एसी (AC – Air Conditioned) कोच अब चोरों के लिए आसान निशाना बन रहे हैं।



अटेंडर क्यों शक के घेरे में

इसी साल फरवरी में एक बड़ा मामला सामने आया था। रेलवे नेटवर्क के जरिए वन्यजीव तस्करी का खुलासा हुआ। इस मामले में एक कोच अटेंडेंट को मुख्य आरोपी बनाया गया।



आरोपी के पास से दो बैगों में छिपाकर रखे कछुए बरामद हुए। इनकी संख्या 311 थी। ये सभी दुर्लभ और प्रतिबंधित प्रजाति के जीवित कछुए थे।



इस घटना ने रेलवे की चिंता और बढ़ा दी। इसके अलावा सामान चोरी के कई मामलों में भी अटेंडरों की भूमिका शक के दायरे में आई। यही वजह है कि अब उन्हें सीधे जिम्मेदारी के दायरे में लाया जा रहा है।



रेलवे का रुख साफ

डीजी (DG – Director General) रेल राजाबाबू सिंह ने इस पर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा जीआरपी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। अगर एसी कोच में चोरी होती है, तो अटेंडर को आरोपी बनाया जाएगा।



उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ते मामलों में अटेंडरों की भूमिका की जांच जरूरी हो गई है। रेलवे का मानना है कि इस कदम से चोरी की घटनाओं में कमी आएगी। साथ ही अटेंडरों की जवाबदेही भी तय होगी।



यह नया नियम आने वाले दिनों में सख्ती से लागू किया जा सकता है। यात्रियों के लिए यह राहत की खबर मानी जा रही है। वहीं अटेंडरों के लिए ड्यूटी के दौरान सतर्कता अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है।



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