ACS मनीष रस्तोगी समेत 3 अफसरों के खिलाफ जमानती वारंट, 15 जुलाई को कोर्ट में होना होगा पेश
समझें क्या है पूरा मामला...
- ACS मनीष रस्तोगी समेत तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर जमानती वारंट जारी किए हैं।
- जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने अवमानना मामले में दिया सख्त आदेश दिया है।
- 8 मई 2024 के आदेश के बावजूद सेवानिवृत्त अधिकारी को राशि वापस नहीं लौटाई गई थी।
- दो अन्य अधिकारियों को भी कोर्ट ने फोन कर तत्काल तलब कराया और स्पष्टीकरण मांगा है।
- 15 जुलाई को सभी अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से हाई कोर्ट में उपस्थित रहने के निर्देश है।
आदेश की अवहेलना पर हाईकोर्ट का सख्त रुख
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने न्यायालय के आदेशों की लगातार अनदेखी और वरिष्ठ अधिकारियों की गैरहाजिरी को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनीष रस्तोगी, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेलवेन्द्रम और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक अजय गुप्ता के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। यह जमानती वारंट 25-25 हजार रुपए के हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तीनों अधिकारी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आदेश के पालन की रिपोर्ट पेश करेंगे।
रिट कोर्ट के आदेश का नहीं हुआ पालन
मामला कृषि विभाग, जबलपुर के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर देवदत्त विश्वकर्मा द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिका में बताया गया कि 30 जून 2023 को सेवानिवृत्ति के बाद उनसे दो लाख 10 हजार रुपए की वसूली की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 08 मई 2024 को आदेश दिया था कि वसूली गई पूरी राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस की जाए। आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद राशि वापस नहीं की गई, जिसके चलते अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।
व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश के बाद भी नहीं आए अधिकारी
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, उत्तरदाता क्रमांक एक, दो और तीन को पहले ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद न तो एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनीष रस्तोगी की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित हुआ और न ही व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट का आवेदन दिया गया।
वहीं अन्य दो वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता तो उपस्थित हुए, लेकिन अधिकारी स्वयं अदालत नहीं पहुंचे। अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए कहा कि आदेशों की अवहेलना स्वीकार नहीं की जा सकती।
एसपी के जरिए तामील होंगे जमानती वारंट
जबलपुर हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि तीनों अधिकारियों के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी किए जाएं। साथ ही, उनकी तामील संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP) के माध्यम से कराई जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई पर सभी अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
दो अधिकारियों को फोन कर बुलाना पड़ा
सुनवाई के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी एस.के. निगम और संभागीय पेंशन अधिकारी नमिता भी प्रारंभिक सुनवाई में उपस्थित नहीं थे। न्यायालय को राज्य शासन के अधिवक्ता को निर्देश देना पड़ा कि दोनों अधिकारियों को तत्काल फोन कर अदालत बुलाया जाए। बाद में उनके उपस्थित होने पर कोर्ट ने उनसे यह स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए कि पहले से आदेश होने के बावजूद वे समय पर अदालत में क्यों उपस्थित नहीं हुए।
15 जुलाई को सभी अधिकारियों को देना होगा जवाब
हाईकोर्ट ने मामले को 15 जुलाई 2026 के लिए सूचीबद्ध करते हुए निर्देश दिए हैं कि रिट कोर्ट के 08 मई 2024 के आदेश के पूर्ण अनुपालन की रिपोर्ट पेश की जाए। साथ ही, सभी संबंधित अधिकारी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित रहेंगे। अदालत ने संकेत दिया है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना को किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जाएगा।
ये खबरें भी पढ़िए...
मध्यप्रदेश | जबलपुर रेलवे मेडिकल क्लेम घोटाला: 40 लाख की गड़बड़ी में दो क्लर्क सस्पेंड
नाजिया इलाही खान पर MP में पहली FIR, जबलपुर में 4 दिन के विरोध के बाद केस दर्ज
आधार के लिए 6 साल से भटक रहा था मजदूर परिवार, जबलपुर कलेक्ट्रेट ने 3 घंटे में बना दिया
MP News. जबलपुर क्रूज हादसा: जांच आयोग ने इंजन-जनरेटर सुरक्षित रखने के दिए निर्देश