MP में नकली घी का बड़ा खेल, लाखों का माल जब्त, कई ब्रांड जांच में फेल
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में मिलावटी घी के खिलाफ बड़ा अभियान चल रहा है।
- भोपाल और खरगोन में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कई जगह छापे मारे हैं।
- जांच में कई नामी ब्रांड के घी सैंपल तय मानकों पर फेल हुए हैं।
- इनमें वनस्पति तेल और सीसा जैसे हानिकारक तत्व मिले हैं।
- खंडवा में चर्बी वाले घी के खुलासे के बाद यह अभियान तेज हुआ है।
मध्य प्रदेश में त्योहारी सीजन आते ही मिलावटी घी का कारोबार फिर सामने आया है। राज्य के कई जिलों में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। जुलाई 2026 से दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता जांचने का विशेष अभियान चल रहा है।
यह अभियान राज्य सरकार के निर्देश पर शुरू हुआ है। मकसद यह सुनिश्चित करना है कि दूसरे राज्यों से मध्य प्रदेश आने वाले डेयरी उत्पाद तय मानकों पर खरे उतरें।
भोपाल में बड़ी कार्रवाई
राजधानी भोपाल में जिला प्रशासन की टीम ने घी के जो सैंपल जांच के लिए भेजे थे, वे सभी तय मानकों पर फेल पाए गए हैं। गोवर्धन प्योर काउ घी, द्वारकेश और धौलपुर फ्रेश प्रीमियम क्वालिटी देसी घी के नमूने एफएसएसएआई यानी FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) के मानकों पर खरे नहीं उतरे।
रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कंपनियों और विक्रेताओं पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई हो रही है। इन कंपनियों का करीब 25 लाख रुपए का माल सीज किया गया है।
घी में क्या हानिकारक तत्व मिले
जांच में द्वारकेश घी के नमूने में बीटा-सिटोस्टेराल नाम का तत्व 2.38 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम मिला है। शुद्ध घी में यह तत्व बिल्कुल नहीं होना चाहिए। यह वनस्पति तेल या वनस्पति वसा मिलाने का संकेत माना जाता है।
इसके अलावा बीआर रीडिंग, पोलेंस्के वैल्यू, आयोडीन वैल्यू और सैपोनिफिकेशन वैल्यू भी तय मानकों से अलग मिली है। वहीं गोवर्धन प्योर काउ घी के नमूने में सीसा यानी लीड की मात्रा मिलने से विभाग की चिंता और बढ़ गई है। सीसा शरीर के लिए बेहद हानिकारक धातु माना जाता है।
मंगलवारा में जब्त हुआ भारी स्टॉक
भोपाल के मंगलवारा-जुमेराती इलाके में स्थित शीतला पूजा भंडार पर भी खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की। यहां से अरिहंत और मक्खन श्री ब्रांड का भारी स्टॉक बरामद हुआ। टीम ने अरिहंत घी के 15 किलोग्राम क्षमता वाले 33 टीन यानी कुल 494 किलोग्राम माल जब्त किया।
इसकी अनुमानित कीमत तीन लाख 95 हजार 200 रुपए आंकी गई है। इसके अलावा मक्खन श्री घी के 60 टीन भी जब्त कर चार नमूने जांच के लिए लिए गए। इस पूरी कार्रवाई में करीब सात लाख पांच हजार 200 रुपए का माल जब्त किया गया।
किसने की यह कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवराज पावक, अरुणेश पटेल, पंकज श्रीवास्तव, साधना सक्सेना और वर्षा व्यास की टीम ने की। फूड एंड ड्रग प्रभारी शिवराज पावक के मुताबिक जांच में घी में गंभीर अमानक तत्व मिले हैं।
उन्होंने बताया कि पूरा माल सीज करके प्रदेश में मौजूद इन कंपनियों के सभी गोदाम से माल उठवाया जा रहा है। सैंपल रिपोर्ट में हानिकारक तत्व की पुष्टि होने के बाद संबंधित संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
खरगोन में भी छापा, 364 लीटर घी जब्त
भोपाल के अलावा खरगोन शहर में भी खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जवाहर मार्ग स्थित बृजेश ट्रेडिंग कंपनी पर छापा मारा गया। यहां धौलपुर फ्रेश ब्रांड के नाम से देशी घी बेचा जा रहा था। घी में मिलावट और नकली होने की आशंका के चलते विभाग ने यह कार्रवाई की। टीम ने मौके से करीब दो लाख 17 हजार रुपए कीमत का 364 लीटर देशी घी जब्त कर सील कर दिया।
भोपाल लैब भेजे गए सैंपल
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने खरगोन में अचानक दबिश देकर अलग-अलग पैकिंग के चार सैंपल लिए हैं। इन्हें जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी एच. एल. आवस्या के मुताबिक नकली और मिलावटी घी बेचने की शिकायत और आशंका पर यह कार्रवाई हुई है। उन्होंने बताया कि जब्त 364 लीटर घी की जांच रिपोर्ट भोपाल से आने के बाद नियमानुसार आगामी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इंदौर में भी 25 हजार लीटर घी पर रोक
इंदौर में भी खाद्य सुरक्षा विभाग और एफएसएसएआई की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। एबी रोड स्थित पराग मिल्क फूड्स लिमिटेड के डिपो पर छापा मारा गया। यह डिपो पूरे मध्य प्रदेश में गोवर्धन ब्रांड के घी की आपूर्ति का मुख्य केंद्र माना जाता है।
यहां से अलग-अलग पैकिंग साइज के 20 सैंपल जांच के लिए लिए गए। इसके साथ ही करीब 25 हजार लीटर गोवर्धन घी की बिक्री पर रोक लगा दी गई। इसके अलावा साउथ हरसिद्धि स्थित एक प्रतिष्ठान से गोपी श्री ब्रांड घी के भी चार नमूने लिए गए। करीब 312 लीटर गोपी श्री घी को भी जांच रिपोर्ट आने तक जब्त कर दिया गया है।
खंडवा मामले ने बढ़ाई सख्ती
इस पूरे अभियान को खंडवा में सामने आए एक चौंकाने वाले मामले ने और तेज कर दिया। खंडवा में एक फैक्ट्री में मरे हुए जानवरों की चर्बी से नकली घी बनाया जा रहा था। प्रशासन ने वहां छापा मारकर फैक्ट्री को सील किया और आरोपी को गिरफ्तार किया।
इस मामले के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश का खाद्य एवं औषधि प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक मनोज पुष्प ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत सभी जिलों के अधिकारियों को मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए।
आगे क्या होगी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत सभी संबंधित कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद संचालकों के खिलाफ जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई हो सकती है। विभाग का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक जब्त माल की बिक्री पर रोक बनी रहेगी। आने वाले दिनों में प्रदेश के बाकी जिलों में भी इसी तरह की जांच जारी रहने की उम्मीद है।
आम लोगों के लिए क्यों जरूरी है यह खबर
यह मामला सीधे तौर पर आम लोगों की सेहत से जुड़ा है। नकली और मिलावटी घी खाने से शरीर को गंभीर नुकसान हो सकता है। सीसा जैसी धातु लंबे समय तक शरीर में जमा होकर बीमारियां पैदा कर सकती है। त्योहारी सीजन में घी की मांग बढ़ जाती है, इसी वजह से मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है। ग्राहकों को नामी ब्रांड पर भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। खरीदते समय पैकिंग, एफएसएसएआई नंबर और एक्सपायरी डेट जरूर जांचनी चाहिए।
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