भोपाल में बनी अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पहली वैक्सीन, शिवराज सिंह चौहान ने की लॉन्च
भोपाल के वैज्ञानिकों ने अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पहली स्वदेशी वैक्सीन बनाई है। यह वैक्सीन सुअरों को इस जानलेवा बीमारी से बचाएगी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे दिल्ली में लॉन्च किया। पहले इस बीमारी का कोई इलाज उपलब्ध नहीं था। अब यह वैक्सीन देश के करोड़ों सुअर पालकों के लिए बड़ी राहत बनकर आई है।
भारत ने पशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान (NIHSAD – National Institute of High Security Animal Diseases) के वैज्ञानिकों ने यह कमाल किया है। उन्होंने सुअरों के लिए अपनी तरह की पहली सुरक्षित और स्वदेशी वैक्सीन तैयार की है।
इस उपलब्धि को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR – Indian Council of Agricultural Research) के 98वें स्थापना दिवस पर देश को समर्पित किया गया।
लॉन्च कहां हुआ
यह लॉन्च नई दिल्ली के NASC (National Agricultural Science Centre) परिसर में हुआ। इसे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्र को समर्पित किया। इस मौके पर केंद्रीय पशुपालन मंत्री राजीव रंजन सिंह भी मौजूद रहे। साथ ही राज्य मंत्री और ICAR के महानिदेशक एमएल जाट भी उपस्थित थे।
यह वैक्सीन NIHSAD भोपाल के निदेशक डॉ. अनिकेत सान्याल के नेतृत्व में बनी है। उनकी टीम में डॉ. डी. सेंथिल कुमार, डॉ. के. राजूकुमार, डॉ. जी. वेंकटेश और डॉ. फतेह सिंह शामिल रहे। यह वर्षों की मेहनत का नतीजा है।
वैक्सीन की खासियतें
यह वैक्सीन MA-104 सेल लाइन पर आधारित है। इससे इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन आसान और सस्ता हो जाता है। परीक्षणों में इस वैक्सीन ने सुरक्षा और असर के मामले में बेहतरीन नतीजे दिए हैं।
इस वैक्सीन की एक खुराक सिर्फ 1 मिलीलीटर की होती है। यह गर्दन की मांसपेशी में दी जाती है। 14 दिन बाद एक बूस्टर डोज दी जाती है। यह टीका 8 सप्ताह से बड़े स्वस्थ सुअरों के लिए उपयुक्त है। इसके असर से सुअरों में 6 महीने तक रोग-प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है।
सबसे अहम बात यह है कि इस वैक्सीन से वायरस के दोबारा खतरनाक बनने का कोई जोखिम नहीं पाया गया।
2020 से बड़ी चुनौती
अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF – African Swine Fever) सुअरों में फैलने वाली एक बेहद खतरनाक बीमारी है। इस बीमारी में सुअरों की मृत्यु दर लगभग 100 प्रतिशत तक होती है। भारत में यह बीमारी पहली बार साल 2020 में सामने आई थी। इसके बाद यह कई राज्यों में फैल गई। यह देश के पशुधन क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन गई थी।
अब तक इलाज क्यों नहीं था
अब तक भारत में इस बीमारी का कोई मान्य टीका मौजूद नहीं था। बीमार पशुओं को मारना ही एकमात्र उपाय बचता था। साथ ही सख्त जैव-सुरक्षा नियमों का पालन करना पड़ता था। यह किसानों के लिए बेहद कठिन और नुकसानदायक स्थिति थी।
किसानों को होगा फायदा
यह नई वैक्सीन देश के करोड़ों गरीब और मध्यमवर्गीय सुअर पालकों को बड़ी आर्थिक राहत देगी। अब उन्हें बीमारी के डर से पशु गंवाने की चिंता कम होगी। यह उनके व्यवसाय को सुरक्षित बनाएगी।
वैश्विक स्तर पर मौका
यह आविष्कार भारत को पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाता है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया दृष्टिकोण को भी मजबूत करता है।
अफ्रीकन स्वाइन फीवर दुनिया भर के कई देशों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। भारत में बनी यह सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली वैक्सीन अब उन देशों को निर्यात की जा सकेगी। इससे भारत की वैज्ञानिक प्रतिष्ठा और मजबूत होगी। साथ ही विदेशी मुद्रा कमाने के नए रास्ते भी खुलेंगे।
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अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कहर